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मारकंडा नदी का पानी घरों में घुसा, ग्रामीण नए ठिकाने की तलाश में जुटे
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markanda riwer
- फोटो : Kurukshetra
मारकंडा नदी सोमवार को खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई। पहाड़ी इलाकों से नदी में 32 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा गया, जबकि 15 हजार क्यूसिक पानी आना खतरे की घंटी माना जाता है। खतरे से भी दोगुना नदी में आने से पानी ने लोगों को खूब परेशानी में डाला। समाचार लिखे जाने तक भी जलस्तर बढ़ रहा था और 36 हजार क्यूसिक पानी आने की संभावना जताई जा रही है।
नदी के साथ लगते गांव कठवा, तंगौर, कलसाना, डेरा बाजीगर और रावा में पानी की मार पड़ी। इन गांवों की सड़कों पर पानी बहने लगा और कालोनियों के घरों में भी पानी घुसा। पानी के कारण गांव कठवा के स्कूल एवं आंगनवाड़ी बंद करनी पड़ी। इसी तरह डेरा बाजीगर के स्कूल को भी बंद रखना पड़ा। वहीं निचले हिस्सों में रहने वाले ग्रामीणों ने चौपालों एवं अन्य ग्रामीणों के घर पर सहारा लिया और पशुओं को ऊंचे स्थान पर लाकर बांधा गया। हालांकि नदी में पानी आने की मुनियादी प्रशासन ने दो दिन पहले से ही कर रखी थी और हाई अलर्ट जारी कर रखा था। इसलिए ग्रामीण भी पूरी तरह से अलर्ट थे। हालांकि रविवार को सायं 7 बजे तक नदी में 16 हजार क्यूसिक पानी था और सोमवार को सुबह 6 बजे 19 हजार क्यूसिक और दोपहर 11 बजे 25 हजार क्यूसिक और सायं 4 बजे 32 हजार क्यूसिक पानी नदी में पहुंच गया था। नदी में पानी आने के मामले को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट था और रविवार रात को भी उपायुक्त ने प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे। इसके चलते एसडीएम राजीव प्रसाद और तहसीलदार टीआर गौतम रातभर अपनी टीमों के साथ नदी के मुहाने पर डटे रहे।
उल्लेखनीय है कि मारकंडा नदी एक बरसाती नदी है और इसमें पहाडों पर बरसात होने के बाद कालाअंब तथा बरसाती नदी नालों का पानी आता है। बाढ़ के पानी के कारण निकटवर्ती बाजीगर कालोनी सहित गांव मुगल माजरा, गुमटी, मलिकपुर, रावा, कलसाना, झरौली तथा रावा नदी के साथ लगते गांवों में खेतों में खड़ी फसलें जलमग्र हो गई। पानी आने के कारण मारकंडा नदी के साथ लगते गांवों में हड़कंप मच गया और इस पानी की मार प्रमुखत गांव अरूप नगर, गुमटी, मलिकपुर, कठवा, कलसाना, तंगौर, मुगलमाजरा, झरौली कलां आदि गांवों में हुई जहां किसानों की फसलें तबाह हो गई। बार-बार पानी आने के कारण किसानों के सामने पशु चारे की समस्या पैदा हो गई है। वहीं जो डेरे फ्लडिड क्षेत्र में बने थे, उनसे लोग पहले ही बाहर आ चुके थे। प्रशासन ने पहले ही मुनियादी कर बताया था कि नदी में पानी आ सकता है। किसी भी डेरे पर लोगों के फंसने की सूचना नहीं है।
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बीमार लोगों को हुई परेशानी
पानी के कारण बीमार लोगों को खासी परेशानी हुई। उनकी दवा के लिए शहर आने के लिए रास्ता नहीं बचा था। न एंबुलेंस पानी में जा सकती थी और और ग्रामीणों के लिए बाहर आना खतरे से खाली नहीं था। अधिकतर लोग घरों की छतों पर चढ़े रहे। हालांकि पानी कुछ घरों में घुसा है और लोगों का नुकसान भी हुआ है। नदी में पानी आने से लोगों में हड़कंप है, क्योंकि यदि पानी बढ़ता है तो इसकी मार लोगों के घरों पर होगी, जिससे जान-माल से भी कोई इंकार नहीं किया जा सकता।
गौशालाओं में घुसा पानी
बेहिसाब पानी आने से गौवंश को ऊंचे स्थान पर ले जाकर बांधना पड़ा। वहीं पशुओं का चारा भी सुरक्षित स्थान पर लाया गया। पानी के कारण गौशालाओं में पशुओं के चारे का नुकसान हुआ है। पानी आने के कारण अधिकतर लोग घरों से बाहर नहीं निकले। यहां तक कि स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी अवकाश पर रहे। अधिकतर गलियों में भी पानी घुसा है और लोग पानी को घर से बाहर निकालने की जुगत में रहे। इस सीजन में जब कुछ दिन पहले मारकंडा नदी में बाढ़ का पानी आया था, तब बेलदार सब्जियां नष्ट हो गई थी। अबकी बार आए पानी से अनेक गांवों में गन्ने के साथ धान की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन अलर्ट, स्कूल कराए बंद
