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स्वास्थ्य : 47 हजार की जांच में 60 फीसदी लोग मिले एनीमिया के शिकार
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कुरुक्षेत्र। अनीमिया का रिकॉर्ड दर्ज करती स्वास्थ्य कर्मी।
कुरुक्षेत्र। एनीमिया से निपटने के लिए चल रहे अभियान को एक महीना से ज्यादा बीत चुका है। गत माह 11 जून से चले इस अभियान के तहत विभाग 10 जुलाई तक छह वर्ग के 47 हजार 84 लोगों की जांच कर चुका है, जिसमें 60 फीसदी से ज्यादा 28654 लोग किसी न किसी स्तर पर एनीमिया से ग्रस्त पाए गए। हालांकि 18,430 लोग जांच में स्वस्थ मिले, जबकि एनीमिया से ग्रस्त लोगों को उपचार दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि विभाग की ओर से 100 दिन यह अभियान चलाया जाएगा। सितंबर तक चलने वाले अभियान के तहत जिले में कुल 4161 शिविर लगाए जाएंगे। विभाग की ओर से यह शिविर सरकारी अस्पताल और पीएचसी में शिविर लगाए गए हैं, जिसमें अस्पताल में आने वाले छह से 59 माह, पांच से 10 साल, 10 से 19 साल, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली और डब्ल्यूआरए (20 से 49 साल की महिलाएं) के छह वर्ग को शामिल कर उनकी जांच की जा रही है।
इस एक महीने के दौरान विभाग छह से 59 माह के 8017 बच्चे, पांच से नौ साल तक के 6781 बच्चे, 10 से 19 साल तक 7885 किशोर, डब्ल्यूआरए 11,344, गर्भवती 2258, स्तनपान कराने वालीं 891 समेत अन्य 9908 की जांच की गई। इसमें सिर्फ 18430 लोगों में एनीमिया नहीं पाया गया, जबकि माइल्ड (सात से 11 ग्राम रक्त वाले) 8792 लोग एनीमिया से ग्रस्त मिले। इसके अलावा माॅडरेट (सात से नौ ग्राम रक्त वाले) का आंकड़ा चौकाने वाला है। इसमें सबसे ज्यादा 18,637 लोग शामिल है, जिनको उपचार दिया जा रहा है।
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1225 लोग मिले गंभीर
जांच के दौरान 1225 लोग गंभीर एनीमिया का शिकार मिले, जिन्हें उपचार के लिए एलएनजेपी अस्पताल रेफर किया गया। इन लोगों को आयरन सुक्रोज की डोज लगाई गई ताकि वे जल्दी रिकवर कर सके। इसके अलावा 67 फ्रंटलाइन वर्कर्स की भी जांच की गई।
फोर-टी से किया जा रहा एनीमिया पर प्रहार : डॉ. नागर
जिला नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप नागर ने बताया कि एनीमिया से निपटने के लिए फोर-टी टेस्ट, ट्रीट, टाॅक और ट्रैक (जांच, इलाज, जागरूकता, और निगरानी) से प्रहार किया जा रहा है। पहले इसमें केवल टेस्ट, ट्रीट व टाॅक ही शामिल था, मगर अब चौथे टी यानी ट्रैक को जोड़ा गया है। फोर-टी में पहले लोगों की जांच, दूसरे में इलाज, तीसरे में जागरूकता और अंत में निगरानी की जा रही है। इसमें एनीमिया से ग्रस्त लोगों को एक महीने की दवा और रेफर कर उपचार दिया जा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि विभाग की ओर से 100 दिन यह अभियान चलाया जाएगा। सितंबर तक चलने वाले अभियान के तहत जिले में कुल 4161 शिविर लगाए जाएंगे। विभाग की ओर से यह शिविर सरकारी अस्पताल और पीएचसी में शिविर लगाए गए हैं, जिसमें अस्पताल में आने वाले छह से 59 माह, पांच से 10 साल, 10 से 19 साल, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली और डब्ल्यूआरए (20 से 49 साल की महिलाएं) के छह वर्ग को शामिल कर उनकी जांच की जा रही है।
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इस एक महीने के दौरान विभाग छह से 59 माह के 8017 बच्चे, पांच से नौ साल तक के 6781 बच्चे, 10 से 19 साल तक 7885 किशोर, डब्ल्यूआरए 11,344, गर्भवती 2258, स्तनपान कराने वालीं 891 समेत अन्य 9908 की जांच की गई। इसमें सिर्फ 18430 लोगों में एनीमिया नहीं पाया गया, जबकि माइल्ड (सात से 11 ग्राम रक्त वाले) 8792 लोग एनीमिया से ग्रस्त मिले। इसके अलावा माॅडरेट (सात से नौ ग्राम रक्त वाले) का आंकड़ा चौकाने वाला है। इसमें सबसे ज्यादा 18,637 लोग शामिल है, जिनको उपचार दिया जा रहा है।
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1225 लोग मिले गंभीर
जांच के दौरान 1225 लोग गंभीर एनीमिया का शिकार मिले, जिन्हें उपचार के लिए एलएनजेपी अस्पताल रेफर किया गया। इन लोगों को आयरन सुक्रोज की डोज लगाई गई ताकि वे जल्दी रिकवर कर सके। इसके अलावा 67 फ्रंटलाइन वर्कर्स की भी जांच की गई।
फोर-टी से किया जा रहा एनीमिया पर प्रहार : डॉ. नागर
जिला नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप नागर ने बताया कि एनीमिया से निपटने के लिए फोर-टी टेस्ट, ट्रीट, टाॅक और ट्रैक (जांच, इलाज, जागरूकता, और निगरानी) से प्रहार किया जा रहा है। पहले इसमें केवल टेस्ट, ट्रीट व टाॅक ही शामिल था, मगर अब चौथे टी यानी ट्रैक को जोड़ा गया है। फोर-टी में पहले लोगों की जांच, दूसरे में इलाज, तीसरे में जागरूकता और अंत में निगरानी की जा रही है। इसमें एनीमिया से ग्रस्त लोगों को एक महीने की दवा और रेफर कर उपचार दिया जा रहा है।

कुरुक्षेत्र। अनीमिया का रिकॉर्ड दर्ज करती स्वास्थ्य कर्मी।