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वट वृक्ष बचाने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

Tue, 25 Aug 2015 12:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र Updated Tue, 25 Aug 2015 12:50 AM IST
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ज्योतिसर की पावन धरा पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता के उपदेश देकर इस तीर्थ स्थली का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में लिख दिया।
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इतिहास के इन लम्हों को तरोताजा करने का काम प्राचीन वट वृक्ष कर रहा है। इसी वट वृक्ष को बचाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार प्रयास कर रही है। इन प्रयासों पर केडीबी खरा उतर रहा है या नहीं इसे देखने के लिए (इंडियन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट) आईएफआरआई के अधिकारियों ने ज्योतिसर पर वट वृक्ष को लेकर चल रहे कार्य का निरीक्षण किया।

दो सदस्यीय टीम के सदस्यों ने केडीबी के अधिकारियों को कुछ दिशा-निर्देश भी दिए है। आईएफआरआई के वैज्ञानिक डॉ. रावत व डॉ. हर्ष ने सोमवार को देर शाम गांव ज्योतिसर में तीर्थ में वट वृक्ष पर पत्थर हटाने व जाल उतारने के कार्य का जायजा लिया।
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यहां पर तकनीकी रुप से प्रत्येक पहलू को देखने के बाद टीम के सदस्यों ने चल रहे कार्य पर संतोष जताया और साथ ही दिशा निर्देश दिए हैं कि विभागीय आदेशानुसार ही इस कार्य को तकनीकी रुप से पूरा करवाया जाए।
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कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य को पूरा करने का मैप पहले ही दिया जा चुका है।

यह दिए निर्देश
उन्होंने केडीबी के अधिकारियों को इसी तीर्थ पर छह अन्य पेड़ों से जाल उतरवाने और पेड़ों के तनों के आसपास से पत्थर हटाने के आदेश दिए।

उन्होंने कहा कि इन पेड़ों पर तकनीकी रुप से काम करने की योजना देहरादून से भेजवा दी जाएगी। इस तीर्थ के पेड़ों को बचा कर इतिहास को बचाने का काम करना है।

इन पेड़ों से देश-विदेश के लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। इस संबंध में केडीबी की सीईओ डॉ. पूजा भारती ने बताया कि टीम के सदस्यों ने जो सुझाव दिए हैं उनके अनुसार कार्य किया जाएगा।


दो लाख का बजट किया खर्च
डॉ. पूजा भारती ने बताया कि वैज्ञानिकों ने तीर्थ के कुछ अन्य पेड़ों का संरक्षण करने के लिए कहा है। विभाग वैज्ञानिकों के आदेशानुसार कार्य करेगा और पेड़ों को बचाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा अब तक करीब दो लाख रुपये का बजट वट वृक्ष को बचाने पर खर्च कर दिया है।
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