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मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को, सूर्य उपासना से प्रसन्न होंगे नारायण : कौशिक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Jan 2023 08:30 AM IST
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Makar Sankranti festival on January 15, Narayan will be pleased with Surya worship: Kaushik
कुरुक्षेत्र। इस बार मकर सक्रांति का पावन पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। भारतीय पर्वों में मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिसका निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार होता है। मकर संक्रांति एक ऋतु पर्व के रूप में भी मनाई जाती है। इस दिन भगवान सूर्य नारायण उत्तरायण हो जाते हैं और देवताओं का ब्रह्म मुहूर्त प्रारंभ हो जाता है। अत: उत्तरायण काल को शास्त्रकारों ने साधनाओं एवं परा-अपरा विद्याओं की प्राप्ति हेतु सिद्ध काल बताया है।
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षड्दर्शन साधु समाज के संगठन सचिव वैद्य प. प्रमोद कौशिक के मुताबिक सूर्य उपासना के लिए इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। सूर्य को हिंदू धर्म के लोग प्रधान देवता के रूप में मानते एवं पूजते हैं। सूर्य उन्नति और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार गृहप्रवेश, देव प्रतिष्ठा, सकाम यज्ञ-यज्ञादि अनुष्ठानों के लिए उत्तरायण काल को ही प्रशस्त कहा गया है। जीवन तो जीवन मृत्यु तक के लिए भी उत्तरायण काल की विशेषता शास्त्रों में बताई गई है।
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कौशिक ने बताया कि इस बार मकर सक्रांति का पावन पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा, क्योंकि भारतीय पर्वों में मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिसका निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो यह संक्रांति कहलाती है। संक्रांति का नाम करण उस राशि से होता है जिस राशि में सूर्य प्रवेश करता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। पंचांग के अनुसार इस बार सूर्य 14 जनवरी को रात्रि में मकर राशि में प्रवेश करेगा। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार मकर संक्रांति में पूण्य काल का विशेष महत्व माना जाता है। इस पर्व का पूण्य काल 15 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा।
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इस बार मकर संक्रांति पर बन रहा है विशेष संयोग
पं. प्रमोद कौशिक ने बताया कि इस वर्ष मकर संक्रांति की शुरुआत चित्रा नक्षत्र में हो रही है जो संध्या काल तक रहेगा। चित्रा नक्षत्र को बेहद शुभ माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक इस नक्षत्र में दान धर्म के कार्य और पूजा करना बेहद फलदायी होता है। इस दिन गंगासागर में स्नान करना महत्वपूर्ण फलदायक कहा गया है।

मकर संक्रांति का महत्व
माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी भुलाकर उनके घर गए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। इस दिन से मलमास खत्म होने के साथ शुभ माह प्रारंभ हो जाता है। इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है।
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