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खानपान की वजह से मां को कैंसर हुआ तो किसान ने जैविक खेती करने का लिया निर्णय, आज लाखों की कर रहा कमाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2022 02:22 AM IST
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If the mother got cancer due to food, the farmer decided to do organic farming, today earning millions
If the mother got cancer due to food, the farmer decided to do organic farming, today earning millions - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। खानपान की वजह से मां को कैंसर हुआ तो कैथल निवासी किसान ने जैविक खेती करने का प्रण किया। शरुआती दौर में इस कार्य के लिए उन्हें नुकसान हुआ लेकिन आज लाखों रुपये कमा रहे हैं।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में प्राकृतिक खेती पर आधारित कार्यशाला में स्टॉल लेकर पहुंचे कैथल जिले के गांव सिकंदरा खेड़ी निवासी राजेश ने विशेष बातचीत में बताया कि वर्ष 2004 में मां सुगनी देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। पीजीआई चंडीगढ़ में जांच कराने पर चिकित्सकों ने खानपान पर सवाल उठाते हुए कैंसर की पुष्टि की थी। तभी से जैविक खेती करने का प्रण लिया। वर्ष 2008 में उन्होंने अपनी तीन एकड़ जमीन में जैविक खेती करनी शुरू की। धीरे-धीरे गांव की 16 एकड़ भूमि ठेके पर लेकर आलू, प्याज, टमाटर, मटर, गाजर, नींबू, शकरकंद, गेहूं सहित अन्य कई प्रकार की जैविक खेती को विस्तार दिया और आज अमृत जैविक एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कंपनी चला रहे हैं। अब राजेश सिकंदरा खेड़ी के साथ करीब 150 किसान जुड़े हुए हैं। खास बात यह है कि जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे राजेश को वर्ष 2016 में हलवर ऑर्गेनिक नेशनल अवार्ड, वर्ष 2017 में जैविक रत्न अवार्ड, वर्ष 2018 में बेस्ट जैविक किसान अवार्ड, जोधपुर में किसान वैज्ञानिक की उपाधि सहित कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।
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राजेश सिकंदरा खेड़ी का कहना है कि देश और प्रदेश के सामने लोगों को जहर युक्त उत्पादों से छुटकारा दिलाने की एक सबसे बड़ी चुनौती है। इस समस्या को दूर करने के लिए किसानों को जैविक खेती अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती के जरिए शहद, गुड़-शक्कर, सरसों का तेल, सब्जियां और अन्य उत्पाद तैयार कर रहे हैं। साथ ही अमृत जैविक एफपीओ के साथ 650 किसानों को जोड़ने का प्रयास किया गया है। इन किसानों में 145 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाया है। इस खेती के लिए किसानों को सिर्फ मेहनत करनी होगी। इस मेहनत से किसानों को अच्छी आय के साथ-साथ समाज को जहर युक्त उत्पादों से मुक्ति दिलाने का एक अनोखा कार्य किया जाएगा।
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सत्यवान और मंजू पूनिया ने शुरू की जैविक खेती
पिछले कई सालों से आम आदमी अपनी सेहत को लेकर काफी चिंतित है। अपनी इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए रासायनिक छिड़काव से पैदावार की हुई फसल व सब्जियों खाने से परहेज करने लगे हैं। ऐसे में अब अन्नदाताओं की भी जिम्मेदारी बन गई है कि वह आमजन को रसायन मुक्त सब्जी व फसल उगाए। इसी सोच के साथ झज्जर के गांव सासौली निवासी दंपती सत्यवान ग्रेवाल और मंजू पूनिया पिछले सात वर्ष से ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, वे अपने ग्रेवाल फार्मिंग, ट्रेनिंग सेंटर व एग्रो टूरिज्म सेंटर का भ्रमण कराकर किसानों को जैविक खेती करने के बारे में जागरूक कर रहे हैं। मंजू पूनिया का कहना है कि वह वर्ष 2016 से (कृषि विभाग में एएससीओ) पति सत्यवान ग्रेवाल के साथ आलू, गोभी, शिमला मिर्च, मशरूम और सलाद पत्ता सहित बाजरे और मक्की सहित अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं। सत्यवान ग्रेवाल का कहना है कि वह साढ़े पांच एकड़ भूमि में जैविक खेती कर रहे हैं। एक सीजन में 70 से 80 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुनाफा कमा रहे हैं।
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