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Kurukshetra News: कुवि ने घोषित किए 11 परीक्षाओं के परिणाम
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की परीक्षा शाखा द्वारा 11 परीक्षाओं के परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने बताया कि दिसंबर 2024 में बीएससी (ऑनर्स) गणित पांचवां सेमेस्टर, बीवॉक फैशन टेक पांचवां सेमेस्टर, एमएससी इंजीनियरिंग भौतिकी छठा सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम घोषित किए गए।
इसी के साथ एमएससी इंजीनियरिंग भौतिकी सातवां सेमेस्टर (फ्रेश), एमएफए प्रथम सेमेस्टर (फ्रेश $ रि-अपीयर), बीएफए तृतीय सेमेस्टर एनईपी, एमए (मनोविज्ञान) प्रथम सेमेस्टर (एनईपी), एमएससी (भूगोल) तीसरा सेमेस्टर, बीएफएडी पहला सेमेस्टर, बीएफएडी पांचवां सेमेस्टर, पीजी डिप्लोमा इन गाइडेंस, काउंसलिंग एंड साइकोथैरेपी पहला सेमेस्टर (एनईपी) कक्षाओं के परिणाम भी घोषित किए गए हैं।
आगामी आदेश तक कार्य करते रहेंगे प्रो. सुनील ढींगरा
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के आदेशानुसार यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा 17 मई से अगले आदेशों तक डीन फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रूप में कार्य करते रहेंगे। प्रो. सुनील ढींगरा ने कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का आभार प्रकट करते हुए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने की बात कही।
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साहित्यिक चिंतन, शैक्षणिक आदर्शों और संकाय शोध पर की चर्चा
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएटीटीसी) एवं पंजाबी विभाग द्वारा पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में प्रो. जसपाल कौर कांग ने शेख फरीद की आध्यात्मिक एवं मानवीय शिक्षाओं के आलोक में विचारों की पवित्रता, करुणा और आत्मबोध की वर्तमान समय में अनिवार्यता को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि उनकी बाणी में निहित सार्वभौमिक मूल्य आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और दिशा प्रदान करते हैं। दूसरे सत्र में प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने एक आदर्श शिक्षक के गुण एवं शिक्षण की कला विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान प्रस्तुत किया। तृतीय सत्र में करीब 27 प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. मनमोहन सिंह ने शोध की दार्शनिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टिकोणों को बताया।
प्रो. अमरजीत ग्रेवाल ने भारतीय भाषाओं के ऐतिहासिक परिवर्तन, समसामयिक चुनौतियां और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए। प्रो. सुधाकर सिंह ने कहा कि किस प्रकार स्थानीय बोलियां और परंपराएं हिंदी भाषा को समृद्ध करती हैं। प्रो. पुष्पा रानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता और तुलनात्मक साहित्य अध्ययन में तुलसीदास के योगदान की व्याख्या की। इस मौके पर डॉ. समीर, डॉ. कुलदीप सिंह, सह-समन्वयिका डॉ. लता खेड़ा, डॉ. कविंद्र कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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इसी के साथ एमएससी इंजीनियरिंग भौतिकी सातवां सेमेस्टर (फ्रेश), एमएफए प्रथम सेमेस्टर (फ्रेश $ रि-अपीयर), बीएफए तृतीय सेमेस्टर एनईपी, एमए (मनोविज्ञान) प्रथम सेमेस्टर (एनईपी), एमएससी (भूगोल) तीसरा सेमेस्टर, बीएफएडी पहला सेमेस्टर, बीएफएडी पांचवां सेमेस्टर, पीजी डिप्लोमा इन गाइडेंस, काउंसलिंग एंड साइकोथैरेपी पहला सेमेस्टर (एनईपी) कक्षाओं के परिणाम भी घोषित किए गए हैं।
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आगामी आदेश तक कार्य करते रहेंगे प्रो. सुनील ढींगरा
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के आदेशानुसार यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा 17 मई से अगले आदेशों तक डीन फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रूप में कार्य करते रहेंगे। प्रो. सुनील ढींगरा ने कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का आभार प्रकट करते हुए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने की बात कही।
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साहित्यिक चिंतन, शैक्षणिक आदर्शों और संकाय शोध पर की चर्चा
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएटीटीसी) एवं पंजाबी विभाग द्वारा पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में प्रो. जसपाल कौर कांग ने शेख फरीद की आध्यात्मिक एवं मानवीय शिक्षाओं के आलोक में विचारों की पवित्रता, करुणा और आत्मबोध की वर्तमान समय में अनिवार्यता को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि उनकी बाणी में निहित सार्वभौमिक मूल्य आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और दिशा प्रदान करते हैं। दूसरे सत्र में प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने एक आदर्श शिक्षक के गुण एवं शिक्षण की कला विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान प्रस्तुत किया। तृतीय सत्र में करीब 27 प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. मनमोहन सिंह ने शोध की दार्शनिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टिकोणों को बताया।
प्रो. अमरजीत ग्रेवाल ने भारतीय भाषाओं के ऐतिहासिक परिवर्तन, समसामयिक चुनौतियां और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए। प्रो. सुधाकर सिंह ने कहा कि किस प्रकार स्थानीय बोलियां और परंपराएं हिंदी भाषा को समृद्ध करती हैं। प्रो. पुष्पा रानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता और तुलनात्मक साहित्य अध्ययन में तुलसीदास के योगदान की व्याख्या की। इस मौके पर डॉ. समीर, डॉ. कुलदीप सिंह, सह-समन्वयिका डॉ. लता खेड़ा, डॉ. कविंद्र कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।