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वैश्विक महामारी के बीच किन गतिविधियों को अंजाम देगा हरियाणा कला परिषद
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राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद सवालों के घेरे में इसलिये हैं, क्योंकि वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से प्रदेश में सामूहिक और सांस्कृतिक गतिविधियों विराम रहेगा, मगर भारी भरकम खर्च चलते रहेंगे। दरअसल प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये हरियाणा कला परिषद के महज छह गैर सरकारी पदाधिकारियों के वेतन, गाड़ी, आवास इत्यादि पर सालाना करीब एक करोड़ से ज्यादा का बजट खर्च होता है। हालांकि सरकार भी सावधानी के साथ कई तरह के खर्चों में कटौती कर रही है। बावजूद इसके कला परिषद के उपाध्यक्ष संजय भसीन व क्षेत्रीय निदेशक हरियाणा सरकार के आदेशों की अवमानना कर रहे हैं। यह आरोप है हरियाणा कला परिषद कुरुक्षेत्र मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर के पूर्व निदेशक, प्रभारी एवं प्रख्यात रंगकर्मी विश्वदीपक त्रिखा के। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने मई माह में निर्णय लेने के बाद फरमान जारी किया था कि प्रदेश में जिन बोर्डो, निगमों, सहकारी संस्थाएं, प्राधिकरण, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के गैर सरकारी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति का कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन अभी तक अपना प्रभार नहीं छोड़ा है। उन्हें तुरंत प्रभाव से पदभार मुक्त माना जाएगा। ऐसे मामलों में उनकी नियुक्ति अवधि 30 अप्रैल 2020 तक बढ़ी हुई मानी जाएगी। त्रिखा के मुताबिक इस फरमान के बावजूद अभी भी कई ऐसे गैर सरकारी पदाधिकारी अपने पदों पर ना केवल जमे हुए हैं, बल्कि सरकारी सुविधाओं, दफ्तरों और गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा सांस्कृतिक विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल को उन्होंने बकायदा हरियाणा कला परिषद विभाग के उपाध्यक्ष संजय भसीन की शिकायत भेजी है। भसीन कुरुक्षेत्र स्थित मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर स्थित कला परिषद के कार्यालय में बैठते हैं।
मेरा कार्यकाल कब खत्म होगा इसकी जानकारी नहीं है : भसीन
त्रिखा ने बताया कि भसीन का कार्यकाल एक साल का था, जो कि समाप्त हो चुका है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हरियाणा कला परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि भसीन परिषद के उपाध्यक्ष हैं। इस बारे अमर उजाला ने जब संजय भसीन से जब इस बारे जानकारी ली और उनसे पूछा कि कार्यकाल कब पूरा तक होगा? इस सवाल के उत्तर में उन्होंने बताया कि मुझे इसकी जानकारी उन्हें नहीं है, क्योंकि वह काफी समय से चंडीगढ़ स्थित संबधित कार्यालय में नहीं गये।
इन सात पदों पर परिषद का भारी भरकम बजट
सीएम अध्यक्ष, गैर सरकारी उपाध्यक्ष के पद पर संजय भसीन, उनके बाद निदेशक अनिल कौशिक थे, जिनका सेवाकाल छह माह पहले समाप्त हो चुका है। निदेशक पद से नीचे पांच क्षेत्रीय निदेशक थे। इन पांच में से हिसार मंडल की क्षेत्रीय निदेशक सोनाली फौगाट विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने के कारण इस पद से इस्तीफा दे चुकीं हैं। तब से यह भी पद खाली है। इनके अलावा अंबाला मंडल के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा, रोहतक मंडल के क्षेत्रीय निदेशक गजेंद्र फौगाट और गुरुग्राम मंडल के क्षेत्रीय निदेशक महेश जोशी हैं।
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सिर्फ दो पद ही नहीं, सभी गतिविधियां भी खटाई में
निदेशक के रुप में अनिल कौशिक और क्षेत्रीय निदेशक सोनाली फौगाट के रिक्त पदों पर नये चेहरों की पिछले महीनों में तलाश थी, लेकिन कोरोना संकट की वजह से यह कार्रवाई भी रुक गई। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद इन दोनों पदों के लिये कई नाम सरकार तक भेजे गये, लेकिन जहां ये चयन टलता गया। वहीं रीजनल डायरेक्टरों को भी एक्सटेंशन नहीं मिली। आखिरकार कोरोनाकाल में उक्त दोनों के अलावा अन्य पदों की एक्सटेंशन ही नहीं, बल्कि पूरे कला परिषद की गतिविधियां खटाई में जा चुकी हैं।
