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प्रचार प्रसार के अभाव में दम तोड़ रहा कुरुक्षेत्र का पर्यटन

Tue, 27 Sep 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र Updated Tue, 27 Sep 2016 12:52 AM IST
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I died for lack of promotion of tourism Kurukshetra,on World Tourism Day
प्रचार प्रसार के अभाव में दम तोड़ रहा कुरुक्षेत्र का पर्यटन - फोटो : Amar Ujala
 जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे इरादे कई बार प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर जताए जा चुके हैं, लेकिन विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों के होने के बाद भी प्रचार प्रसार का अभाव कुरुक्षेत्र के पर्यटन का दम घोंट रहा है। अकेले शहर की ही बात करें तो यहां महाभारत के युद्ध से जुड़े कई स्थान हैं। इसके अलावा शेख चेहली का मकबरा, ब्रह्मसरोवर, पिपली में सरस्वती, केयू परिसर में बौद्ध स्तूप, ज्योतिसर में गीताज्ञान स्थल सहित ऐसे स्थान हैं जो विदेशी पर्यटकों को आसानी से अपनी ओर खंीच सकते हैं। हालांकि इनमें से कई स्थानों को लेकर शासन प्रशासन गंभीर भी है, लेकिन इसका व्यापक प्रसार प्रसार नहीं होने से यहां बाहरी पर्यटकों की आमद कम ही है।
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श्रीकृष्णा म्यूजियम के क्यूरेटर राजेंद्र राणा के मुताबिक धार्मिक पर्यटन के लिहाज से कुरुक्षेत्र देश विदेश में अपनी पहचान रखता है। यहां देश भर से श्रद्धालु आते भी हैं। लेकिन ऐतिहासिक पर्यटन को लेकर बाहरी पर्यटकों की कमी है।
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दो हजार वर्ष पुराना स्तूप हैं यहां  
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स विभाग के पास एक बौद्ध स्तूप है। बताया जाता है कि यह करीब दो हजार वर्ष पुराना है। लेकिन इसका प्रचार प्रसार कभी व्यापक स्तर पर नहीं हुआ। हालांकि अभी प्रशासन ने यहां कुछ काम जरूर कराया है। यदि इसका प्रचार प्रसार किया जाए तो यहां पर्यटकों को जुटाया जा सकता है। केयू के धरोहर म्यूजियम के क्यूरेटर डॉ. महासिंह पूनिया का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर में होने के कारण यह शोध के लिए भी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसका फायदा बौद्ध धर्म पर शोध करने वाले देश विदेश के शोधार्थी उठा सकते हैं। जिससे शैक्षणिक पर्यटन भी होगा और ऐतिहासिक भी।
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शेख चेहली का मकबरा
क्यूरेट राजेंद्र राणा के मुताबिक शेखचेहली का मकबरा करीब साढ़े तीन सौ साल पुराना है। यह ताजमहल निर्माण के समय के आसपास ही बना था। शहर में आने वाले लोग यहां भी आते हैं। लेकिन यहां मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी साफ तौर पर नजर आती है। पर्यटकों के लिए पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पीछे ऐतिहासिक मजार भी है। जहां जाने के लिए मकबरे से अब कोई रास्ता नहीं है। ऐसे में लोग दीवार से कूद कर उस तरफ जाते हैं। यहां पांच रुपये टिकट हैं। हर दिन करीब पांच सौ पर्यटक यहां आते हैं। इस लिहाज से मकबरे पर करीब-करीब ढ़ाई हजार रुपये की आमदनी हो जाती है।

सरस्वती नदी के निशान
सरकार ने सरस्वती उद्गम स्थल के लिए व्यापक योजना बनाई थी। कुरुक्षेत्र के पिपली के पास भी इस पवित्र नदी के बहने के निशान हैं। इस स्थान को भी पर्यटन के लिहाज से तैयार किया जा सकता है, फिलहाल यहां यक्ष की मूर्ति करीब सात माह पहले लगाई गई थी। यहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटा कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।


धार्मिक स्थलों का जरूरी है प्रचार प्रसार
कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं। यहां लोगों की भीड़ हर दिन उमड़ी है। इसी तरह बाहर से आने वाले लोग ज्योतिसर जरूर जाते हैं। जहां भगवान कृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया था। उस वट वृक्ष और वहां बने मंदिरों का ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार करने की जरूरत है। इसी तरह गांव अमीन में जहां अभिमन्यु को चक्रव्यूह में घेरा गया था, वहां भी पर्यटन के लिहाज से काम किया जाना जरूरी है।
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