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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की विंग को मिली मंजूरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 01:27 AM IST
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Kurukshetra Development Board's wing got approval
करीब 48 कोस में फैले तीर्थों के संरक्षण और नए प्रोजेक्ट लाकर धर्मनगरी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर चकमाने के लिए गठित कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) की विंग को मंजूरी मिल गई है। इस विंग में छह नए कर्मचारी जोड़े हैं, जिसमें एक एक्सईएन, एक एसडीओ, दो जेई और एक ड्राफ्ट मैन शामिल हैं।
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पहले केडीबी के पास तीन जेई हॉर्टिकल्चर, सिविल और इलेक्ट्रिकल के थे। विंग के लिए प्रदेश सरकार से कोविड से पहले डिमांड की गई थी। हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कमल गुप्ता अब विंग को स्वीकृति देकर कुरुक्षेत्र को बड़ी सौगात दी है। इसके लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल और हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कमल गुप्ता का धन्यवाद किया है। विंग बनने से सभी चीजों के मेंटेनेंस में इंप्वूमेंट आएगी। चल रहे सभी विकास कार्यों की ठीक से देखभाल हो सकती है।
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कुरुक्षेत्र की प्राचीन विरासत, सदियों पुरानी परंपरा की रक्षा और तीर्थ यात्रा के संरक्षण के लिए एक बोर्ड की स्थापना की आवश्यकता पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न गुलजारी लाल नंदा ने महसूस की थी। एक अगस्त, 1968 को गुलजारी लाल नंदा की अध्यक्षता में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया गया। जिन व्यापक उद्देश्यों के लिए केडीबी का गठन किया गया था, उनमें कुरुक्षेत्र का विकास शामिल था। गुलजारी लाल नंदा इस बोर्ड के पहले अध्यक्ष थे। उसके बाद हरियाणा के राज्यपाल को बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि विंग की मंजूरी से निश्चित तौर पर तीर्थों के विकास कार्यों में तेजी आएगी। यह प्रस्ताव कोविड से पहले प्रदेश सरकार के पास भेजा गया था, जिसे मंत्री कमल गुप्ता ने हरी झंडी दे दी है। नए कर्मचारियों से केडीबी को मैन पावर मिलेगी और तीर्थों के विकास से जुड़े कार्यों के लिए अब अन्य विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर नहीं ताकना पडे़गा। कुरुक्षेत्र महाभारत के समय से ही सुर्खियों में रहा है। हर साल यहां लाखों तीर्थ यात्रियों आगमन होता है। कुरुक्षेत्र उन कुछ गंतव्यों में से एक है, जो धार्मिक पवित्रता और सांस्कृतिक उत्साह का एक आदर्श संगम है।
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