एसीएस को भेजे पत्र में यह लगाए आरोप
आईएएस धीरा खंडेलवाल को भेजी गई चिट्ठी में स्पष्ट किया गया है कि सरकार के आदेशों के बाद जहां अधिकांश बोर्ड, निगम इत्यादि के गैर सरकारी पदाधिकारी अपना त्यागपत्र दे चुके हैं। वहीं हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष अपने पद का दुरुपयोग करते हुए व्यक्तिगत कार्यों के लिये सरकारी गाड़ी, दफ्तर का प्रयोग कर रहे हैं। बता दें कि भसीन ने 11 मई 2020 को कुरुक्षेत्र स्थित अपने कार्यालय से एक लिखित आदेश भी जारी किया है।
11 मई को भसीन ने जारी किये ये आदेश
पत्रक्रमांक-2020-1042 के अनुसार भसीन द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए तथा प्रदेश सरकार द्वारा दिये गये निर्देशानुसार हरियाणा कला परिषद के कर्मचारियों की 33 प्रतिशत उपस्थिति के तहत ड्यूटी लगाई जाती है। अत: कला परिषद के समस्त कर्मचारी निम्न अनुसार आफिस में अपनी हाजिरी दर्ज कराएंगे। त्रिखा का आरोप है कि बगैर पद पर होते हुए कोई व्यक्ति ऐसे आदेश कैसे जारी कर सकता है। वहीं भसीन का कहना है कि वह इस पद पर अभी भी हैं, पर उनका कार्यकाल कबतक है, ये उन्हें नहीं पता।
गरीब की पेट पर लात, रसूख वालों को राहत
वैश्विक महामारी कोरानाकाल में भी आर्थिक रुप से कमजोर डीसी रेट पर सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में कार्यरत कर्मियों को नौकरियों से हटाकर जहां उनके पेट पर लात मारी जा रही है। वहीं चंद रसूख वालों को राहत देने के लिये भारीभरकम खर्च करने के आरोप लगाये जा रहे हैं। बताया गया है कि कला परिषद में भले पिछले कुछ माह से दो गैर सरकारी पद रिक्त हों, मगर चौकाने वाली बात ये है कि बगैर गतिविधियों के इन हालात में भी चार गैर सरकारी पदाधिकारियों के वेतन, कोठी, गाड़ी पर करीब एक करोड़ सालाना खर्च होगा।
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद सवालों के घेरे में इसलिये हैं, क्योंकि वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से प्रदेश में सामूहिक और सांस्कृतिक गतिविधियों विराम रहेगा, मगर भारी भरकम खर्च चलते रहेंगे। दरअसल प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये हरियाणा कला परिषद के महज छह गैर सरकारी पदाधिकारियों के वेतन, गाड़ी, आवास इत्यादि पर सालाना करीब एक करोड़ से ज्यादा का बजट खर्च होता है। हालांकि सरकार भी सावधानी के साथ कई तरह के खर्चों में कटौती कर रही है। बावजूद इसके कला परिषद के उपाध्यक्ष संजय भसीन व क्षेत्रीय निदेशक हरियाणा सरकार के आदेशों की अवमानना कर रहे हैं। यह आरोप है हरियाणा कला परिषद कुरुक्षेत्र मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर के पूर्व निदेशक, प्रभारी एवं प्रख्यात रंगकर्मी विश्वदीपक त्रिखा के। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने मई माह में निर्णय लेने के बाद फरमान जारी किया था कि प्रदेश में जिन बोर्डो, निगमों, सहकारी संस्थाएं, प्राधिकरण, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के गैर सरकारी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति का कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन अभी तक अपना प्रभार नहीं छोड़ा है। उन्हें तुरंत प्रभाव से पदभार मुक्त माना जाएगा। ऐसे मामलों में उनकी नियुक्ति अवधि 30 अप्रैल 2020 तक बढ़ी हुई मानी जाएगी। त्रिखा के मुताबिक इस फरमान के बावजूद अभी भी कई ऐसे गैर सरकारी पदाधिकारी अपने पदों पर ना केवल जमे हुए हैं, बल्कि सरकारी सुविधाओं, दफ्तरों और गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा सांस्कृतिक विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल को उन्होंने बकायदा हरियाणा कला परिषद विभाग के उपाध्यक्ष संजय भसीन की शिकायत भेजी है। भसीन कुरुक्षेत्र स्थित मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर स्थित कला परिषद के कार्यालय में बैठते हैं।
