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हुड्डा ने सिखों को गुमराह कियाः मक्कड़
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 22 Jul 2014 12:50 AM IST
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कुरुक्षेत्र। एसजीपीसी अमृतसर के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा कि हुड्डा सरकार की ओर से पास किया गया मनी बिल पूरी तरह से असंवैधानिक है और हुड्डा ने सिखों को गुमराह किया है ।
इस बारे में केंद्र के अटार्नी जनरल ने स्पष्ट कहा है कि एक्ट 1925 के अनुसार एसजीपीसी ही पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि गुरुद्वारा साहिबान का प्रबंध देख रही है। अटार्नी जनरल की राय के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से हरियाणा सरकार को लिखे पत्र में उन्होंने बिल को गलत बताया है। मक्कड़ सोमवार को कुरुक्षेत्र के हालात का जायजा लेने यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि हुड्डा सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कुछ सिखों को गुमराह करने के लिए यह मनी बिल पास किया है।
मक्कड़ ने कहा कि बिल के अनुसार हरियाणा के ऐतिहासिक गुरुद्वारों की जायदाद सरकार के अधीन हो जाएगी। सिख कौम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती। उन्होंने का कि एसजीपीसी गुरुद्वारा साहिबान की सेवा संभालने के साथ करीब 125 स्कूल एवं कालेज चला रही है। इसके अलावा शाहाबाद मारकंडा में करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से एसजीपीसी ने मीरी-पीरी मेडीकल कालेज स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि अगर हुड्डा सरकार सिखों की इतनी बड़ी हितैषी है तो आज तक इस मेडिकल कालेज को एनओसी क्यों नहीं दी।
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उन्होंने बताया कि 27 जुलाई को गुरुद्वारा मंजी साहिब अमृतसर में पंथक सम्मेलन बुलाया गया है। इसके बाद अगली रणनीति तय की जाएगी। मक्कड़ ने हरियाणा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रदेश के गुरुद्वारा साहिबान के प्रबंध में कोई दखलअंदाजी करने की कोशिश की गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
इस मौके पर एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क,विधायक दीदार सिंह भट्टी, जोगिंद्र सिंह अहरवां, अतिरिक्त सचिव दलजीत सिंह बेदी, प्रचार सचिव कुलविंद्र सिंह, गुरबचन सिंह करमूवाल, अतिरिक्त सचिव हरभजन सिंह मनावा, करनैल सिंह पंजौली, जसमेर सिंह लाछडू, सतविंद्र सिंह टोहड़ा, जरनैल सिंह करतारपुर, लाभ सिंह देवी नगर, निर्मल सिंह हरियाऊ, हरभजन सिंह मसाना,बीबी करतार कौर, बीबी अमरजीत कौर बीबी कुलदीप कौर टोहड़ा,बलदेव सिंह खालसा, जगसीर सिंह मांगेयाना, बीबी कुलदीप कौर, परमजीत सिंह सरोआ, सुखदेव सिंह भूराकोहना, फौजिंद्र सिंह मुखमैलपुर, जगजीत सिंह कौहली, नगर पार्षद जसविंद्र पाल सिंह चढा, तजिंद्रपाल सिंह, शरनजीत सिंह सौथा, सुखबीर सिंह मांडी, कंवलजीत सिंह अजराना, नगर पार्षद सुखबीर सिंह अबलोवाल के अलावा सिख संगत मौजूद रही।
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इस बारे में केंद्र के अटार्नी जनरल ने स्पष्ट कहा है कि एक्ट 1925 के अनुसार एसजीपीसी ही पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि गुरुद्वारा साहिबान का प्रबंध देख रही है। अटार्नी जनरल की राय के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से हरियाणा सरकार को लिखे पत्र में उन्होंने बिल को गलत बताया है। मक्कड़ सोमवार को कुरुक्षेत्र के हालात का जायजा लेने यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि हुड्डा सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कुछ सिखों को गुमराह करने के लिए यह मनी बिल पास किया है।
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मक्कड़ ने कहा कि बिल के अनुसार हरियाणा के ऐतिहासिक गुरुद्वारों की जायदाद सरकार के अधीन हो जाएगी। सिख कौम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती। उन्होंने का कि एसजीपीसी गुरुद्वारा साहिबान की सेवा संभालने के साथ करीब 125 स्कूल एवं कालेज चला रही है। इसके अलावा शाहाबाद मारकंडा में करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से एसजीपीसी ने मीरी-पीरी मेडीकल कालेज स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि अगर हुड्डा सरकार सिखों की इतनी बड़ी हितैषी है तो आज तक इस मेडिकल कालेज को एनओसी क्यों नहीं दी।
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उन्होंने बताया कि 27 जुलाई को गुरुद्वारा मंजी साहिब अमृतसर में पंथक सम्मेलन बुलाया गया है। इसके बाद अगली रणनीति तय की जाएगी। मक्कड़ ने हरियाणा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रदेश के गुरुद्वारा साहिबान के प्रबंध में कोई दखलअंदाजी करने की कोशिश की गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
इस मौके पर एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क,विधायक दीदार सिंह भट्टी, जोगिंद्र सिंह अहरवां, अतिरिक्त सचिव दलजीत सिंह बेदी, प्रचार सचिव कुलविंद्र सिंह, गुरबचन सिंह करमूवाल, अतिरिक्त सचिव हरभजन सिंह मनावा, करनैल सिंह पंजौली, जसमेर सिंह लाछडू, सतविंद्र सिंह टोहड़ा, जरनैल सिंह करतारपुर, लाभ सिंह देवी नगर, निर्मल सिंह हरियाऊ, हरभजन सिंह मसाना,बीबी करतार कौर, बीबी अमरजीत कौर बीबी कुलदीप कौर टोहड़ा,बलदेव सिंह खालसा, जगसीर सिंह मांगेयाना, बीबी कुलदीप कौर, परमजीत सिंह सरोआ, सुखदेव सिंह भूराकोहना, फौजिंद्र सिंह मुखमैलपुर, जगजीत सिंह कौहली, नगर पार्षद जसविंद्र पाल सिंह चढा, तजिंद्रपाल सिंह, शरनजीत सिंह सौथा, सुखबीर सिंह मांडी, कंवलजीत सिंह अजराना, नगर पार्षद सुखबीर सिंह अबलोवाल के अलावा सिख संगत मौजूद रही।