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Kurukshetra News: गर्मी में बढ़ने लगे पीलिया के मरीज, बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
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कुरुक्षेत्र। भीषण गर्मी के बीच जिले में पीलिया और लिवर संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखने को मिल रहा है। लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) की बाल रोग ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 75 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, इनमें करीब 40 प्रतिशत बच्चे पीलिया और लिवर हेपेटाइटिस से संबंधित समस्याओं से पीड़ित मिल रहे हैं, वहीं उल्टी-दस्त के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मोदगिल ने बताया कि तेज गर्मी, दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान के कारण बच्चों में पीलिया और हेपेटाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
उन्होंने बताया कि इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में आने वाले बच्चों में बुखार, आंखों का पीला पड़ना, भूख कम लगना, उल्टी, कमजोरी और पेट दर्द जैसी शिकायतें अधिक मिल रही हैं, इसके अलावा दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीज भी पहले की तुलना में बढ़े हैं। हालांकि अस्पताल में इसको लेकर तैयारी पूरी तरीके की हुई है। उन्होंने बताया कि बच्चोंं में बढ़ रहे इन संक्रमण के कारण अस्पताल प्रशासन भी अलर्ट मोड़ पर आ गया है।
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डॉ. मोदगिल ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को केवल साफ और उबला हुआ पानी पिलाएं। बाहर के कटे फल, बर्फ से बने पेय पदार्थ और खुले खाद्य पदार्थ खाने से बचें। बच्चों को धूप में लंबे समय तक न रहने दें तथा शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। यदि आंखें या पेशाब का रंग पीला दिखाई दे, लगातार बुखार रहे या बच्चा सुस्त रहने लगे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले का यह समय संक्रमण फैलने के लिहाज से संवेदनशील होता है। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है, इसलिए अभिभावकों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।
पीलिया से बचने के लिए रखें ये सावधानियां
-केवल स्वच्छ और उबला हुआ पानी पिलाएं।
-बाहर के कटे फल और खुले खाद्य पदार्थ खाने से बचें।
-बच्चों के हाथ साबुन से बार-बार धुलवाएं।
-तेज धूप में अनावश्यक बाहर न निकलने दें।
-उल्टी, दस्त, आंखें पीली होना या भूख कम लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मोदगिल ने बताया कि तेज गर्मी, दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान के कारण बच्चों में पीलिया और हेपेटाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
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उन्होंने बताया कि इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में आने वाले बच्चों में बुखार, आंखों का पीला पड़ना, भूख कम लगना, उल्टी, कमजोरी और पेट दर्द जैसी शिकायतें अधिक मिल रही हैं, इसके अलावा दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीज भी पहले की तुलना में बढ़े हैं। हालांकि अस्पताल में इसको लेकर तैयारी पूरी तरीके की हुई है। उन्होंने बताया कि बच्चोंं में बढ़ रहे इन संक्रमण के कारण अस्पताल प्रशासन भी अलर्ट मोड़ पर आ गया है।
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डॉ. मोदगिल ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को केवल साफ और उबला हुआ पानी पिलाएं। बाहर के कटे फल, बर्फ से बने पेय पदार्थ और खुले खाद्य पदार्थ खाने से बचें। बच्चों को धूप में लंबे समय तक न रहने दें तथा शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। यदि आंखें या पेशाब का रंग पीला दिखाई दे, लगातार बुखार रहे या बच्चा सुस्त रहने लगे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले का यह समय संक्रमण फैलने के लिहाज से संवेदनशील होता है। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है, इसलिए अभिभावकों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।
पीलिया से बचने के लिए रखें ये सावधानियां
-केवल स्वच्छ और उबला हुआ पानी पिलाएं।
-बाहर के कटे फल और खुले खाद्य पदार्थ खाने से बचें।
-बच्चों के हाथ साबुन से बार-बार धुलवाएं।
-तेज धूप में अनावश्यक बाहर न निकलने दें।
-उल्टी, दस्त, आंखें पीली होना या भूख कम लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।