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जिंदर आधुनिक पंजाबी कथा के विचारशील रचनाकार : डॉ. कुलदीप
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कुरुक्षेत्र। संगोष्ठी में हिस्सा लेने के दौरान सभी प्रतिभागी। स्वयं
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कला व भाषा संकाय स्थित गणपति चंद्र गुप्त सेमिनार हॉल में पंजाबी साहित्य सभा और पंजाबी विभाग की ओर से साहित्य सृजन शृंखला के अंतर्गत सुप्रसिद्ध कहानीकार जिंदर के साथ मैं और मेरी सृजन प्रक्रिया विषय पर संवादात्मक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने साहित्य सृजन की प्रक्रिया को समझा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह ने किया। उन्होंने जिंदर को आधुनिक पंजाबी कथा साहित्य का संवेदनशील व विचारशील रचनाकार बताते हुए कहा कि उनकी कहानियां सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंधों और ऐतिहासिक चेतना की गहरी पड़ताल प्रस्तुत करती हैं।
मुख्य वक्ता जिंदर ने अपनी रचनात्मक यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश, जीवन संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं ने उनके भीतर कहानीकार को आकार दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास, मिथक और स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलता उनकी सृजन प्रक्रिया को निरंतर प्रेरित करती है।
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उन्होंने विशेष रूप से 1947 के विभाजन की त्रासदी, महाभारत की दार्शनिक व्याख्याओं और मानवीय रिश्तों की अंतर्दृष्टि को अपनी रचनात्मक सोच का आधार बताया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह ने किया। उन्होंने जिंदर को आधुनिक पंजाबी कथा साहित्य का संवेदनशील व विचारशील रचनाकार बताते हुए कहा कि उनकी कहानियां सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंधों और ऐतिहासिक चेतना की गहरी पड़ताल प्रस्तुत करती हैं।
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मुख्य वक्ता जिंदर ने अपनी रचनात्मक यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश, जीवन संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं ने उनके भीतर कहानीकार को आकार दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास, मिथक और स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलता उनकी सृजन प्रक्रिया को निरंतर प्रेरित करती है।
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उन्होंने विशेष रूप से 1947 के विभाजन की त्रासदी, महाभारत की दार्शनिक व्याख्याओं और मानवीय रिश्तों की अंतर्दृष्टि को अपनी रचनात्मक सोच का आधार बताया।