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आरटीओ या ई-चालान के नाम से मैसेज आए तो लिंक न खोलें, हो सकती है ठगी : पुलिस अधीक्षक
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कुरुक्षेत्र। पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन ने आमजन को साइबर अपराधों के प्रति आगाह करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी को आसान बना रही है। साइबर अपराधी इसी टेक्नोलॉजी का फायदा उठाकर अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर ठग किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप में आरटीओ या आरटीओ ई-चालान नाम से एप्लीकेशन का लिंक भेजकर अपनी गाड़ी के चालान के बारे में पता करने के लिए अपील करते हैं। जब भी ग्रुप का कोई भी सदस्य उस लिंक को खोलता है तो उनका मोबाइल फोन भी हैक हो जाता है। उसके बाद साइबर ठग उनका खाता खाली कर देते हैं। ठग हैक किए गए मोबाइल फोन से ही दूसरे व्हाट्सएप ग्रुप में लिंक भेजते हैं। इस नए पैंतरे में आमजन इसलिए आसानी से फंस जाता है क्योंकि लिंक ग्रुप के सदस्य या जानकार के मोबाइल से भेजा जाता है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय या ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा अपनी शिकायत साइबर क्राइम थाना या आपके संबंधित थाने में स्थापित साइबर हेल्प डेस्क पर दे सकते हैं।
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इन उपायों को अपनाकर आप साइबर ठगी से बच सकते हैं
1. किसी भी अनजान लिंक व एप्लिकेशन को डाउनलोड न करें।
2. ट्रैफिक चालान का भुगतान केवल अधिकारिक पोर्टल या ट्रेफिक पुलिस की वेबसाइट व एप पर ही वेरिफाई करें।
3. केवल अधिकृत स्त्रोत गुगल प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
4. गुगल प्ले प्रोटेक्शन को हमेशा सक्रिय रखें।
5. अनजान व अविश्वसनीय एप को एक्सेसिबिलिटी सर्विस की अनुमति न दें।
6. संदिग्ध संदेश व ईमेल में प्राप्त लिंक पर क्लिक करने से बचें।
7. मोबाइल व एप्लिकेशन को समय-समय पर अपडेट करते रहें।
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उन्होंने कहा कि साइबर ठग किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप में आरटीओ या आरटीओ ई-चालान नाम से एप्लीकेशन का लिंक भेजकर अपनी गाड़ी के चालान के बारे में पता करने के लिए अपील करते हैं। जब भी ग्रुप का कोई भी सदस्य उस लिंक को खोलता है तो उनका मोबाइल फोन भी हैक हो जाता है। उसके बाद साइबर ठग उनका खाता खाली कर देते हैं। ठग हैक किए गए मोबाइल फोन से ही दूसरे व्हाट्सएप ग्रुप में लिंक भेजते हैं। इस नए पैंतरे में आमजन इसलिए आसानी से फंस जाता है क्योंकि लिंक ग्रुप के सदस्य या जानकार के मोबाइल से भेजा जाता है।
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पुलिस अधीक्षक ने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय या ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा अपनी शिकायत साइबर क्राइम थाना या आपके संबंधित थाने में स्थापित साइबर हेल्प डेस्क पर दे सकते हैं।
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इन उपायों को अपनाकर आप साइबर ठगी से बच सकते हैं
1. किसी भी अनजान लिंक व एप्लिकेशन को डाउनलोड न करें।
2. ट्रैफिक चालान का भुगतान केवल अधिकारिक पोर्टल या ट्रेफिक पुलिस की वेबसाइट व एप पर ही वेरिफाई करें।
3. केवल अधिकृत स्त्रोत गुगल प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
4. गुगल प्ले प्रोटेक्शन को हमेशा सक्रिय रखें।
5. अनजान व अविश्वसनीय एप को एक्सेसिबिलिटी सर्विस की अनुमति न दें।
6. संदिग्ध संदेश व ईमेल में प्राप्त लिंक पर क्लिक करने से बचें।
7. मोबाइल व एप्लिकेशन को समय-समय पर अपडेट करते रहें।