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रिश्तों को बचाना, सहेजना व संवारना जरूरी है : रमन्ना रेड्डी
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कुरुक्षेत्र। नाटक का मंचन करते कलाकार।
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मानवीय रिश्तों एवं भावनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय कलाकार बृज शर्मा ने 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के कलाकारों के साथ प्रमुख संस्था कला सृष्टि के माध्यम से आज बदलते रिश्ते नाटक का मंचन किया। हरियाणा कला परिषद अंबाला मंडल की ओर से भरतमुनि रंगशाला में नाटक के मंचन अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमन्ना रेड्डी ने कहा कि आज के बदलते परिवेश में रिश्ते भी बदल रहे हैं। हमें इन रिश्तों को बचाना, सहेजना व संवारना है। हम शीघ्र ही राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में इस प्रयास को आरंभ करने जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कलाकार बृज शर्मा ने कहा कि आज कल परिवारों में बुजुर्गों की देखभाल की बजाय बच्चे भौतिकवादी हो रहे हैं। बृज शर्मा ने अपनी कला एवं प्रतिभा के माध्यम से पिछले करीब चार दशकों में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने अपने नाटकों, रचनाओं एवं गीतों के माध्यम से आधुनिक समाज में रिश्तों एवं भावनाओं पर काफी पीड़ा को व्यक्त किया है। उन्होंने माना है कि बीते समय के परिवारों में सम्मान एवं एक दूसरे के साथ लगाव होता था। उन्होंने हाल ही में एक बार फिर से समाज की वास्तविकता को उजागर करने का प्रयास किया है। उन्होंने यह प्रयास अपने मित्रों एवं सहयोगियों के साथ से नाटक बदलते रिश्ते के माध्यम से किया है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डाॅ. महा सिंह पूनिया, सौरभ दत्त शर्मा, प्रो. सुचि स्मिता शर्मा, डाॅ. जय भगवान सिंगला, विनोद कौशिक, प्रो. सुरेंद्र मोहन गुप्ता, डा. कर्ण शर्मा, अरुण आश्री, रणधीर शर्मा, डाॅ. अशोक चौधरी इत्यादि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। मानवीय रिश्तों एवं भावनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय कलाकार बृज शर्मा ने 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के कलाकारों के साथ प्रमुख संस्था कला सृष्टि के माध्यम से आज बदलते रिश्ते नाटक का मंचन किया। हरियाणा कला परिषद अंबाला मंडल की ओर से भरतमुनि रंगशाला में नाटक के मंचन अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमन्ना रेड्डी ने कहा कि आज के बदलते परिवेश में रिश्ते भी बदल रहे हैं। हमें इन रिश्तों को बचाना, सहेजना व संवारना है। हम शीघ्र ही राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में इस प्रयास को आरंभ करने जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कलाकार बृज शर्मा ने कहा कि आज कल परिवारों में बुजुर्गों की देखभाल की बजाय बच्चे भौतिकवादी हो रहे हैं। बृज शर्मा ने अपनी कला एवं प्रतिभा के माध्यम से पिछले करीब चार दशकों में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने अपने नाटकों, रचनाओं एवं गीतों के माध्यम से आधुनिक समाज में रिश्तों एवं भावनाओं पर काफी पीड़ा को व्यक्त किया है। उन्होंने माना है कि बीते समय के परिवारों में सम्मान एवं एक दूसरे के साथ लगाव होता था। उन्होंने हाल ही में एक बार फिर से समाज की वास्तविकता को उजागर करने का प्रयास किया है। उन्होंने यह प्रयास अपने मित्रों एवं सहयोगियों के साथ से नाटक बदलते रिश्ते के माध्यम से किया है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डाॅ. महा सिंह पूनिया, सौरभ दत्त शर्मा, प्रो. सुचि स्मिता शर्मा, डाॅ. जय भगवान सिंगला, विनोद कौशिक, प्रो. सुरेंद्र मोहन गुप्ता, डा. कर्ण शर्मा, अरुण आश्री, रणधीर शर्मा, डाॅ. अशोक चौधरी इत्यादि मौजूद रहे।
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