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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सरस्वती के स्वरूप को समझने में सहायता करेगा : जिंदल
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कुरुक्षेत्र। कुवि के सीनेट हाॅल में सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च ऑन सरस्वती रिवर व कुवि के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पावन सरस्वती नदी सम्मेलन के लिए सांसद नवीन जिंदल ने संदेश भेजा। इस ऐतिहासिक एवं शोधपरक आयोजन के लिए उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि हमारे इतिहास, संस्कृति और आस्था की जीवनरेखा रही है। यह ज्ञान, समृद्धि और सभ्यता का प्रतीक मानी जाती है, जिसका उल्लेख वेदों और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है है। आधुनिक शोध और वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से इस पौराणिक नदी के अस्तित्व को नए दृष्टिकोण से देखने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय पावन सरस्वती नदी सम्मेलन के माध्यम से हमें सरस्वती नदी के ऐतिहासिक, भूगर्भीय और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहन चर्चा करने का अवसर मिलेगा, जो हमारी समृद्ध विरासत को संरक्षित और पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने भेजे गए अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से आशा व्यक्त की कि यह अंतरराष्ट्रीय पावन सरस्वती नदी सम्मेलन नई खोजों, शोध कार्यों और सार्थक निष्कर्षों के साथ हमें इस दिव्य व पावन नदी के वास्तविक स्वरूप को समझने में सहायता करेगा। इस प्रयास से हम न केवल अपने अतीत को पुन: स्थापित करेंगे, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जल संरक्षण और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय पावन सरस्वती नदी सम्मेलन के माध्यम से हमें सरस्वती नदी के ऐतिहासिक, भूगर्भीय और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहन चर्चा करने का अवसर मिलेगा, जो हमारी समृद्ध विरासत को संरक्षित और पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने भेजे गए अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से आशा व्यक्त की कि यह अंतरराष्ट्रीय पावन सरस्वती नदी सम्मेलन नई खोजों, शोध कार्यों और सार्थक निष्कर्षों के साथ हमें इस दिव्य व पावन नदी के वास्तविक स्वरूप को समझने में सहायता करेगा। इस प्रयास से हम न केवल अपने अतीत को पुन: स्थापित करेंगे, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जल संरक्षण और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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