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केयू में अब बगैर ईएल के मिलेगी 2 वर्ष की चाइल्ड केयर लीव
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 01 Apr 2016 12:46 AM IST
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कुलपति केसी शर्मा
- फोटो : amar ujala
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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में काम करने वाली महिला शिक्षक और कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। यूनिवर्सिटी में अब चाइल्ड केयर लीव में महिलाओं को अपनी अर्न लीव खर्च नहीं करनी पड़ेगी। ईसी की बैठक में इस संबंध में निर्णय ले लिया गया है कि चाइल्ड केयर लीव दो वर्ष की अवधि तक होगी और इसके लिए अर्न लीव खर्च नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि परीक्षा नियंत्रक पद पर प्रमोट किए गए पंकज गुप्ता के लिए ईसी की बैठक ठीक नहीं रही। उनका प्रमोशन वापस ले लिया गया है। ईसी के बैठक में कई अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। खास बात यह है कि कुटा ने जिन तीन प्रमुख मुद्दों को उठाया था उन पर निर्णय ले लिया गया है।
प्रोफेसर केसी शर्मा के कुलपति पद संभालने के साथ ही गुरुवार को ईसी और कोर्ट की मीटिंग हुई। ईसी और कोर्ट की इस मीटिंग में 20 से ज्यादा प्रस्ताव रखे गए थे। एक मामले को छोड़कर लगभग सभी प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है।
इन प्रस्तावों पर यह हुए निर्णय
1. चाइल्ड केयर लीव में राहत
केयू के पहले नियमों के आधार पर महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव के दौरान अर्न लीव खर्च करना जरूरी था। कुटा ने इसका विरोध किया था। इधर राज्य सरकार ने भी 1 जनवरी 2016 को एक आदेश जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि दो वर्ष तक बगैर अर्न लीव खर्च किए चाइल्ड केयर लीव दी जाएगी। राज्य सरकार के इस आदेश की पालना के तहत ईसी में निर्णय लिया गया है कि अब बगैर अर्न लीव के ही महिला शिक्षक और कर्मचारी चाइल्ड केयर लीव ले सकेंगे। सूत्र ने बताया कि हालांकि यह प्रस्ताव ईसी के एजेंडा में शामिल नहीं था। इस प्रस्ताव को टेबल आइटम के तौर पर रखा गया था। जिस पर सर्वसम्मति से निर्णय हो गया है।
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2. प्रमोशन नहीं सिर्फ अतिरिक्त प्रभार
यूनिवर्सिटी एग्जिक्यूटिव कौंसिल की पिछली बैठकों में पंकज गुप्ता को ओएसडी के पद से प्रमोशन देकर परीक्षा नियंत्रक बना दिया गया था। लेकिन इस प्रमोशन को लेकर कई अधिकारियों और शिक्षकों ने नाराजगी जताई थी। गुरुवार को हुई ईसी की बैठक में राज्य सरकार का एक सर्क्युलर रखा गया, इस सर्क्युलर के आधार पर पिछला निर्णय वापस ले लिया गया। यानी पंकज गुप्ता के परीक्षा नियंत्रक पद पर किए गए प्रमोशन को वापस ले लिया गया। सूत्रों का कहना है कि बैठक में कई सदस्यों ने इस प्रमोशन को नियम के विरूद्ध बताया। इसके बाद यह तय किया गया कि परीक्षा नियंत्रक के पद पर अलग से स्थायी नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए बकायदा विज्ञापन जारी किया जाएगा। तब तक के लिए पंकज गुप्ता को ही परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
3. सुधरेगा परीक्षा प्रणाली का ढांचा
बैठक में परीक्षा परिणाम देरी से आने, रिजल्ट ऑनलाइन होने में दिक्कतों सहित परीक्षा से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी प्रस्ताव रखा गया था। नवनियुक्त कुलपति ने परीक्षा संबंधित समस्याओं को गंभीर माना और बैठक में निर्णय लिया गया है इन समस्याओं को दूर करने और परीक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा प्रणाली में सुधार लाए जाएंगे।
4. तीन शिक्षक बने प्रोफेसर
ईसी में यूनिवर्सिटी के तीन अलग-अलग विभागों के एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रमोट करने का मामला भी रखा गया था। इन तीनों के प्रमोशन को ईसी की मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ ही भूगोल विभाग के डॉ. ओमवीर, कॉमर्स के डॉ. सुभाष चंद्र और संस्कृत एवं पाली भाषा विभाग की डॉ. विभा अग्रवाल प्रोफेसर हो गई हैं।
5. डॉ. आरकेसिंह का मामला टला
