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Kurukshetra News: केयू तथा मिडलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के बीच हुआ समझौता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Apr 2023 02:48 AM IST
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MoU signed between KU and Middlebury Institute of International Studies
कुरुक्षेत्र। केयू व मिडलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज मॉन्टेरी, कैलिफोर्निया, अमेरिका के बीच समझौता हुआ है, जिस पर कमेटी रूम में केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा की अध्यक्षता में हस्ताक्षर किए गए।
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प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि दोनों संस्थानों को शैक्षणिक और शैक्षिक सहयोग विकसित करने, अनुसंधान साझा करने, प्रोफेशनल इंटर्नशिप और तकनीकी सहयोग और स्थायी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए यह समझौता किया गया है। इस समझौते से विद्यार्थियों को रोजगार के उच्च अवसर प्राप्त होंगे और केयू के छात्रों को वैश्विक स्तर पर मंच मिलेगा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों को प्रोत्साहन मिलेगा और विश्वविद्यालय देश के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। यह ब्लू इकोनॉमी में शिक्षण और अनुसंधान में योगदान करके और ग्लोबल कॉमन्स और सतत विकास से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने वाला एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन है। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. संजीव शर्मा और एमआईआईएस के उपाध्यक्ष जेफ डेटन-जॉनसन ने समझौते पर ऑनलाइन हस्ताक्षर किए।
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केयू के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. अनिल वशिष्ठ ने कहा कि यह समझौता हमारे छात्रों को एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा और ब्लू इकोनॉमी को सतत विकास के साथ मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान का प्रयोग करके हम नए आयाम स्थापित कर सकते हैं। केयू और एमआईआईएस के बीच समझौते की शुरुआत प्रो. वीएन अत्री, केयू के इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंडो-पैसिफिक स्टडीज के संस्थापक निदेशक, इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (आईओआरए) के पूर्व अध्यक्ष और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञ के प्रयास द्वारा हुई है। ब्लू इकोनॉमी अनुसंधान और नीति निर्माण का वह क्षेत्र है जो वर्तमान में प्रमुख वैश्विक महत्व रखता है। केयू और एमआईआईएस ब्लू इकॉनमी (महासागर) अर्थव्यवस्था की क्षमता का अध्ययन और दोहन करने के लिए मिलकर काम करेंगे, जिसकी अर्थव्यवस्था प्रति वर्ष 2.5 ट्रिलियन डॉलर है और जो 2030 तक दोगुनी होकर पांच ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को 2030 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा। इस मौके पर अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अशोक चौहान, लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. ब्रजेश साहनी, डॉ. पंकज गुप्ता सहित अन्य मौजूद रहे।
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