मेरा कार्यकाल कब खत्म होगा इसकी जानकारी नहीं है : भसीन
त्रिखा ने बताया कि भसीन का कार्यकाल एक साल का था, जो कि समाप्त हो चुका है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हरियाणा कला परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि भसीन परिषद के उपाध्यक्ष हैं। इस बारे अमर उजाला ने जब संजय भसीन से जब इस बारे जानकारी ली और उनसे पूछा कि कार्यकाल कब पूरा तक होगा? इस सवाल के उत्तर में उन्होंने बताया कि मुझे इसकी जानकारी उन्हें नहीं है, क्योंकि वह काफी समय से चंडीगढ़ स्थित संबधित कार्यालय में नहीं गये।
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इन सात पदों पर परिषद का भारी भरकम बजट
सीएम अध्यक्ष, गैर सरकारी उपाध्यक्ष के पद पर संजय भसीन, उनके बाद निदेशक अनिल कौशिक थे, जिनका सेवाकाल छह माह पहले समाप्त हो चुका है। निदेशक पद से नीचे पांच क्षेत्रीय निदेशक थे। इन पांच में से हिसार मंडल की क्षेत्रीय निदेशक सोनाली फौगाट विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने के कारण इस पद से इस्तीफा दे चुकीं हैं। तब से यह भी पद खाली है। इनके अलावा अंबाला मंडल के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा, रोहतक मंडल के क्षेत्रीय निदेशक गजेंद्र फौगाट और गुरुग्राम मंडल के क्षेत्रीय निदेशक महेश जोशी हैं।
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सिर्फ दो पद ही नहीं, सभी गतिविधियां भी खटाई में
निदेशक के रुप में अनिल कौशिक और क्षेत्रीय निदेशक सोनाली फौगाट के रिक्त पदों पर नये चेहरों की पिछले महीनों में तलाश थी, लेकिन कोरोना संकट की वजह से यह कार्रवाई भी रुक गई। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद इन दोनों पदों के लिये कई नाम सरकार तक भेजे गये, लेकिन जहां ये चयन टलता गया। वहीं रीजनल डायरेक्टरों को भी एक्सटेंशन नहीं मिली। आखिरकार कोरोनाकाल में उक्त दोनों के अलावा अन्य पदों की एक्सटेंशन ही नहीं, बल्कि पूरे कला परिषद की गतिविधियां खटाई में जा चुकी हैं।
एसीएस को भेजे पत्र में यह लगाए आरोप
आईएएस धीरा खंडेलवाल को भेजी गई चिट्ठी में स्पष्ट किया गया है कि सरकार के आदेशों के बाद जहां अधिकांश बोर्ड, निगम इत्यादि के गैर सरकारी पदाधिकारी अपना त्यागपत्र दे चुके हैं। वहीं हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष अपने पद का दुरुपयोग करते हुए व्यक्तिगत कार्यों के लिये सरकारी गाड़ी, दफ्तर का प्रयोग कर रहे हैं। बता दें कि भसीन ने 11 मई 2020 को कुरुक्षेत्र स्थित अपने कार्यालय से एक लिखित आदेश भी जारी किया है।
11 मई को भसीन ने जारी किये ये आदेश
पत्रक्रमांक-2020-1042 के अनुसार भसीन द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए तथा प्रदेश सरकार द्वारा दिये गये निर्देशानुसार हरियाणा कला परिषद के कर्मचारियों की 33 प्रतिशत उपस्थिति के तहत ड्यूटी लगाई जाती है। अत: कला परिषद के समस्त कर्मचारी निम्न अनुसार आफिस में अपनी हाजिरी दर्ज कराएंगे। त्रिखा का आरोप है कि बगैर पद पर होते हुए कोई व्यक्ति ऐसे आदेश कैसे जारी कर सकता है। वहीं भसीन का कहना है कि वह इस पद पर अभी भी हैं, पर उनका कार्यकाल कबतक है, ये उन्हें नहीं पता।
गरीब की पेट पर लात, रसूख वालों को राहत
वैश्विक महामारी कोरानाकाल में भी आर्थिक रुप से कमजोर डीसी रेट पर सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में कार्यरत कर्मियों को नौकरियों से हटाकर जहां उनके पेट पर लात मारी जा रही है। वहीं चंद रसूख वालों को राहत देने के लिये भारीभरकम खर्च करने के आरोप लगाये जा रहे हैं। बताया गया है कि कला परिषद में भले पिछले कुछ माह से दो गैर सरकारी पद रिक्त हों, मगर चौकाने वाली बात ये है कि बगैर गतिविधियों के इन हालात में भी चार गैर सरकारी पदाधिकारियों के वेतन, कोठी, गाड़ी पर करीब एक करोड़ सालाना खर्च होगा।