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अब मातृभाषा हिंदी में किए जाएंगे आयुष विश्वविद्यालय के सभी विभागीय कार्य
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श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय में अब सभी विभागीय कार्य मातृभाषा हिंदी में किए जाएंगे। ये निर्णय आयुष विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्व हिंदी दिवस पर लिया है। कुलपति प्रो. बलदेव धीमान ने कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार समेत सभी अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, शाखा प्रभारियों और अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
कुलपति प्रो. बलदेव कुमार ने कहा कि समाज की मातृभाषा से मित्रता, उसके प्रति सम्मान एवं विस्तार हम सभी का दायित्व है। इसी आकांक्षा और आवश्यकता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने ये फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के प्रयोग से राष्ट्रीय विकास के साथ दुनिया में देश का सम्मान भी बढ़ता है। एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है, बल्कि ये हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक भी है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हिंदी में कार्य करने का संकल्प लिया गया है। इसके अलावा स्वदेश निर्मित उत्पाद के उपयोग पर भी बल दिया जा रहा है। इस तरह की पहल सभी को करनी पड़ेगी। हिंदी आम आदमी की भाषा के रूप में देश की एकता का सूत्र है। आप देश के किसी भी कोने में आप चले जाएं हिंदी बोलने और समझने वाले लोग मिल ही जाएंगे। आज दुनिया के 175 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें भी बड़े पैमाने पर राजभाषा में लिखी जा रही हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी हिंदी का प्रचलन बढ़ा है। इसलिए सभी के सामूहिक प्रयास से ही हिंदी जन-जन की भाषा बनेंगी, जिससे देश के ग्रामीण तबके की भी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
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कुलपति प्रो. बलदेव कुमार ने कहा कि समाज की मातृभाषा से मित्रता, उसके प्रति सम्मान एवं विस्तार हम सभी का दायित्व है। इसी आकांक्षा और आवश्यकता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने ये फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के प्रयोग से राष्ट्रीय विकास के साथ दुनिया में देश का सम्मान भी बढ़ता है। एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है, बल्कि ये हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक भी है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हिंदी में कार्य करने का संकल्प लिया गया है। इसके अलावा स्वदेश निर्मित उत्पाद के उपयोग पर भी बल दिया जा रहा है। इस तरह की पहल सभी को करनी पड़ेगी। हिंदी आम आदमी की भाषा के रूप में देश की एकता का सूत्र है। आप देश के किसी भी कोने में आप चले जाएं हिंदी बोलने और समझने वाले लोग मिल ही जाएंगे। आज दुनिया के 175 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें भी बड़े पैमाने पर राजभाषा में लिखी जा रही हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी हिंदी का प्रचलन बढ़ा है। इसलिए सभी के सामूहिक प्रयास से ही हिंदी जन-जन की भाषा बनेंगी, जिससे देश के ग्रामीण तबके की भी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
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