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एकाग्रता साक्षात्कार में सफल होने का मूल मंत्र
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केयू यूआईईटी में लिट्रेरी क्लब द्वारा विद्यार्थियों की कला, तकनीकी कौशल को बढ़ाने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके समापन अवसर पर रक्षा मंत्रालय कोमोडोर संजय निर्मल ने साक्षात्कार में जाने के लिए प्रयोगात्मक करते हुए एक विद्यार्थी से लगभग 40 मिनट साक्षात्कार लिया। उन्होंने विद्यार्थियों को विषय से संबंधित कमियों का भी निदान किया। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम आत्म अनुशासन एवं एकाग्रता को होना जरूरी है तथा यही सफलता का मूल मंत्र भी है। उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार कौशल विकसित करने के लिए संचार की स्पष्टता, दूसरों के साथ हमारे संबंध की गुणवत्ता, विश्वसनीयता व संप्रेषण करने की कुशल तकनीक अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थी को विषय के बारे में सब कुछ पता होने के बावजूद भी वे विषय विशेषज्ञ के सामने हड़बड़ा जाते हैं। अत: साक्षात्कार के समय पूरी तरह से स्वस्थता, मानसिक दृढ़ता एवं सकारात्मकता बहुत आवश्यक है। इसके साथ ही विद्यार्थी को अपनी कमियों को पहले दूर करने का अभ्यास करना चाहिए। विषय विशेषज्ञ आंखों के इशारे से भी आपकी अध्ययन प्रणाली एवं आत्मविश्वास को पहचान लेते हैं।
इस अवसर पर डीन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी व यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के सभी पैमानों को विकसित करने के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं।
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छात्रा कीर्ति ने कहा 40 मिनट हुए साक्षात्कार द्वारा उन्हें ऐसा आत्मविश्वास मिला है कि भविष्य में किसी भी साक्षात्कार के लिए जाऊंगी तो असफल नहीं हो सकती। कार्यशाला की संयोजिका डॉ. अनुराधा व सह-संयोजिका डॉ. अमिता मित्तल व नेहा दुग्गल ने बताया की कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों के मन में बहुत सारे प्रश्न थे परंतु जब कार्यशाला के समापन पर विषय विशेषज्ञ कोमोडोर संजय निर्मल ने उनकी अंदर छिपी कमजोरियों को उजागर किया तो विद्यार्थियों में नया आत्मविश्वास एवं उर्जा का संचार हुआ है। इस अवसर पर डॉ. राजेश कालिया, डॉ. दिव्या भाटिया, शीशपाल, हरनेक सैनी व हरिकेश पपोसा के साथ विद्यार्थी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थी को विषय के बारे में सब कुछ पता होने के बावजूद भी वे विषय विशेषज्ञ के सामने हड़बड़ा जाते हैं। अत: साक्षात्कार के समय पूरी तरह से स्वस्थता, मानसिक दृढ़ता एवं सकारात्मकता बहुत आवश्यक है। इसके साथ ही विद्यार्थी को अपनी कमियों को पहले दूर करने का अभ्यास करना चाहिए। विषय विशेषज्ञ आंखों के इशारे से भी आपकी अध्ययन प्रणाली एवं आत्मविश्वास को पहचान लेते हैं।
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इस अवसर पर डीन इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी व यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के सभी पैमानों को विकसित करने के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं।
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छात्रा कीर्ति ने कहा 40 मिनट हुए साक्षात्कार द्वारा उन्हें ऐसा आत्मविश्वास मिला है कि भविष्य में किसी भी साक्षात्कार के लिए जाऊंगी तो असफल नहीं हो सकती। कार्यशाला की संयोजिका डॉ. अनुराधा व सह-संयोजिका डॉ. अमिता मित्तल व नेहा दुग्गल ने बताया की कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों के मन में बहुत सारे प्रश्न थे परंतु जब कार्यशाला के समापन पर विषय विशेषज्ञ कोमोडोर संजय निर्मल ने उनकी अंदर छिपी कमजोरियों को उजागर किया तो विद्यार्थियों में नया आत्मविश्वास एवं उर्जा का संचार हुआ है। इस अवसर पर डॉ. राजेश कालिया, डॉ. दिव्या भाटिया, शीशपाल, हरनेक सैनी व हरिकेश पपोसा के साथ विद्यार्थी मौजूद रहे।