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Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र में बनेगी नई जेल, 60 एकड़ जमीन की तलाश
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कुरुक्षेत्र। जिले में करीब 60 एकड़ एरिया में नई जेल बनाई जाएगी, जिसके लिए विभाग ने अनुमति दे दी है। वहीं, प्रशासनिक तौर पर जमीन की तलाश भी शुरू कर दी गई है। नई जेल में 1500 से ज्यादा बंदी व कैदी रखे जा सकेंगे, जिसके बाद दूसरे जिलों की जेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह जेल शहर के आसपास ही बनाई जानी तय है।
कुरुक्षेत्र पहले करनाल जिले का ही हिस्सा रहा है, यहां पर उसी दौरान सब जेल बनाई गई थी। हालांकि 23 जनवरी 1973 को जिला बना तो जनसंख्या के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी बढ़ीं, लेकिन जेल का आज तक विस्तार नहीं हो पाया। यही कारण रहा कि 446 की क्षमता वाली आठ एकड़ दो कनाल एरिया में बनी इस जेल में वर्तमान में भी 750 से ज्यादा बंदी व कैदी रखे हैं, जबकि कई वर्षों तक यमुनानगर, करनाल व अंबाला की जेल पर निर्भर रहना पड़ा तो इससे न केवल कैदियों को अदालत में लाने-ले जाने के चलते सुरक्षा की दिक्कत रहने लगी वहीं, विभाग पर आर्थिक बोझ भी पड़ने लगा। ऐसे में यहां क्षमता से ज्यादा कैदी रखे जाने लगे तो नई जेल की जरूरत महसूस होने लगी। ऐसे में स्थानीय जेल प्रशासन की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को विभाग ने अनुमति दे दी है, जिसके चलते जेल प्रशासन की ओर से जिला उपायुक्त को भी पत्र लिखकर करीब 10 एकड़ जमीन की तलाश किए जाने की मांग की है।
तीन नए ब्लॉक बनाए जाएंगे
नई जेल बनने से पहले तक वर्तमान में बंदियों व कैदियों को रखने में ज्यादा परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए जेल परिसर में ही तीन नए ब्लॉक बनाए जाने को विभाग ने मंजूर कर लिए हैं। ये ब्लॉक पुलिस हाउसिंग कारर्पोरेशन की ओर से बनाए जाएंगे। ये ब्लॉक बनने से जेल में करीब 850 तक बंदी व कैदी रखे जाने की क्षमता बढ़ पाएगी। वहीं, जेल बनने के बाद पहली बार इसका कायाकल्प भी किया गया है। रंग-रोगन से लेकर हर प्रकार की मरम्मत की गई है।
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750 से ज्यादा बंदी और कैदी
जिला जेल में वर्तमान में 750 से ज्यादा बंदी व कैदी रखे गए हैं, जिनमें 45 महिलाएं भी शामिल हैं। महिलाओं के साथ तीन बच्चे भी हैं। जेल पर नए बंदी व कैदी रखे जाने को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में करीब 1500 तक बंदी व कैदी रखे जाने की क्षमता वाली जेल की जरूरत है।
जमीन की तलाश जारी : सोमनाथ
जेल अधीक्षक सोमनाथ जगत का कहना है कि नई जेल बनाने के प्रपोजल को विभाग ने मंजूर कर लिया है, जिसके बाद जिला उपायुक्त को भी पत्र लिखा गया है। नई जेल के लिए 50 से 60 एकड़ जमीन की जरूरत होगी, जिसकी तलाश की जा रही है। शहर से करीब आठ किलोमीटर एरिया में ही यह जमीन तलाश किए जाने के प्रयास हैं।
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कुरुक्षेत्र पहले करनाल जिले का ही हिस्सा रहा है, यहां पर उसी दौरान सब जेल बनाई गई थी। हालांकि 23 जनवरी 1973 को जिला बना तो जनसंख्या के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी बढ़ीं, लेकिन जेल का आज तक विस्तार नहीं हो पाया। यही कारण रहा कि 446 की क्षमता वाली आठ एकड़ दो कनाल एरिया में बनी इस जेल में वर्तमान में भी 750 से ज्यादा बंदी व कैदी रखे हैं, जबकि कई वर्षों तक यमुनानगर, करनाल व अंबाला की जेल पर निर्भर रहना पड़ा तो इससे न केवल कैदियों को अदालत में लाने-ले जाने के चलते सुरक्षा की दिक्कत रहने लगी वहीं, विभाग पर आर्थिक बोझ भी पड़ने लगा। ऐसे में यहां क्षमता से ज्यादा कैदी रखे जाने लगे तो नई जेल की जरूरत महसूस होने लगी। ऐसे में स्थानीय जेल प्रशासन की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव को विभाग ने अनुमति दे दी है, जिसके चलते जेल प्रशासन की ओर से जिला उपायुक्त को भी पत्र लिखकर करीब 10 एकड़ जमीन की तलाश किए जाने की मांग की है।
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तीन नए ब्लॉक बनाए जाएंगे
नई जेल बनने से पहले तक वर्तमान में बंदियों व कैदियों को रखने में ज्यादा परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए जेल परिसर में ही तीन नए ब्लॉक बनाए जाने को विभाग ने मंजूर कर लिए हैं। ये ब्लॉक पुलिस हाउसिंग कारर्पोरेशन की ओर से बनाए जाएंगे। ये ब्लॉक बनने से जेल में करीब 850 तक बंदी व कैदी रखे जाने की क्षमता बढ़ पाएगी। वहीं, जेल बनने के बाद पहली बार इसका कायाकल्प भी किया गया है। रंग-रोगन से लेकर हर प्रकार की मरम्मत की गई है।
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750 से ज्यादा बंदी और कैदी
जिला जेल में वर्तमान में 750 से ज्यादा बंदी व कैदी रखे गए हैं, जिनमें 45 महिलाएं भी शामिल हैं। महिलाओं के साथ तीन बच्चे भी हैं। जेल पर नए बंदी व कैदी रखे जाने को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में करीब 1500 तक बंदी व कैदी रखे जाने की क्षमता वाली जेल की जरूरत है।
जमीन की तलाश जारी : सोमनाथ
जेल अधीक्षक सोमनाथ जगत का कहना है कि नई जेल बनाने के प्रपोजल को विभाग ने मंजूर कर लिया है, जिसके बाद जिला उपायुक्त को भी पत्र लिखा गया है। नई जेल के लिए 50 से 60 एकड़ जमीन की जरूरत होगी, जिसकी तलाश की जा रही है। शहर से करीब आठ किलोमीटर एरिया में ही यह जमीन तलाश किए जाने के प्रयास हैं।