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Kurukshetra News: अब ऑनलाइन और डिस्टेंस मोड के छात्र भी खेलों में दिखा सकेंगे प्रतिभा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jan 2026 01:25 AM IST
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Now, students in online and distance mode will also be able to showcase their talent in sports.
कुरुक्षेत्र। कुवि का दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र।
कुरुक्षेत्र। अब ऑनलाइन और डिस्टेंस मोड के छात्र भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिभा दिखाकर विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन कर सकेंगे। इंटर-यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में अब तक नियमित कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ही अधिक प्राथमिकता मिलती थी लेकिन एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी (एआईयू) ने इस पर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।
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हैंडबुक ऑफ रूल्स एंड रेगुलेशंस-2025 में किए गए संशोधन के अनुसार अब ऑनलाइन और डिस्टेंस मोड से पढ़ रहे छात्र भी इंटर-यूनिवर्सिटी गेम्स में भाग लेने के लिए पूरी तरह पात्र होंगे। यह निर्णय खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए राहत भरा है, जो निजी वजहों, रोजगार या अन्य दायित्वों के कारण नियमित कॉलेज नहीं जा पाते लेकिन अब यदि कोई छात्र विश्वविद्यालय में किसी एक वर्षीय कोर्स में विधिवत पंजीकृत है, तो वह इंटर-यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकता है।
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यह कदम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के तहत नियमित कक्षा शिक्षा, ऑनलाइन/डिस्टेंस शिक्षा और हाइब्रिड मॉडल को समान महत्व देने के सिद्धांत को मजबूती देता है। विवि के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र के विद्यार्थियों को भी इसका फायदा मिलेगा। एआईयू की ओर से स्पष्ट किया गया है कि केवल ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड में नामांकन होने के आधार पर किसी भी छात्र को बाहर करना अब प्रतिबंधित है। इसके साथ ही एफआईएसयू पात्रता मानकों को पूरा करने वाले विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगे और एआईयू के सभी मानदंडों को पूरा करने वाले छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सेदारी कर सकेंगे।
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यह निर्णय शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में देता है समान अवसर
दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र की निदेशक प्रो. मंजुला चौधरी का कहना है कि यह निर्णय शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में समान अवसर को बढ़ावा देता है। समावेशी शिक्षा का मजबूत उदाहरण है जिसमें हर विद्यार्थी को बिना भेदभाव प्रतिभा साबित करने का मौका मिलेगा।

देशभर में अपनाई जा रही डिजिटल शिक्षा
डिजिटल शिक्षा को देशभर में अपनाया जा रहा है। इसलिए खेलों में भी इसे समान दर्जा मिलना बेहद जरूरी था। यह कदम उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा जो पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं।

- प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलपति, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय।
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