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केयू का खर्च 351.82 आमदनी महज 281 करोड़
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 01 Apr 2016 12:48 AM IST
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केयू में गुरुवार को ईसी के साथ ही यूनिवर्सिटी कोर्ट की बैठक भी हुई। इस बैठक में यूनिवर्सिटी के सालाना बजट को पास कर दिया गया है। खास बात यह है कि यूनिवर्सिटी की आमदनी से खर्च कही ज्यादा है। हालांकि 70 करोड़ के घाटे के इस बजट को हरी झंडी दे दी गई है।
गुरुवार को कुलपति प्रोफेसर केसी शर्मा की अध्यक्षता में हुई कोर्ट की बैठक मेें यूनिवर्सिटी का बजट पेश किया गया। हालांकि राज्य सरकार का वित्त विभाग इस बजट को पहले पास कर चुका है। लेकिन यूनिवर्सिटी के नियमानुसार कोर्ट की मंजूरी के बाद ही इस पर अमल किया जा सकता है। कोर्ट की मुहर लगाने के लिए 351.82 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसे पास भी कर दिया गया लेकिन यूनिवर्सिटी की आमदनी कम होने से यूनिवर्सिटी प्रशासन फिलहाल चिंता में हैं।
सूत्र ने बताया कि यूनिवर्सिटी का खर्च तो 351.82 करोड़ रुपये आंका गया लेकिन आमदनी महज 281 करोड़ रुपये की ही है। ऐसे में यूनिवर्सिटी इस वक्त 9 करीब 70 करोड़ से ज्यादा के घाटे में हैं। सूत्रों की माने तो इस घाटे का फिलहाल ज्यादा असर नहीं नजर आ रहा है, क्योंकि आधे से ज्यादा शिक्षकों के पदरिक्त है। ऐसे में उनके वेतन और अन्य सुविधाओं का बचा खर्च घाटे को कम कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे यूनिवर्सिटी में पदों पर भर्ती होगी या प्रमोशन होंगे यह घाटा और ज्यादा बढने के आसार हैं। हालांकि बैठक में आमदनी बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा की गई है। हालांकि फिलहाल यह बात सामने नहीं आई है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन आमदनी बढ़ाने के लिए क्या करेगा?
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गुरुवार को कुलपति प्रोफेसर केसी शर्मा की अध्यक्षता में हुई कोर्ट की बैठक मेें यूनिवर्सिटी का बजट पेश किया गया। हालांकि राज्य सरकार का वित्त विभाग इस बजट को पहले पास कर चुका है। लेकिन यूनिवर्सिटी के नियमानुसार कोर्ट की मंजूरी के बाद ही इस पर अमल किया जा सकता है। कोर्ट की मुहर लगाने के लिए 351.82 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसे पास भी कर दिया गया लेकिन यूनिवर्सिटी की आमदनी कम होने से यूनिवर्सिटी प्रशासन फिलहाल चिंता में हैं।
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सूत्र ने बताया कि यूनिवर्सिटी का खर्च तो 351.82 करोड़ रुपये आंका गया लेकिन आमदनी महज 281 करोड़ रुपये की ही है। ऐसे में यूनिवर्सिटी इस वक्त 9 करीब 70 करोड़ से ज्यादा के घाटे में हैं। सूत्रों की माने तो इस घाटे का फिलहाल ज्यादा असर नहीं नजर आ रहा है, क्योंकि आधे से ज्यादा शिक्षकों के पदरिक्त है। ऐसे में उनके वेतन और अन्य सुविधाओं का बचा खर्च घाटे को कम कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे यूनिवर्सिटी में पदों पर भर्ती होगी या प्रमोशन होंगे यह घाटा और ज्यादा बढने के आसार हैं। हालांकि बैठक में आमदनी बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा की गई है। हालांकि फिलहाल यह बात सामने नहीं आई है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन आमदनी बढ़ाने के लिए क्या करेगा?
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