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हिंदी भारत की आत्मा, उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य
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कनुप्रिया।
- फोटो : Kurukshetra
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अपनी स्वयं की भाषा का स्तर और उसे उसका उच्च स्थान वापस दिलाना हमारा कर्त्तव्य है चलो उसे निभाएं। राष्ट्रभाषा का सम्मान करें और अन्य सभी को भी इसके लिए प्रेरित करें। इसी कड़ी में हिंदी हैं हम अमर उजाला के इस अभियान में हिंदी प्रेमियों ने अपनी ये प्रतिक्रिया दी है। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी भारत की आत्मा है और उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है
किसी भी राष्ट्र निर्माण में उसकी मातृ भाषा का होता है महत्वपूर्ण योगदान: संजीव
हिंदी प्रेमी संजीव भांवरा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण और विकास में अति महत्वपूर्ण योगदान उसकी मातृभाषा का होता है, क्योंकि बच्चे को मां के गर्भ से ही मातृ भाषा के संस्कार प्राप्त होते है। भारत में हिंदी भाषा को मातृ भाषा का दर्जा दिया गया है, लेकिन आजादी के बाद से आज तक हिंदी भाषा को वह उचित स्थान प्राप्त नहीं हुआ है, जिसकी वह अधिकारिणी है। यदि हम चाहते है कि संसद में समूचे राष्ट्र की भावनाएं व्यक्त हो और हमारा लोकतंत्र गूंगा न रहे तो हमें अंग्रेजी हटाओ, स्वदेशी भाषा हिंदी अपनाओ का नारा लोगों तक पहुंचाना होगा। हिंदी भारत की आत्मा है और उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
मातृभाषा का सम्मान बेहद जरूरी: रामेश्वर
हिंदी प्रेमी रामेश्वर सैनी ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसका सम्मान बेहद जरूरी है। सम्मान करें और दूसरों को भी सिखाएं अपना पक्ष मजबूत रखें, समझाएं, एक दिन नहीं बल्कि हर दिन और हमेशा हिंदी का सम्मान करें। वैसे सभी लोग ऐसे नहीं हैं कि जो अपनी मातृभाषा हिंदी बोलने-पढ़ने के प्रति हीनता महसूस करते हों। हिंदी भाषा पर गर्व करने वाले भी बहुत हैं।
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अपनी संस्कृति से जोड़कर रखती है हिंदी: कनुप्रिया
छात्रा कनुप्राॉया ने कहा कि मातृभाषा से ही हम संस्कार एवं व्यवहार सीखते हैं एवं अपनी संस्कृति से जुड़कर अपनी धरोहर आगे बढ़ाते हैं। कहा कि यह हमारे लिए दूर्भाग्यपूर्ण है कि नई पीढ़ी हिंदी में गिनती तक भूल चुके हैं। आज की युवा पीढ़ी का हिंदी से जुड़ाव कम होता जा रहा। हिंदी से युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए हिंदी को अपने गौरव से जोड़ने की आवश्यकता है।
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किसी भी राष्ट्र निर्माण में उसकी मातृ भाषा का होता है महत्वपूर्ण योगदान: संजीव
हिंदी प्रेमी संजीव भांवरा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण और विकास में अति महत्वपूर्ण योगदान उसकी मातृभाषा का होता है, क्योंकि बच्चे को मां के गर्भ से ही मातृ भाषा के संस्कार प्राप्त होते है। भारत में हिंदी भाषा को मातृ भाषा का दर्जा दिया गया है, लेकिन आजादी के बाद से आज तक हिंदी भाषा को वह उचित स्थान प्राप्त नहीं हुआ है, जिसकी वह अधिकारिणी है। यदि हम चाहते है कि संसद में समूचे राष्ट्र की भावनाएं व्यक्त हो और हमारा लोकतंत्र गूंगा न रहे तो हमें अंग्रेजी हटाओ, स्वदेशी भाषा हिंदी अपनाओ का नारा लोगों तक पहुंचाना होगा। हिंदी भारत की आत्मा है और उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
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मातृभाषा का सम्मान बेहद जरूरी: रामेश्वर
हिंदी प्रेमी रामेश्वर सैनी ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसका सम्मान बेहद जरूरी है। सम्मान करें और दूसरों को भी सिखाएं अपना पक्ष मजबूत रखें, समझाएं, एक दिन नहीं बल्कि हर दिन और हमेशा हिंदी का सम्मान करें। वैसे सभी लोग ऐसे नहीं हैं कि जो अपनी मातृभाषा हिंदी बोलने-पढ़ने के प्रति हीनता महसूस करते हों। हिंदी भाषा पर गर्व करने वाले भी बहुत हैं।
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अपनी संस्कृति से जोड़कर रखती है हिंदी: कनुप्रिया
छात्रा कनुप्राॉया ने कहा कि मातृभाषा से ही हम संस्कार एवं व्यवहार सीखते हैं एवं अपनी संस्कृति से जुड़कर अपनी धरोहर आगे बढ़ाते हैं। कहा कि यह हमारे लिए दूर्भाग्यपूर्ण है कि नई पीढ़ी हिंदी में गिनती तक भूल चुके हैं। आज की युवा पीढ़ी का हिंदी से जुड़ाव कम होता जा रहा। हिंदी से युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए हिंदी को अपने गौरव से जोड़ने की आवश्यकता है।

रामेश्वर सैनी।- फोटो : Kurukshetra

संजीव भांवरा।- फोटो : Kurukshetra