{"_id":"673ba7bfc21f00e5900bd6e8","slug":"naturopathy-system-is-a-creative-method-of-treatment-dr-sudesh-kurukshetra-news-c-45-1-kur1002-127102-2024-11-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली चिकित्सा की एक रचनात्मक विधि : डॉ सुदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली चिकित्सा की एक रचनात्मक विधि : डॉ सुदेश
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। आयुष विभाग की ओर से नेचुरोपैथी दिवस के अवसर पर आयुष ग्राम कलाल माजरा में निःशुल्क चिकित्सा शिविर एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ सुदेश जाटियान की ओर से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
उन्होंने बताया कि इस शिविर का उद्धेश्य लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के लाभ के बारे मे जागरुक करना एवं उन्हें इस दिशा में पचार की सुविधाएं प्रदान करना है। प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली चिकित्सा की एक रचनात्मक विधि है तथा प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास उतना ही पुराना है जितना प्रकृति का।
इस मौके पर उन्होंने नैचुरोपैथी चिकित्सा के महत्व परजोर दिया और बताया कि यह चिकित्सा पद्धति शरीर को प्राकृतिक रुप से स्वस्थ रखने का एक प्रभावी तरीका है। उन्होंने यह भी बताया कि नेचुरोपैथी मे बिना दवाओं के प्राकृतिक तरीकों जैसें मिट्टी चिकित्सा, नेति पोट, विभिन्न रोगों मे प्रयोग होने वाले र्हब्स,दवाईयों में इस्तेमाल होने वाले खादय् पदार्थ, गर्म ठण्डी सेक, रबड़ नेति, दंड धौती,पट्टी चिकित्सा, दवाईयां, सूर्य चिकित्सा, एनीमा पाॅट, फेस स्टीमर, आहार परिर्वतन, योग और शारीरिक व्यायाम से रोगों का इलाज किया जाता है। उधर ब्रह्मसरोवर तट पर मेडिटेशन हॉल में भी शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्रियाएं करते हुए स्वस्थ जीवन के गुर सिखाए गए।अ
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि इस शिविर का उद्धेश्य लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के लाभ के बारे मे जागरुक करना एवं उन्हें इस दिशा में पचार की सुविधाएं प्रदान करना है। प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली चिकित्सा की एक रचनात्मक विधि है तथा प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास उतना ही पुराना है जितना प्रकृति का।
विज्ञापन
इस मौके पर उन्होंने नैचुरोपैथी चिकित्सा के महत्व परजोर दिया और बताया कि यह चिकित्सा पद्धति शरीर को प्राकृतिक रुप से स्वस्थ रखने का एक प्रभावी तरीका है। उन्होंने यह भी बताया कि नेचुरोपैथी मे बिना दवाओं के प्राकृतिक तरीकों जैसें मिट्टी चिकित्सा, नेति पोट, विभिन्न रोगों मे प्रयोग होने वाले र्हब्स,दवाईयों में इस्तेमाल होने वाले खादय् पदार्थ, गर्म ठण्डी सेक, रबड़ नेति, दंड धौती,पट्टी चिकित्सा, दवाईयां, सूर्य चिकित्सा, एनीमा पाॅट, फेस स्टीमर, आहार परिर्वतन, योग और शारीरिक व्यायाम से रोगों का इलाज किया जाता है। उधर ब्रह्मसरोवर तट पर मेडिटेशन हॉल में भी शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्रियाएं करते हुए स्वस्थ जीवन के गुर सिखाए गए।अ
विज्ञापन