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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   KU VC depart between political pressure and disputes

राजनीतिक दबाव और विवादों के बीच केयू के वीसी विदा

Wed, 22 Jul 2015 12:15 AM IST
कुुुरुक्ष्ाेत्र/अमर उजाला ब्यूरो
कुुुरुक्ष्ाेत्र/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 22 Jul 2015 12:15 AM IST
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केयू को देशभर में 10वें पायदान पर लाने के नाम की पार्टी देने वाले कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. डीडीएस संधू ने विदा ले ली है। गुपचुप तरीके से कुलपति पद से इस्तीफा देने के बाद वे सेलिब्रेशन पार्टी में शामिल हुए और उसके बाद से उन्होंने सभी से संपर्क काट लिया। संधू के इस्तीफे के पीछे जहां राजनीतिक दबाव माना जा रहा है वहीं, दूसरी ओर उनके साथ जुड़े विवादों को भी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
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हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा यूनिवर्सिटी कॉलेज में हिंदी विभाग में एसिस्टेंट प्रोफेसर वंदना शर्मा की नियुक्ति के मामले में विजिलेंस जांच के आदेश देने के बाद से ही कुलपति की विदाई तय मानी जा रही थी। लेकिन, यह विदाई इतनी गुपचुप होगी, इसके बारे में कल्पना नहीं की जा रही थी।
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पांच वर्ष से भी ज्यादा लंबे समय तक कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति रहे डॉ. डीडी एस संधू ने जहां विकास के नाम पर केयू को देश के 10 शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल कराया, वहीं विवादों के साथ भी उनका चोली दामन का साथ रहा है।
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सोमवार को देर शाम यूनिवर्सिटी में पार्टी का आयोजन कुलपति की ओर से किया गया, इस पार्टी में टीचिंग, नॉन टीचिंग और केयू प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। इसमें कुलपति डॉ. डीडीएस संधू शामिल भी हुए।

लेकिन पार्टी के कुछ घंटों बाद ही केयू कुलपति के इस्तीफे की अफवाहें चर्चा में आ गई और मंगलवार को यह फाइनल भी हो गया कि कुलपति ने न केवल इस्तीफा दे दिया बल्कि उनका इस्तीफा मंजूर भी हो गया है।

गले की फांस बने ये मुद्दे
- वर्ष 2012 में केयू में असिस्टेंट प्रोफेसर वंदना शर्मा की नियुक्ति के मामले में विजिलेंस जांच जारी है

- केयू में कार्यरत 1428 आउटसोर्सिंग कर्मियों को समय पर सेलरी न देना, समय पर ईपीएफ न देना, बिना नोटिस के कर्मियों को निकालना, बिना लाइसेंस के आउट सोर्सिंग का ठेका देना आदि प्रमुख रहा। यह मामला लेबर डिपार्टमेंट पंचकूला में फरवरी 2012 से लंबित है।

- जून 2012 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ में केस चल रहा है, जिसमें आउटसोर्सिंग पॉलिसी को लागू न करना, 2006 से 2010 तक आउटसोर्सिंग कर्मियों का कोई लेबर रिकॉर्ड न रखना


- केयू के कार्यकारी परिषद सदस्यों की सहमति के बिना कुलपति द्वारा विभिन्न विभागों में प्रोफेसर, लाइब्रेरियन, डीन की नियुक्ति करना आदि अनेक मुद्दे रहे जो कि कुलपति संधू के गले की फांस बने।

ये रहा कुलपति का कारवां
 - 22 दिसंबर 1947 को जन्मे डीडी एस संधू ने 11 जनवरी 1967 को आर्मी ज्वाइन की और 01 जनवरी 2008 को रिटायरमेंट ली।

- 18 फरवरी 2010 से 20 मई 2011 तक एआईसीटीई नॉर्थ वेस्टर्न रीजनल कमेटी चंडीगढ़ के चेयरमैन रहे।

- सितंबर 2005 से 30 जून 2006 तक कॉलेज ऑफ मेटीरियल मैनेजमेंट जबलपुर में प्रिंसिपल रहे।  

- 9 जून 2008 से 4 फरवरी 2010 तक हिसार गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार में कुलपति रहे।

- 4 फरवरी 2010 से 23 अप्रैल 2010 तक अतिरिक्त कुलपति का चार्ज, 22 सितंबर 2009 से 4 फरवरी 2010 तक कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुलपति पद का अतिरिक्त प्रभार

- 5 फरवरी 2010 से 20 जुलाई 2015 तक कुरुक्षेत्र के कुलपति पद का पदभार संभाला।

ये मिले अवार्ड
डॉ. डीडीएस संधू को 24 नवंबर 2010 में देवांग मेहता अवॉर्ड से नवाजा गया जो कि अमरूप इंटरनेशनल संस्था द्वारा मुंबई ने प्रदान किया था।

- 19 जुलाई 2010 को भारत रत्न अवॉर्ड इकोनॉमिक फॉर हेल्थ एंड एजुकेशन ग्रोथ नई दिल्ली

-  वैदिक संस्कृति केंद्र हिसार द्वारा 13 अप्रैल 2010 में वैदिक रतन अवॉर्ड

- इंडियन एक्सीलेंस अवॉर्ड 19 फरवरी 2010

- हरियाणा गौरव रतन अवॉर्ड 2012 में एआईटीएम समेत अनेक अवॉर्ड हासिल किए।

ये रहीं कुलपति की उपलब्धियां
- कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में मास कॉम संस्थान की नई इमारत का निर्माण

- दो नए ब्वॉयज हॉस्टल व तीन नए गर्ल्स हॉस्टलों का निर्माण

- कैंपस में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करना

- इस सत्र से सभी विभागों में ऑन लाइन दाखिला प्रक्रिया शुरू करना

- परीक्षा शाखा 2 का निर्माण

- विभिन्न शिक्षा संस्थानों से एमओयू पर हस्ताक्षर

- इन्वायरनमेंट साइंस विभाग की बिल्डिंग का निर्माण

- केयू हॉस्टल की सेंट्रल पार्किंग का निर्माण

- इयोन बीम सेंटर का निर्माण

- केयू को देश के 10वीं रैंक का दर्जा

- ए ग्रेड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलवाना अहम रहा
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