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Kurukshetra News: अब गांव-गांव किसानों को साधने के लिए तैयारी
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कुरुक्षेत्र। सूरजमुखी फसल की खरीद मनमाफिक एमएसपी के अनुसार किए जाने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। 12 जून को पिपली में होने वाली किसानों की महारैली पर हर किसी की निगाहें टिक गई हैं। संभावना जताई जा रही है कि इसमें हरियाणा ही नहीं आसपास के प्रदेशों के भी किसान बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। इसे सफल बनाने के लिए किसानों ने भी भरसक प्रयास शुरू कर दिए हैं। किसान गांव-गांव पहुंचकर किसानों को साधने में जुटे हैं
जनसंपर्क के दौरान किसान नेता किसानों को सरकार की नीतियों से होने वाले नुकसान से भी अवगत करा रहे हैं। किसानों को गांवों से भरपूर समर्थन मिलने की भी उम्मीद है। ऐसे में वह मान रहे हैं कि महारैली निर्णायक साबित हो सकती है, जिसके चलते किसानों ने इसे सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
वर्तमान में शाहाबाद में ही सांकेतिक धरना चलाया गया है जहां वीरवार को भी सैकड़ों किसान दिन भर मौजूद और सरकार की नीतियों के विरोध में रोष भी जताया। वहीं बाकी किसान नेताओं ने महारैली को सफल बनाने का मोर्चा संभाल लिया है।
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दिल्ली आंदोलन के बाद राहें हुई थी जुदा-जुदा, अब एक
दिल्ली में चलाए जा रहे आंदोलन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा व भाकियू नेता गुरनाम चढूनी की राहें जुदा हो गई थीं। कईं बार चढूनी अकेले ही संघर्ष करते रहे, लेकिन छह जून हो शाहाबाद में हुए लाठीचार्ज व सूरजमुखी की खरीद एमएसपी पर किए जाने को लेकर चलाए आंदोलन ने फिर एक कर दिया है। एसकेएस के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी शाहाबाद पहुंचकर यह स्पष्ट संकेत दिया तो उन्होंने आंदोलन कर रहे किसानों में जोश भी भर दिया।
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ब्लाक कांग्रेस के पक्ष में की नारेबाजी तो नाराज हुए किसान
शाहाबाद में वीरवार को दीपेंद्र हुड्डा के आने से कुछ पहले कांग्रेस नेत्री स्वीटी रंगा ने किसान मजदूर एकता जिंदाबाद के बाद, कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद का नारा लगाना चाहा तो किसानों ने इसका विरोध किया। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष करम सिंह मथना ने मंच से कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है, यहां कोई भी आ कर समर्थन तो कर सकता है, लेकिन अपनी वाली नहीं करने दी जाएगी।
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जनसंपर्क के दौरान किसान नेता किसानों को सरकार की नीतियों से होने वाले नुकसान से भी अवगत करा रहे हैं। किसानों को गांवों से भरपूर समर्थन मिलने की भी उम्मीद है। ऐसे में वह मान रहे हैं कि महारैली निर्णायक साबित हो सकती है, जिसके चलते किसानों ने इसे सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
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वर्तमान में शाहाबाद में ही सांकेतिक धरना चलाया गया है जहां वीरवार को भी सैकड़ों किसान दिन भर मौजूद और सरकार की नीतियों के विरोध में रोष भी जताया। वहीं बाकी किसान नेताओं ने महारैली को सफल बनाने का मोर्चा संभाल लिया है।
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दिल्ली आंदोलन के बाद राहें हुई थी जुदा-जुदा, अब एक
दिल्ली में चलाए जा रहे आंदोलन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा व भाकियू नेता गुरनाम चढूनी की राहें जुदा हो गई थीं। कईं बार चढूनी अकेले ही संघर्ष करते रहे, लेकिन छह जून हो शाहाबाद में हुए लाठीचार्ज व सूरजमुखी की खरीद एमएसपी पर किए जाने को लेकर चलाए आंदोलन ने फिर एक कर दिया है। एसकेएस के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी शाहाबाद पहुंचकर यह स्पष्ट संकेत दिया तो उन्होंने आंदोलन कर रहे किसानों में जोश भी भर दिया।
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ब्लाक कांग्रेस के पक्ष में की नारेबाजी तो नाराज हुए किसान
शाहाबाद में वीरवार को दीपेंद्र हुड्डा के आने से कुछ पहले कांग्रेस नेत्री स्वीटी रंगा ने किसान मजदूर एकता जिंदाबाद के बाद, कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद का नारा लगाना चाहा तो किसानों ने इसका विरोध किया। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष करम सिंह मथना ने मंच से कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है, यहां कोई भी आ कर समर्थन तो कर सकता है, लेकिन अपनी वाली नहीं करने दी जाएगी।