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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Impact of farmers' movement: State's rice industry on the verge of closure, loss of more than Rs 100 crore daily

किसान आंदोलन का असर : प्रदेश का चावल उद्योग बंद होने के कगार पर, रोज 100 करोड़ से अधिक का नुकसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Feb 2024 04:22 AM IST
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Impact of farmers' movement: State's rice industry on the verge of closure, loss of more than Rs 100 crore daily
कुरुक्षेत्र। किसान जहां अपनी मांगों को लेकर अड़े है वहीं इस आंदोलन से अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ने लगा है। प्रदेश का चावल उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच गया है, जिसके हर रोज 100 करोड़ से अधिक का नुकसान होने की संभावना जताई जाने लगी है तो वहीं राइस सेलरों से सरकार को होने वाली चावल की सप्लाई भी ठप हो गई है। यहां तक कि हर रोज प्रदेश से विभिन्न देशों में करीब 150 करोड़ से अधिक के होने वाले चावल निर्यात पर भी असर पड़ने लगा है। यही नहीं पंजाब सीमाएं सील होने के चलते बठिंडा रिफाइनरी से होने वाली हेक्सेन गैस की सप्लाई थम गई है, जिससे साल्वेंट प्लांट भी ठप होने लगे हैं। आंदोलन के चलते बने इन हालातों ने कारोबारियों को चिंता में डाल दिया है और अब ये बैठकें कर समीक्षा करने में जुट गए हैं।
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प्रदेशभर में 1443 राइस मिल हैं, जो सरकार को सीआरएम की सप्लाई करते हैं। कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, अंबाला को राइस उद्योग का बड़ा हब माना जाता है जबकि प्रदेश के दूसरे जिलों में भी बड़े स्तर पर राइस मिल स्थित है। कुरुक्षेत्र में 243 राइस मिल हैं वहीं प्रदेश में करीब 250 राइस मिल बारीक चावल से संबंधित भी स्थित है। प्रदेश से जहां पूरे देश में चावल सप्लाई होता है वहीं चार हजार करोड़ का चावल हर माह निर्यात किया जाता है।
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इंटरनेट बंद होने से ही थम गई सरकार को चावल सप्लाई
चावल कारोबारी गगनदीप सिंह व विवेक सिंगला की माने तो पिछले चार दिन से इंटरनेट बंद है, जिसके चलते ही अब तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। यहां तक कि ट्रकों में लगे जीपीएस भी ठप हो गए हैं, जिसके चलते गेटपास नहीं कट पा रहे। गेटपास न कटने के चलते सरकार को होने वाली सीआरएम सप्लाई बंद हो गई है तो दूसरे काम भी ठप है।
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डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को मिलों में रोजगार
चावल कारोबारियों की माने तो प्रदेशभर में हर मिल पर करीब 100 कर्मचारी काम करते हैं और प्रदेशभर में यह संख्या 150 लाख से भी पार है। मिल ठप होने का सीधा असर इनके रोजगार पर भी पड़ता है। वहीं इंटरनेट बंद होने से बिलिंग बंद हो चुकी है तो इन मजदूर व अन्य कर्मियों की सैलरी तक अटक गई है।



जल्द बंद हो जाएंगे राइस मिल, करेंगे आपात हालात पर समीक्षा : सिंगला
हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वैल सिंगला का कहना है कि चारों ओर नाकेबंदी के चलते न कच्चा माल आ पा रहा है और न ही तैयार माल कहीं भेज पा रहे हैं। पंजाब से साल्वेंट प्लांटों में मुख्य तौर पर बठिंडा रिफाइनरी से ही हेक्सेन गैस सप्लाई होती है, जो नहीं हो पा रही है। ऐसे में साल्वेंट प्लांट बंद होेने के कगार पर है। इसका सीधा असर राइस मिलों पर पड़ने लगा है। राइस मिलों से ली जाने वाली राइस ब्रान साल्वेंट प्लांटों की ओर से बंद कर दी गई है। वहीं मिलों से सीआरएम के लिए भी चावल नहीं भेज पा रहे हैं। पूरा भुगतान व दस्तावेज इंटरनेट पर टिके हैं, जो चार दिन से बंद है। ये हालात जारी रहे तो यह नुकसान और भी बढ़ेगा। राइस मिलर्स से संपर्क साधा जा रहा है और जल्द आपात बैठक कर समीक्षा की जाएगी।
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