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Kurukshetra News: आईएमसीएमटी में हर सप्ताह रहेगा नो मोबाइल डे, विद्यार्थियों को मिलेगी फील्ड रिपोर्टिंग डायरी
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कुरुक्षेत्र। आईएमसीएमटी में राष्ट्रीय प्रसारण दिवस पर कुलसचिव प्रो वीरेंदर पाल को सम्मानित करते
कुरुक्षेत्र। केयू के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमसीएमटी) में नए शैक्षणिक सत्र से नो मोबाइल डे शुरू होगा। यह हर सप्ताह एक दिन मनाया जाएगा। इस दिन विद्यार्थी मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेंगे। उन्हें फील्ड रिपोर्टिंग डायरी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
यह घोषणा वीरवार को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस पर संस्थान की निदेशिका प्रो. बिंदु शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता के बीच यह पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य पत्रकारिता के विद्यार्थियों में अवलोकन और रिपोर्टिंग कौशल बढ़ाना है। विद्यार्थियों को घटनास्थल पर जाकर जानकारी जुटानी होगी। उन्हें लोगों से बातचीत करनी होगी और तथ्यों को स्वयं दर्ज करना होगा। इसके लिए फील्ड विजिट, प्रत्यक्ष अवलोकन और संवाद पर जोर दिया जाएगा। फील्ड रिपोर्टिंग डायरी से उनमें रचनात्मक लेखन की आदत विकसित होगी।
इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में प्रसारण माध्यमों की बदलती भूमिका पर चर्चा हुई। कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया पर कम समय देने का आह्वान किया। उन्होंने अध्ययन व आत्मिक रचनात्मकता विकसित करने पर जोर दिया। ऑल इंडिया रेडियो के वरिष्ठ अधिकारी जैनेन्द्र सिंह, पूर्व स्टेशन निदेशक संजीव दोसांझ और मीडिया विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र दुबे ने एआई के जिम्मेदार उपयोग व विश्वसनीय पत्रकारिता के महत्व पर विचार रखे।
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सोशल मीडिया से ज्यादा आत्मिक रचनात्मकता विकसित करें विद्यार्थी : प्रो. वीरेंद्र पाल
केयू के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने से रचनात्मकता विकसित नहीं होती। विद्यार्थियों को अध्ययन, आत्मचिंतन और समाज से जुड़कर सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रेडियो और अन्य प्रसारण माध्यमों के गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम सुनने से सोच का दायरा बढ़ता है और व्यक्तित्व का विकास होता है। विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहकर जिम्मेदार मीडिया पेशेवर बनने का प्रयास करना चाहिए।
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यह घोषणा वीरवार को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस पर संस्थान की निदेशिका प्रो. बिंदु शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता के बीच यह पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य पत्रकारिता के विद्यार्थियों में अवलोकन और रिपोर्टिंग कौशल बढ़ाना है। विद्यार्थियों को घटनास्थल पर जाकर जानकारी जुटानी होगी। उन्हें लोगों से बातचीत करनी होगी और तथ्यों को स्वयं दर्ज करना होगा। इसके लिए फील्ड विजिट, प्रत्यक्ष अवलोकन और संवाद पर जोर दिया जाएगा। फील्ड रिपोर्टिंग डायरी से उनमें रचनात्मक लेखन की आदत विकसित होगी।
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इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में प्रसारण माध्यमों की बदलती भूमिका पर चर्चा हुई। कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया पर कम समय देने का आह्वान किया। उन्होंने अध्ययन व आत्मिक रचनात्मकता विकसित करने पर जोर दिया। ऑल इंडिया रेडियो के वरिष्ठ अधिकारी जैनेन्द्र सिंह, पूर्व स्टेशन निदेशक संजीव दोसांझ और मीडिया विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र दुबे ने एआई के जिम्मेदार उपयोग व विश्वसनीय पत्रकारिता के महत्व पर विचार रखे।
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सोशल मीडिया से ज्यादा आत्मिक रचनात्मकता विकसित करें विद्यार्थी : प्रो. वीरेंद्र पाल
केयू के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने से रचनात्मकता विकसित नहीं होती। विद्यार्थियों को अध्ययन, आत्मचिंतन और समाज से जुड़कर सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रेडियो और अन्य प्रसारण माध्यमों के गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम सुनने से सोच का दायरा बढ़ता है और व्यक्तित्व का विकास होता है। विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहकर जिम्मेदार मीडिया पेशेवर बनने का प्रयास करना चाहिए।