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Kurukshetra News: नकटा और अवध की होली लोकनृत्य ने महोत्सव में बटोरी वाहवाही
Mon, 17 Nov 2025 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 17 Nov 2025 12:32 AM IST
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08... कुरूक्षेत्र गीता जयंती के अवसर पर सुंदर लाइटों से ब्रह्म सराेवर पर सजा मंदिर और बीन पर ना
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में लोकसंस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिल रही है। लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से आई निधि श्रीवास्तव के नेतृत्व में 13 कलाकारों की टीम ने नकटा और अवध की होली लोकनृत्य प्रस्तुत किया जिसने दर्शकों के दिल को जीत लिया।
कलाकार निधि श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रस्तुत नकटा लोकनृत्य ने महिला जीवन के अनकहे पहलुओं को बड़े सहज अंदाज में सामने रखा। पुराने समय में जब पुरुष बारात में चले जाते थे, तो घर में रहने वाली महिलाएं आपसी बातचीत में सुख-दुख, तंज-मजाक, घरेलू रिश्तों और मन की कुंठा को खुलकर साझा करती थीं। यही भावनाएं इस लोकनृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की गई, जिसे देख दर्शक रोमांचित हो उठे। कलाकारों ने इन रोजमर्रा की चर्चाओं को इतनी जीवंतता से पेश किया कि दर्शकों को लगा जैसे वे उसी समय-समाज का हिस्सा बन गए हों।
कलाकार निधि श्रीवास्तव ने बताया कि वे विभिन्न गांवों और शहरों से लोकनृत्य की परंपराओं को संजोकर यहां लेकर आई हैं, ताकि नई पीढ़ी तक यह सांस्कृतिक विरासत पहुंचे। हमारा उद्देश्य पर्यटकों का मनोरंजन करने के साथ संस्कृति से भी रूबरू करवाना है। उनकी टीम 18 नवंबर तक मानरा नृत्य व अवध की होली की विविध प्रस्तुतियां देगी। हर प्रस्तुति के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। महोत्सव में आए पर्यटकों ने कहा कि नकटा नृत्य की भोली-मीठी अदाएं, संवादों की जीवंतता और महिलाओं की भावनाओं का सहज प्रवाह इस कार्यक्रम को सबसे अलग बनाता है।
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अवध की होली : रंग, रस और राग का अनुपम संगम
अवध की होली की प्रस्तुति ने महोत्सव के रंगों में चार चांद लगा दिए। लखनऊ से आए कलाकारों ने पारंपरिक लोकधुनों, राम-भक्ति से भरपूर गीतों और देहाती अंदाज की होली को इस तरह पेश किया कि समूचा पंडाल थिरक उठा। ढोलक, मंजीरा और लोकगीतों की ताल पर दर्शक मंत्रमुग्ध रहे। रंगों, रसों और नटखट अदाओं से भरी प्रस्तुति ने दर्शकों को अवध की संस्कृति की असली खुशबू से रूबरू कराया। कलाकारों की वेशभूषा, अभिव्यक्ति की स्पष्टता और लय की सटीकता ने माहौल को उत्सवमयी बना दिया।
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कलाकार निधि श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रस्तुत नकटा लोकनृत्य ने महिला जीवन के अनकहे पहलुओं को बड़े सहज अंदाज में सामने रखा। पुराने समय में जब पुरुष बारात में चले जाते थे, तो घर में रहने वाली महिलाएं आपसी बातचीत में सुख-दुख, तंज-मजाक, घरेलू रिश्तों और मन की कुंठा को खुलकर साझा करती थीं। यही भावनाएं इस लोकनृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की गई, जिसे देख दर्शक रोमांचित हो उठे। कलाकारों ने इन रोजमर्रा की चर्चाओं को इतनी जीवंतता से पेश किया कि दर्शकों को लगा जैसे वे उसी समय-समाज का हिस्सा बन गए हों।
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कलाकार निधि श्रीवास्तव ने बताया कि वे विभिन्न गांवों और शहरों से लोकनृत्य की परंपराओं को संजोकर यहां लेकर आई हैं, ताकि नई पीढ़ी तक यह सांस्कृतिक विरासत पहुंचे। हमारा उद्देश्य पर्यटकों का मनोरंजन करने के साथ संस्कृति से भी रूबरू करवाना है। उनकी टीम 18 नवंबर तक मानरा नृत्य व अवध की होली की विविध प्रस्तुतियां देगी। हर प्रस्तुति के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। महोत्सव में आए पर्यटकों ने कहा कि नकटा नृत्य की भोली-मीठी अदाएं, संवादों की जीवंतता और महिलाओं की भावनाओं का सहज प्रवाह इस कार्यक्रम को सबसे अलग बनाता है।
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अवध की होली : रंग, रस और राग का अनुपम संगम
अवध की होली की प्रस्तुति ने महोत्सव के रंगों में चार चांद लगा दिए। लखनऊ से आए कलाकारों ने पारंपरिक लोकधुनों, राम-भक्ति से भरपूर गीतों और देहाती अंदाज की होली को इस तरह पेश किया कि समूचा पंडाल थिरक उठा। ढोलक, मंजीरा और लोकगीतों की ताल पर दर्शक मंत्रमुग्ध रहे। रंगों, रसों और नटखट अदाओं से भरी प्रस्तुति ने दर्शकों को अवध की संस्कृति की असली खुशबू से रूबरू कराया। कलाकारों की वेशभूषा, अभिव्यक्ति की स्पष्टता और लय की सटीकता ने माहौल को उत्सवमयी बना दिया।

08... कुरूक्षेत्र गीता जयंती के अवसर पर सुंदर लाइटों से ब्रह्म सराेवर पर सजा मंदिर और बीन पर ना

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