एसडीएम राजीव प्रसाद ने कहा कि नदी में पानी को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी कर बाढ़ संभावित क्षेत्र के स्कूलों को बंद करा दिया है। पानी में फंसने या जान-माल की कोई भी सूचना नहीं है। प्रशासन अपनी तरफ से पूरे प्रबंध किए हुए है। लोग स्वयं भी अलर्ट रहें और बच्चों को पानी में न जाने दें।
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नदी के साथ लगते गांव कठवा, तंगौर, कलसाना, डेरा बाजीगर और रावा में पानी की मार पड़ी। इन गांवों की सड़कों पर पानी बहने लगा और कालोनियों के घरों में भी पानी घुसा। पानी के कारण गांव कठवा के स्कूल एवं आंगनवाड़ी बंद करनी पड़ी। इसी तरह डेरा बाजीगर के स्कूल को भी बंद रखना पड़ा। वहीं निचले हिस्सों में रहने वाले ग्रामीणों ने चौपालों एवं अन्य ग्रामीणों के घर पर सहारा लिया और पशुओं को ऊंचे स्थान पर लाकर बांधा गया। हालांकि नदी में पानी आने की मुनियादी प्रशासन ने दो दिन पहले से ही कर रखी थी और हाई अलर्ट जारी कर रखा था। इसलिए ग्रामीण भी पूरी तरह से अलर्ट थे। हालांकि रविवार को सायं 7 बजे तक नदी में 16 हजार क्यूसिक पानी था और सोमवार को सुबह 6 बजे 19 हजार क्यूसिक और दोपहर 11 बजे 25 हजार क्यूसिक और सायं 4 बजे 32 हजार क्यूसिक पानी नदी में पहुंच गया था। नदी में पानी आने के मामले को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट था और रविवार रात को भी उपायुक्त ने प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे। इसके चलते एसडीएम राजीव प्रसाद और तहसीलदार टीआर गौतम रातभर अपनी टीमों के साथ नदी के मुहाने पर डटे रहे।
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उल्लेखनीय है कि मारकंडा नदी एक बरसाती नदी है और इसमें पहाडों पर बरसात होने के बाद कालाअंब तथा बरसाती नदी नालों का पानी आता है। बाढ़ के पानी के कारण निकटवर्ती बाजीगर कालोनी सहित गांव मुगल माजरा, गुमटी, मलिकपुर, रावा, कलसाना, झरौली तथा रावा नदी के साथ लगते गांवों में खेतों में खड़ी फसलें जलमग्र हो गई। पानी आने के कारण मारकंडा नदी के साथ लगते गांवों में हड़कंप मच गया और इस पानी की मार प्रमुखत गांव अरूप नगर, गुमटी, मलिकपुर, कठवा, कलसाना, तंगौर, मुगलमाजरा, झरौली कलां आदि गांवों में हुई जहां किसानों की फसलें तबाह हो गई। बार-बार पानी आने के कारण किसानों के सामने पशु चारे की समस्या पैदा हो गई है। वहीं जो डेरे फ्लडिड क्षेत्र में बने थे, उनसे लोग पहले ही बाहर आ चुके थे। प्रशासन ने पहले ही मुनियादी कर बताया था कि नदी में पानी आ सकता है। किसी भी डेरे पर लोगों के फंसने की सूचना नहीं है।
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बीमार लोगों को हुई परेशानी
पानी के कारण बीमार लोगों को खासी परेशानी हुई। उनकी दवा के लिए शहर आने के लिए रास्ता नहीं बचा था। न एंबुलेंस पानी में जा सकती थी और और ग्रामीणों के लिए बाहर आना खतरे से खाली नहीं था। अधिकतर लोग घरों की छतों पर चढ़े रहे। हालांकि पानी कुछ घरों में घुसा है और लोगों का नुकसान भी हुआ है। नदी में पानी आने से लोगों में हड़कंप है, क्योंकि यदि पानी बढ़ता है तो इसकी मार लोगों के घरों पर होगी, जिससे जान-माल से भी कोई इंकार नहीं किया जा सकता।
गौशालाओं में घुसा पानी
बेहिसाब पानी आने से गौवंश को ऊंचे स्थान पर ले जाकर बांधना पड़ा। वहीं पशुओं का चारा भी सुरक्षित स्थान पर लाया गया। पानी के कारण गौशालाओं में पशुओं के चारे का नुकसान हुआ है। पानी आने के कारण अधिकतर लोग घरों से बाहर नहीं निकले। यहां तक कि स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी अवकाश पर रहे। अधिकतर गलियों में भी पानी घुसा है और लोग पानी को घर से बाहर निकालने की जुगत में रहे। इस सीजन में जब कुछ दिन पहले मारकंडा नदी में बाढ़ का पानी आया था, तब बेलदार सब्जियां नष्ट हो गई थी। अबकी बार आए पानी से अनेक गांवों में गन्ने के साथ धान की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन अलर्ट, स्कूल कराए बंद
एसडीएम राजीव प्रसाद ने कहा कि नदी में पानी को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी कर बाढ़ संभावित क्षेत्र के स्कूलों को बंद करा दिया है। पानी में फंसने या जान-माल की कोई भी सूचना नहीं है। प्रशासन अपनी तरफ से पूरे प्रबंध किए हुए है। लोग स्वयं भी अलर्ट रहें और बच्चों को पानी में न जाने दें।