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नवरात्र : इस बार डोली में सवार होकर आएगी मां
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कुरुक्षेत्र। सनातन धर्म में नवरात्रि को बेहद अहम माना गया है। नवरात्रि उत्सव इस बार तीन अक्तूबर से शुरू होगा, जो कि 11 अक्तूबर तक चलेगा। इस दौरान मां के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से जहां मनोकामनाएं पूरी होती हैं तो वहीं घर में सुख शांति का भी वास होता है। नवरात्र उत्सव मां दुर्गा को समर्पित होता है। शास्त्रों के मुताबिक नवरात्र शुरू होते ही मां हर बार अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर निवास करती है। इस बार मां डोली में सवार होकर नवरात्र उत्सव में पहुंचेंगी और अपने भक्तों पर कृपा करेंगी। नवरात्र उत्सव को लेकर मां के भक्तों में भी उत्साह बना हुआ है।
तीन अक्तूबर को स्थापित होगा कलश
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रेम कुमार ने बताया कि सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व होता है। मां के नवरात्र साल में चार बार आते हैं, जिनमें दो बार गुप्त नवरात्र होते हैं। जबकि एक चैत्र व एक शारदीय नवरात्र होता है। पंचांग के अनुसार इस बार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि तीन अक्तूबर को सुबह 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन चार अक्तूबर को सुबह दो बजकर 58 मिनट पर होगा। इसलिए तीन अक्तूबर को ही कलश की स्थापना की जाएगाी। अक्तूबर 11 अक्तूबर को समाप्त होंगे और 12 अक्तूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
शारदीय नवरात्र महत्व
पंचांग के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना पूरे नौ दिनों तक विधि-विधान के साथ की जाती है। इन नौ दिनों में मां के नौ स्वरूपों की पूजा करने से मां के भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्र में मां के व्रत रखने व पूजा करने का विशेष लाभ मां के भक्तों को मिलता है। इस दौरान मां के नौ स्वरूपों की अलग-अलग महिमा होती है। इसलिए हर रोज श्रद्धालु मां के अलग स्वरूप की आराधना करते हैं।
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नवरात्र तिथि में मां के इन स्वरूपों की होगी पूजा
पहला दिन-- -- - मां शैलपुत्री-- -- -तीन अक्तूबर
दूसरा दिन-- -- - मां ब्रह्मचारिणी-- -चार अक्तूबर
तीसरा दिन-- -- -मां चंद्रघंटा-- -- पांच अक्तूबर
चौथा दिन-- -- -- मां कुष्मांडा-- -- छह अक्तूबर
पांचवां दिन-- -- मां स्कंदमाता-- -- सात अक्तूबर
छठा दिन-- -- -- मां कात्यायनी-- -- आठ अक्तूबर
सातवां दिन-- -- मां कालरात्रि-- -- -- नौ अक्तूबर
आठवां दिन-- - मां सिद्धिदात्री-- -- 10 अक्तूबर
नौवां दिन-- -- - मां महागौरी-- -- -- 11 अक्तूबर
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तीन अक्तूबर को स्थापित होगा कलश
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रेम कुमार ने बताया कि सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व होता है। मां के नवरात्र साल में चार बार आते हैं, जिनमें दो बार गुप्त नवरात्र होते हैं। जबकि एक चैत्र व एक शारदीय नवरात्र होता है। पंचांग के अनुसार इस बार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि तीन अक्तूबर को सुबह 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन चार अक्तूबर को सुबह दो बजकर 58 मिनट पर होगा। इसलिए तीन अक्तूबर को ही कलश की स्थापना की जाएगाी। अक्तूबर 11 अक्तूबर को समाप्त होंगे और 12 अक्तूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
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शारदीय नवरात्र महत्व
पंचांग के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना पूरे नौ दिनों तक विधि-विधान के साथ की जाती है। इन नौ दिनों में मां के नौ स्वरूपों की पूजा करने से मां के भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्र में मां के व्रत रखने व पूजा करने का विशेष लाभ मां के भक्तों को मिलता है। इस दौरान मां के नौ स्वरूपों की अलग-अलग महिमा होती है। इसलिए हर रोज श्रद्धालु मां के अलग स्वरूप की आराधना करते हैं।
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नवरात्र तिथि में मां के इन स्वरूपों की होगी पूजा
पहला दिन
दूसरा दिन
तीसरा दिन
चौथा दिन
पांचवां दिन
छठा दिन
सातवां दिन
आठवां दिन
नौवां दिन