{"_id":"57ae14164f1c1b2e72ee4388","slug":"not-awarded-snoop-how-stop-infant-check-up","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुप्तचरों को नहीं मिल रहा इनाम, कैसे रुकेगी भ्रूण जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुप्तचरों को नहीं मिल रहा इनाम, कैसे रुकेगी भ्रूण जांच
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:55 PM IST
विज्ञापन
ultrasound
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र से लेकर राज्य सरकार भ्रूण लिंग जांच रोकने के लिए बड़े-बड़े दावों के साथ लगातार प्रयासरत हैं, इस अभियान में कारगर साबित हो रहे गुप्तचरों को उनका इनाम नहीं दिया जा रहा है। इससे इस अभियान को धक्का लग सकता है।
इनामी राशि न मिल पाने के चलते विभाग की यह अनदेखी सरकार की भ्रूण हत्या और बेटी बचाओ अभियान भी खटाई में पड़ सकता है। हालात ये हैं कि भ्रूण लिंग जांच गिरोह की जानकारी देने वाले सूत्र इनाम पाने के लिए सिविल अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं। जिन्हें केवल आश्वासन के अलावा और कुछ भी मिल पा रहा है। ये तीनों सूत्र पिहोवा, शाहाबाद व कुरुक्षेत्र सेक्टर-7 से हैं। इन्हें इनामी राशि न मिलने का असर भी दिखाई पड़ने लगा है और विभाग के अधिकारी नए जांच गिरोह को पकड़ नहीं पा रहे हैं।
अब विभाग नए गुप्तचर के साथ गठबंधन तो कर ही रहा है लेकिन पुराने को भी छोड़ना नहीं चाहता है। नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि वे हमेशा अपनी जान को जोखिम में डालकर स्वास्थ्य विभाग को भ्रूण लिंग जांच के गिरोह तक पहुंचाते हैं। इसके बाद विभाग कार्रवाई करने के बाद एक लाख की राशि गुप्तचर को प्रदान की जाती है। यहां यह भी जानना जरूरी है कि यह सारी प्रक्रिया गुप्त रूप से की जाती है। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के मामला इंचार्ज व अधिकारी को ही होती है। वहीं विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गुप्तचर के इस मामले की पूरी जानकारी एडवाइजरी कमेटी के सामने रख चुके हैं। इसके बाद से केस पकड़े जाने के करीब डेढ़ माह बाद तक किसी भी सूत्र के पैसे नहीं मिले हैं। वैसे तो यह कार्य को गुप्त तरीके से किया जाता है, लेकिन अधिकतर केस में दो सप्ताह के अंदर ही पैसे मुहैया हो जाते हैं। बताया कि अभी पुन: एडवाइजरी कमेटी के सामने मामला रखा जाएगा, उसके बाद जो कमेटी फैसला करेंगी वो देखना होगा।
विज्ञापन
---------
फाइल बनाकर हेड ऑफिस भेजी : नैन
जिला सिविल सर्जन डॉ. एसके नैन का कहना है कि मामला संज्ञान में है। उनकी फाइल बनाकर हेड ऑफिस भेज दी है। फाइल पेंडिंग है। जल्द ही भुगतान हो जाएगा। 4 माह में अधिकारियों ने भ्रूण लिंग जांच के 14 मामले पकड़े हैं। इन पर एफआईआर दर्ज कर कोर्ट में केस चल रहा है।
विज्ञापन
इनामी राशि न मिल पाने के चलते विभाग की यह अनदेखी सरकार की भ्रूण हत्या और बेटी बचाओ अभियान भी खटाई में पड़ सकता है। हालात ये हैं कि भ्रूण लिंग जांच गिरोह की जानकारी देने वाले सूत्र इनाम पाने के लिए सिविल अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं। जिन्हें केवल आश्वासन के अलावा और कुछ भी मिल पा रहा है। ये तीनों सूत्र पिहोवा, शाहाबाद व कुरुक्षेत्र सेक्टर-7 से हैं। इन्हें इनामी राशि न मिलने का असर भी दिखाई पड़ने लगा है और विभाग के अधिकारी नए जांच गिरोह को पकड़ नहीं पा रहे हैं।
विज्ञापन
अब विभाग नए गुप्तचर के साथ गठबंधन तो कर ही रहा है लेकिन पुराने को भी छोड़ना नहीं चाहता है। नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि वे हमेशा अपनी जान को जोखिम में डालकर स्वास्थ्य विभाग को भ्रूण लिंग जांच के गिरोह तक पहुंचाते हैं। इसके बाद विभाग कार्रवाई करने के बाद एक लाख की राशि गुप्तचर को प्रदान की जाती है। यहां यह भी जानना जरूरी है कि यह सारी प्रक्रिया गुप्त रूप से की जाती है। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के मामला इंचार्ज व अधिकारी को ही होती है। वहीं विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गुप्तचर के इस मामले की पूरी जानकारी एडवाइजरी कमेटी के सामने रख चुके हैं। इसके बाद से केस पकड़े जाने के करीब डेढ़ माह बाद तक किसी भी सूत्र के पैसे नहीं मिले हैं। वैसे तो यह कार्य को गुप्त तरीके से किया जाता है, लेकिन अधिकतर केस में दो सप्ताह के अंदर ही पैसे मुहैया हो जाते हैं। बताया कि अभी पुन: एडवाइजरी कमेटी के सामने मामला रखा जाएगा, उसके बाद जो कमेटी फैसला करेंगी वो देखना होगा।
विज्ञापन
---------
फाइल बनाकर हेड ऑफिस भेजी : नैन
जिला सिविल सर्जन डॉ. एसके नैन का कहना है कि मामला संज्ञान में है। उनकी फाइल बनाकर हेड ऑफिस भेज दी है। फाइल पेंडिंग है। जल्द ही भुगतान हो जाएगा। 4 माह में अधिकारियों ने भ्रूण लिंग जांच के 14 मामले पकड़े हैं। इन पर एफआईआर दर्ज कर कोर्ट में केस चल रहा है।