सूत्र ने बताया कि बैठक में फाइन आर्ट के एक शिक्षक आरके सिंह का मामला भी उठा था, लेकिन इसे अगली बैठक के लिए टाल दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक डॉ. सिंह पर वुमेन हरेसमेंट के आरोप लगे थे। इसके बाद उन्हें कंप्लसरी रिटायरमेंट दे दिया गया था। लेकिन डॉ. सिंह ने राज्यपाल से गुहार लगाई गई थी कि उनके साथ कुछ ज्यादा ही सख्ती बरती गई है। बताया जाता है कि राजभवन से पत्र आने के बाद इस मामले को ईसी के एजेंडे में शामिल किया गया था। लेकिन नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर केसी शर्मा ने बैठक में कहा कि वे आज ही आए हैं इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए पहले इस मामले से संबंधित जांच रिपोर्ट और अन्य सारे दस्तावेज देखना चाहते हैं। इसलिए इस मामले को अगली बैठक के लिए टाल दिया गया।
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प्रोफेसर केसी शर्मा के कुलपति पद संभालने के साथ ही गुरुवार को ईसी और कोर्ट की मीटिंग हुई। ईसी और कोर्ट की इस मीटिंग में 20 से ज्यादा प्रस्ताव रखे गए थे। एक मामले को छोड़कर लगभग सभी प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है।
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इन प्रस्तावों पर यह हुए निर्णय
1. चाइल्ड केयर लीव में राहत
केयू के पहले नियमों के आधार पर महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव के दौरान अर्न लीव खर्च करना जरूरी था। कुटा ने इसका विरोध किया था। इधर राज्य सरकार ने भी 1 जनवरी 2016 को एक आदेश जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि दो वर्ष तक बगैर अर्न लीव खर्च किए चाइल्ड केयर लीव दी जाएगी। राज्य सरकार के इस आदेश की पालना के तहत ईसी में निर्णय लिया गया है कि अब बगैर अर्न लीव के ही महिला शिक्षक और कर्मचारी चाइल्ड केयर लीव ले सकेंगे। सूत्र ने बताया कि हालांकि यह प्रस्ताव ईसी के एजेंडा में शामिल नहीं था। इस प्रस्ताव को टेबल आइटम के तौर पर रखा गया था। जिस पर सर्वसम्मति से निर्णय हो गया है।
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2. प्रमोशन नहीं सिर्फ अतिरिक्त प्रभार
यूनिवर्सिटी एग्जिक्यूटिव कौंसिल की पिछली बैठकों में पंकज गुप्ता को ओएसडी के पद से प्रमोशन देकर परीक्षा नियंत्रक बना दिया गया था। लेकिन इस प्रमोशन को लेकर कई अधिकारियों और शिक्षकों ने नाराजगी जताई थी। गुरुवार को हुई ईसी की बैठक में राज्य सरकार का एक सर्क्युलर रखा गया, इस सर्क्युलर के आधार पर पिछला निर्णय वापस ले लिया गया। यानी पंकज गुप्ता के परीक्षा नियंत्रक पद पर किए गए प्रमोशन को वापस ले लिया गया। सूत्रों का कहना है कि बैठक में कई सदस्यों ने इस प्रमोशन को नियम के विरूद्ध बताया। इसके बाद यह तय किया गया कि परीक्षा नियंत्रक के पद पर अलग से स्थायी नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए बकायदा विज्ञापन जारी किया जाएगा। तब तक के लिए पंकज गुप्ता को ही परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
3. सुधरेगा परीक्षा प्रणाली का ढांचा
बैठक में परीक्षा परिणाम देरी से आने, रिजल्ट ऑनलाइन होने में दिक्कतों सहित परीक्षा से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी प्रस्ताव रखा गया था। नवनियुक्त कुलपति ने परीक्षा संबंधित समस्याओं को गंभीर माना और बैठक में निर्णय लिया गया है इन समस्याओं को दूर करने और परीक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा प्रणाली में सुधार लाए जाएंगे।
4. तीन शिक्षक बने प्रोफेसर
ईसी में यूनिवर्सिटी के तीन अलग-अलग विभागों के एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रमोट करने का मामला भी रखा गया था। इन तीनों के प्रमोशन को ईसी की मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ ही भूगोल विभाग के डॉ. ओमवीर, कॉमर्स के डॉ. सुभाष चंद्र और संस्कृत एवं पाली भाषा विभाग की डॉ. विभा अग्रवाल प्रोफेसर हो गई हैं।
5. डॉ. आरकेसिंह का मामला टला
सूत्र ने बताया कि बैठक में फाइन आर्ट के एक शिक्षक आरके सिंह का मामला भी उठा था, लेकिन इसे अगली बैठक के लिए टाल दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक डॉ. सिंह पर वुमेन हरेसमेंट के आरोप लगे थे। इसके बाद उन्हें कंप्लसरी रिटायरमेंट दे दिया गया था। लेकिन डॉ. सिंह ने राज्यपाल से गुहार लगाई गई थी कि उनके साथ कुछ ज्यादा ही सख्ती बरती गई है। बताया जाता है कि राजभवन से पत्र आने के बाद इस मामले को ईसी के एजेंडे में शामिल किया गया था। लेकिन नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर केसी शर्मा ने बैठक में कहा कि वे आज ही आए हैं इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए पहले इस मामले से संबंधित जांच रिपोर्ट और अन्य सारे दस्तावेज देखना चाहते हैं। इसलिए इस मामले को अगली बैठक के लिए टाल दिया गया।