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Kurukshetra News: संयुक्त छात्र संगठन ने कुलपति कार्यालय पर किया प्रदर्शन
Tue, 18 Feb 2025 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 18 Feb 2025 02:19 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शोध छात्रों के शोषण का मामला सामने आया है। संयुक्त छात्र संगठन की ओर से सोमवार को कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा को ज्ञापन सौंपकर हिंदी विभाग की चेयरपर्सन को डीन और चेयरपर्सन पद से बर्खास्त करने की मांग की। विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय पर करीब एक घंटे तक धरना दिया। दूसरी तरफ हिंदी विभाग की चेयरपर्सन ने उन पर लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया।
छात्रों का आरोप है कि वे अपने पद का दुरुपयोग कर रही हैं और शोधार्थियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। शोध छात्र रवि और विनोद ने बताया कि पिछले एक वर्ष से उन्हें लगातार शोषण का शिकार बनाया जा रहा है। सत्र 2023-24 में हिंदी विभाग में आठ छात्रों ने प्रवेश लिया था। डीआरएसी (डाॅक्टरल रिसर्च एडवाइजरी कमेटी) की बैठक में रवि, विनोद और शोधार्थी पुष्पा ने अपने शोध निर्देशक की सहमति पत्र सहित शोध विषय प्रस्तुत किया था। हालांकि चेयरपर्सन ने रवि और विनोद को जबरन अपने निर्देशन में शोध के लिए चुन लिया। इतना ही नहीं विनोद का शोध विषय भी बिना उसकी बिना जानकारी के बदल दिया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले भी हिंदी विभाग की चेयरपर्सन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। अब भी शोधार्थियों का आरोप है कि उनसे लगातार धन की मांग की जा रही है। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। रवि और विनोद कई महीनों से विश्वविद्यालय प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शोधार्थी विनोद का कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर होंगे। कुलपति ने शोधार्थियों को आश्वासन दिया कि नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। वहीं चेयरपर्सन का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
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छात्रों का आरोप है कि वे अपने पद का दुरुपयोग कर रही हैं और शोधार्थियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। शोध छात्र रवि और विनोद ने बताया कि पिछले एक वर्ष से उन्हें लगातार शोषण का शिकार बनाया जा रहा है। सत्र 2023-24 में हिंदी विभाग में आठ छात्रों ने प्रवेश लिया था। डीआरएसी (डाॅक्टरल रिसर्च एडवाइजरी कमेटी) की बैठक में रवि, विनोद और शोधार्थी पुष्पा ने अपने शोध निर्देशक की सहमति पत्र सहित शोध विषय प्रस्तुत किया था। हालांकि चेयरपर्सन ने रवि और विनोद को जबरन अपने निर्देशन में शोध के लिए चुन लिया। इतना ही नहीं विनोद का शोध विषय भी बिना उसकी बिना जानकारी के बदल दिया गया।
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गौरतलब है कि इससे पहले भी हिंदी विभाग की चेयरपर्सन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। अब भी शोधार्थियों का आरोप है कि उनसे लगातार धन की मांग की जा रही है। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। रवि और विनोद कई महीनों से विश्वविद्यालय प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शोधार्थी विनोद का कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर होंगे। कुलपति ने शोधार्थियों को आश्वासन दिया कि नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। वहीं चेयरपर्सन का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
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