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सबसे चर्चित हॉट सीट बनी लाडवा : यहीं से सबसे ज्यादा 27 योद्धा मैदान में, पल-पल बदल रहे समीकरण
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कुरुक्षेत्र। जिले में ही नहीं प्रदेश भर में लाडवा विधानसभा क्षेत्र सबसे हॉट सीट मानी जा रही है, जहां पल-पल में समीकरण बदल रहे हैं। इसी सीट पर जिले में सबसे ज्यादा 27 योद्धा मैदान में उतरे हैं, जिनमें भाजपा से मुख्यमंत्री नायब सैनी व भाजपा को ही छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे संदीप गर्ग भी शामिल है। वहीं चारों विधानसभाओं क्षेत्रों में सबसे कम 14 चुनावी योद्धा सामने आए हैं जबकि शाहाबाद व पिहोवा में 17-17 उम्मीदवार मैदान में आए हैं।
लाडवा सीट पर जिला ही नहीं पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई है। जहां भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री नायब सैनी को यहां प्रत्याशी बनाते ही यह हॉट सीट बन गई थी तो वहीं गत दिवस भाजपा नेता संदीप गर्ग ने बगावत करते हुए आजाद तौर पर चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोंक दी, जिससे समीकरण बदल गए थे। अभी लोग नए समीकरणों पर चर्चा ही कर रहे थे तो नामांकन के अंतिम दिन वीरवार को इनेलो-बसपा ने भी चौंका दिया। यहां दिग्गज नेता शेर सिंह बड़शामी जगह उनकी पुत्रवधु सपना बड़शामी को मैदान में उतार दिया है। यह जाट वोट बैंक के साथ-साथ महिला वोट बैंक में भी बड़ी सेंध मानी जा रही है। अब यहां फिर समीकरण बदले दिखाई देने लगे हैं। महिला वोट बैंक को साधने के लिए मुख्यमंंत्री नायब सैनी की पत्नी सुमन सैनी भी क्षेत्र में लगातार पसीना बहा रही है।
उधर कांग्रेस ने पूर्व विधायक मेवा सिंह पर ही दूसरी बार भरोसा जताया हुआ है। जहां वे अपनी जमीन को बचाने के प्रयास में हैं तो वहीं मुख्यमंत्री व भाजपा यहां कमल खिलाने के लिए प्रयासरत है। उधर इनेलो-बसपा भी अपनी पुरानी जमीन की तलाश में यहां भाजपा व कांग्रेस को टक्कर देने के लिए रणनीति के साथ मैदान में हैं। यही नहीं अन्य पार्टियों के साथ-साथ दूसरे निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी-अपनी जीत का दम भर रहे हैं। अब मतदाता यहां किसे तव्वजो देते हैं यह चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा।
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एक बार इनेलो, भाजपा व कांग्रेस को मिली जीत
लाडवा विधानसभा क्षेत्र सीट साल 2008 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर अब तक कोई भी प्रत्याशी दूसरी बार जीत हासिल नहीं कर पाया है। इस सीट पर साल 2009 में इनेलो, 2014 में भाजपा व 2019 में कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत मिल चुकी है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के चुनाव लड़ने से यह सीट सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए अहम बनी हुई हैं।
यह रहा लाडवा विधानसभा क्षेत्र का इतिहास
लाडवा विधानसभा क्षेत्र सीट पर साल 2009 में हुए चुनाव में इनेलो के शेर सिंह बड़शामी ने 32 हजार 505 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही कैलाशो सैनी को 30 हजार वोट मिले थे। शेर सिंह बड़शामी को दो हजार पांच सौ पांच वोटों से जीत मिली थी। वहीं साल 2014 में हुए चुनाव में भाजपा के पवन सैनी 42 हजार 445 वोट हासिल कर पहले स्थान पर रहे थे, जबकि इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ रही बच्चन कौर बड़शामी को 39 हजार 453 मत मिले थे, जो कि दो हजार 992 वोटों से चुनाव हार गई थी। साल 2014 में हुए विधानसभा क्षेत्र चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे मेवा सिंह ने 57 हजार सात 759 वोट हासिल किए और भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे पवन सैनी को 45 हजार 28 वोट मिले थे और वे 12 हजार 637 वोटों से चुनाव हार गए थे।
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लाडवा सीट पर जिला ही नहीं पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई है। जहां भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री नायब सैनी को यहां प्रत्याशी बनाते ही यह हॉट सीट बन गई थी तो वहीं गत दिवस भाजपा नेता संदीप गर्ग ने बगावत करते हुए आजाद तौर पर चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोंक दी, जिससे समीकरण बदल गए थे। अभी लोग नए समीकरणों पर चर्चा ही कर रहे थे तो नामांकन के अंतिम दिन वीरवार को इनेलो-बसपा ने भी चौंका दिया। यहां दिग्गज नेता शेर सिंह बड़शामी जगह उनकी पुत्रवधु सपना बड़शामी को मैदान में उतार दिया है। यह जाट वोट बैंक के साथ-साथ महिला वोट बैंक में भी बड़ी सेंध मानी जा रही है। अब यहां फिर समीकरण बदले दिखाई देने लगे हैं। महिला वोट बैंक को साधने के लिए मुख्यमंंत्री नायब सैनी की पत्नी सुमन सैनी भी क्षेत्र में लगातार पसीना बहा रही है।
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उधर कांग्रेस ने पूर्व विधायक मेवा सिंह पर ही दूसरी बार भरोसा जताया हुआ है। जहां वे अपनी जमीन को बचाने के प्रयास में हैं तो वहीं मुख्यमंत्री व भाजपा यहां कमल खिलाने के लिए प्रयासरत है। उधर इनेलो-बसपा भी अपनी पुरानी जमीन की तलाश में यहां भाजपा व कांग्रेस को टक्कर देने के लिए रणनीति के साथ मैदान में हैं। यही नहीं अन्य पार्टियों के साथ-साथ दूसरे निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी-अपनी जीत का दम भर रहे हैं। अब मतदाता यहां किसे तव्वजो देते हैं यह चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा।
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एक बार इनेलो, भाजपा व कांग्रेस को मिली जीत
लाडवा विधानसभा क्षेत्र सीट साल 2008 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर अब तक कोई भी प्रत्याशी दूसरी बार जीत हासिल नहीं कर पाया है। इस सीट पर साल 2009 में इनेलो, 2014 में भाजपा व 2019 में कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत मिल चुकी है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के चुनाव लड़ने से यह सीट सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए अहम बनी हुई हैं।
यह रहा लाडवा विधानसभा क्षेत्र का इतिहास
लाडवा विधानसभा क्षेत्र सीट पर साल 2009 में हुए चुनाव में इनेलो के शेर सिंह बड़शामी ने 32 हजार 505 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही कैलाशो सैनी को 30 हजार वोट मिले थे। शेर सिंह बड़शामी को दो हजार पांच सौ पांच वोटों से जीत मिली थी। वहीं साल 2014 में हुए चुनाव में भाजपा के पवन सैनी 42 हजार 445 वोट हासिल कर पहले स्थान पर रहे थे, जबकि इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ रही बच्चन कौर बड़शामी को 39 हजार 453 मत मिले थे, जो कि दो हजार 992 वोटों से चुनाव हार गई थी। साल 2014 में हुए विधानसभा क्षेत्र चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे मेवा सिंह ने 57 हजार सात 759 वोट हासिल किए और भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे पवन सैनी को 45 हजार 28 वोट मिले थे और वे 12 हजार 637 वोटों से चुनाव हार गए थे।