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Kurukshetra News: बाढ़ से फसल बची न चारा, अब कैसे होगा गुजारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jul 2023 01:33 AM IST
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No fodder left due to flood, now how will we survive
कुरुक्षेत्र। बस अब कुछ नहीं बचा है। सब कुछ मिट्टी में मिल चुका है। न फसल रही और न ही पशुओं के लिए चारा बचा है। परिवार के साथ-साथ पशुओं को कैसे पाला जाए, अब यही चिंता है। पहले गेहूं की तैयार फसल पर आफत आई और अब धान की रोपाई करते ही। हर सीजन में नुकसान झेलना पड़ता है। यह दर्द बाढ़ पीड़ित किसानों का है, जिनके चेहरे पर है तो बस बेबसी और लाचारी।
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बाढ़ के पानी में किसानों की फसलें ही नहीं पूरे परिवार की उम्मीदें भी डूब चुकी है। खेतों में बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर अमर उजाला की टीम ने जब सड़कों पर खड़े होकर पानी से लबालब खेतों को निहारते किसानों से चर्चा की तो आंखें नम होने लगी। किसानों का कहना था कि हर सीजन में मार पड़ने लगी है। कभी फसल बिजाई व रोपाई करते ही तो कभी दिन-रात कड़ी मेहनत के बाद फसल तैयार होने पर। यहां तक कि अनाज मंडियों में फसल पहुंचती है तो वहां भी अक्सर मार पड़ती है।
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कभी कोई खरीदार ही नहीं होता तो कभी बारिश आदि से अनाज ही नालियों में बह जाता है। किसान के पास कुछ नहीं बचता, लेकिन अगली बार की फसल होने की उम्मीद लेकर फिर से मेहनत करने लग जाता है। आज तक किसान को मार से बचाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं। किसान सिर्फ बेबसी और लाचारी में ही जीवन बिता देता है।
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अब कुछ नहीं बचा : दयाल सिंह
दबखेड़ी गांव के किसान दयाल सिंह का कहना था कि उन्होंने 12 एकड़ खेत में धान की रोपाई की थी। प्रति एकड़ 15 हजार रुपये खर्च भी किया था। ऐसे में कड़ी मेहनत के अलावा करीब दो लाख रुपये की लागत आई। उम्मीद थी कि फसल तैयार होगी तो किया जा रहा खर्च भी पूरा होगा तो घर भी चलेगा, लेकिन सब कुछ तबाह कर दिया।


अब खेत खाली ही रहेंगे : शेर सिंह
किसान शेर सिंह का कहना था कि इस समय बाढ़ आई है जब अधिकतर धान की रोपाई हाल ही में की गई थी। पौधे जड़ें भी नहीं पकड़ पाए थे। यह पानी के साथ बह गई होगी। वहीं दूसरी फसल भी गल चुकी होगी। अभी कई फीट तक पानी खड़ा होने के चलते अपनी फसल व खेत को देख भी नहीं पा रहे हैं। अब दोबारा रोपाई के लिए समय पर पौध भी तैयार नहीं कर सकते। खेत खाली ही रहेंगे। पशु भी क्या खाएंगे यह भी बड़ी चिंता है।



हरा तो दूर, सूखा चारा भी नहीं बचा
बाबैन। खेतों में जिस कदर जलभराव हुआ, उससे हरा तो दूर सूखा चारा भी नहीं बचा है। किसान मंजीत सिंह, मेजर सिंह, कुलदीप सिंह, सोमनाथ, जयपाल सिंह आदि का कहना है कई जगह पर खेतों से पानी कम हो चुका है लेकिन खेतों में लगी धान की फसल पूरी तरह तबाह हो चुकी है। पशुओं का चारा भी बिल्लकुल खत्म हो चुका है, जिससे पशु भूखे मरने की कगार पर पहुंच गए हैं।



टयूबवेल तक नहीं बचे, नुकसान का अंदाजा भी नहीं
रामेश्वर सिंह, बलबीर सिंह, सूबे सिंह आदि का कहना है कि बाढ़ के चलते फसलें तो खत्म हो चुकी है जबकि टयूबवेल तक ठप हो गए हैं। कई किसानों के ट्यूबवेल ही बैठ गए तो खेतों में बनाए कोठे भी गिर गए हैं। किसानों को कितना नुकसान हुआ होगा, कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। सरकार प्रति एकड़ 50 हजार रुपये भी मुआवजा दे तो कुछ भरपाई हो सकती है।
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