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कारगिल के हीरो : कारगिल युद्ध में योद्धा पवन सैनी ने रडार पर संभाली थी कमान
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कुरुक्षेत्र। कारगिल युद्ध के दौरान जब पहाड़ों पर गोलियां चल रही थीं और आसमान में लड़ाकू विमान गरज रहे थे, तब पर्दे के पीछे एक मूक लेकिन निर्णायक योद्धा पवन सैनी ने रडार पर कमान संभाले हुए थे। उनकी तेज निगाहों और तकनीकी कौशल ने दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी और हमारे फाइटर जेट्स को विजय की राह दिखाई।
दीदार नगर के रहने वाले सेवानिवृत्त वारंट अधिकारी पवन सैनी वेटर्न एयर वॉरियर एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान हैं। उन्होंने बताया कि आज भी वह 1999 के कारगिल युद्ध की यादों से भावुक हो जाते हैं। उस दौरान उनकी ड्यूटी रडार यूनिट पर थी, जहां से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जा रही थी। यह रडार यूनिट युद्ध का मूक लेकिन सबसे अहम हिस्सा थी, जिसने हवा में हुए हर हमले की निगरानी और मार्गदर्शन सुनिश्चित किया।
उन्होंने बताया कि उनकी तैनाती एक फाइटर बेस पर थी, जहां पर रडार यूनिट में वह ऑपरेशनल ड्यूटी पर रहे। उनका कार्य था दुश्मन की ओर से आने वाली हर हवाई गतिविधि को ट्रैक करना, भारतीय वायुसेना के मिग और मिराज जैसे फाइटर जेट्स को लक्ष्य तक सुरक्षित मार्गदर्शन देना और वॉर जोन में चल रहे मिशनों का सटीक समन्वय करना। इसी से सूचना मिलती थी कि किस दिशा से दुश्मन आ रहा है और किस दिशा में प्रहार करना है। यही तकनीकी आधार भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान की सीमाओं के अंदर जाकर सटीक बमबारी करने में मददगार साबित हुआ। वह 1982 में भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए थे और 32 वर्षों की सेवा के बाद 2014 में सेवानिवृत्त हुए।
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युद्ध के समय घरवालों से टूटा था संपर्क
पवन सैनी ने बताया कि जब पूरा देश कारगिल के समाचार सुन रहा था, तब वे एक ऐसे स्थान पर तैनात थे जहां से किसी प्रकार का बाहरी संपर्क नहीं हो पाता था। हम न पत्र भेज सकते थे, न फोन कर सकते थे। लेकिन मन में सिर्फ एक ही भावना थी कि देश को जिताना है।
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बेटा वायुसेना में विंग कमांडर
पवन सैनी का इकलौता बेटा संदीप सैनी आज भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर के पद पर तैनात है। उन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में प्रमुख भूमिका निभाई। पिता और पुत्र दोनों की सेवा देश के लिए एक प्रेरणास्रोत है। पवन सैनी गर्व से कहते हैं कि हमने जो जज्बा कारगिल में देखा था, वही जज्बा आज मेरी अगली पीढ़ी निभा रही है।
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दीदार नगर के रहने वाले सेवानिवृत्त वारंट अधिकारी पवन सैनी वेटर्न एयर वॉरियर एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान हैं। उन्होंने बताया कि आज भी वह 1999 के कारगिल युद्ध की यादों से भावुक हो जाते हैं। उस दौरान उनकी ड्यूटी रडार यूनिट पर थी, जहां से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जा रही थी। यह रडार यूनिट युद्ध का मूक लेकिन सबसे अहम हिस्सा थी, जिसने हवा में हुए हर हमले की निगरानी और मार्गदर्शन सुनिश्चित किया।
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उन्होंने बताया कि उनकी तैनाती एक फाइटर बेस पर थी, जहां पर रडार यूनिट में वह ऑपरेशनल ड्यूटी पर रहे। उनका कार्य था दुश्मन की ओर से आने वाली हर हवाई गतिविधि को ट्रैक करना, भारतीय वायुसेना के मिग और मिराज जैसे फाइटर जेट्स को लक्ष्य तक सुरक्षित मार्गदर्शन देना और वॉर जोन में चल रहे मिशनों का सटीक समन्वय करना। इसी से सूचना मिलती थी कि किस दिशा से दुश्मन आ रहा है और किस दिशा में प्रहार करना है। यही तकनीकी आधार भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान की सीमाओं के अंदर जाकर सटीक बमबारी करने में मददगार साबित हुआ। वह 1982 में भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए थे और 32 वर्षों की सेवा के बाद 2014 में सेवानिवृत्त हुए।
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युद्ध के समय घरवालों से टूटा था संपर्क
पवन सैनी ने बताया कि जब पूरा देश कारगिल के समाचार सुन रहा था, तब वे एक ऐसे स्थान पर तैनात थे जहां से किसी प्रकार का बाहरी संपर्क नहीं हो पाता था। हम न पत्र भेज सकते थे, न फोन कर सकते थे। लेकिन मन में सिर्फ एक ही भावना थी कि देश को जिताना है।
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बेटा वायुसेना में विंग कमांडर
पवन सैनी का इकलौता बेटा संदीप सैनी आज भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर के पद पर तैनात है। उन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में प्रमुख भूमिका निभाई। पिता और पुत्र दोनों की सेवा देश के लिए एक प्रेरणास्रोत है। पवन सैनी गर्व से कहते हैं कि हमने जो जज्बा कारगिल में देखा था, वही जज्बा आज मेरी अगली पीढ़ी निभा रही है।