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Kurukshetra News: तकनीक जैव-चिकित्सा, रक्षा, एयरोस्पेस के क्षेत्र में क्रांति लाएगी एचएएएमईसीएम तकनीक
Sun, 24 Aug 2025 03:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 24 Aug 2025 03:16 AM IST
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कुरुक्षेत्र। विकसित की गई तकनीक। स्वयं
राजरानी
कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र ने सूक्ष्म मशीनिंग तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में तीन शोधार्थियों ने हाइब्रिड अब्रेसिव असिस्टेड माइक्रो इलेक्ट्रोकेमिकल मशीनिंग (एचएएएमईसीएम) तकनीक को तीन साल में विकसित किया है।
इस तकनीक में वर्कपीस को एनोड और टूल को कैथोड बनाकर इलेक्ट्रोलाइट के माध्यम से कम वोल्टेज पर सामग्री को हटाया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह गैर-संपर्क आधारित होती है, जिससे वर्कपीस को नुकसान नहीं होता। साथ ही एब्रेसिव कण सतह से निष्क्रिय परत को हटाकर उसे स्मूथ फिनिश प्रदान करते हैं। यह संयोग पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक, सुरक्षित और कुशल माना जाता है। डॉ. रवि प्रताप ने बताया कि यह तकनीक जैव-चिकित्सा, इलेक्ट्रॉनिक, रक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च परिशुद्धता एवं जटिल संरचनाओं के निर्माण में बदलाव ला सकती है। यह तकनीक सूक्ष्म स्तर पर बर्र-रहित, उच्च गुणवत्ता और जटिल संरचनाओं के निर्माण में सक्षम है। एचएएएमईसीएम तकनीक में माइक्रो इलेक्ट्रोकेमिकल मशीनिंग और एब्रेसिव फिनिशिंग तकनीक को संयोजित किया गया है।
इसमें कम वोल्टेज पर विद्युत अपघटन द्वारा सामग्री हटाई जाती है, जबकि एब्रेसिव कण वर्कपीस की निष्क्रिय परत को हटाकर उत्कृष्ट फिनिशिंग प्रदान करते हैं।
यह संयोजन माइक्रो-नीडल्स, स्टेंट्स, सर्जिकल उपकरण, माइक्रो-कनेक्टर्स, सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स जैसे उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खास बात यह है कि तकनीक का गैर-संपर्क और गैर-थर्मल स्वरूप टूल की लाइफ को बढ़ाता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और उत्पादकता बढ़ती है। एचएएएमईसीएम तकनीक का इन-हाउस अत्याधुनिक सेटअप विकसित किया गया। उन्होंने परियोजना के पूरा होने पर विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) का भी इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता के लिए, एनआईटी जालंधर का सह-कार्यान्वयन और एनआईटी प्रशासन का आभार जताया। संवाद
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र ने सूक्ष्म मशीनिंग तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में तीन शोधार्थियों ने हाइब्रिड अब्रेसिव असिस्टेड माइक्रो इलेक्ट्रोकेमिकल मशीनिंग (एचएएएमईसीएम) तकनीक को तीन साल में विकसित किया है।
इस तकनीक में वर्कपीस को एनोड और टूल को कैथोड बनाकर इलेक्ट्रोलाइट के माध्यम से कम वोल्टेज पर सामग्री को हटाया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह गैर-संपर्क आधारित होती है, जिससे वर्कपीस को नुकसान नहीं होता। साथ ही एब्रेसिव कण सतह से निष्क्रिय परत को हटाकर उसे स्मूथ फिनिश प्रदान करते हैं। यह संयोग पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक, सुरक्षित और कुशल माना जाता है। डॉ. रवि प्रताप ने बताया कि यह तकनीक जैव-चिकित्सा, इलेक्ट्रॉनिक, रक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च परिशुद्धता एवं जटिल संरचनाओं के निर्माण में बदलाव ला सकती है। यह तकनीक सूक्ष्म स्तर पर बर्र-रहित, उच्च गुणवत्ता और जटिल संरचनाओं के निर्माण में सक्षम है। एचएएएमईसीएम तकनीक में माइक्रो इलेक्ट्रोकेमिकल मशीनिंग और एब्रेसिव फिनिशिंग तकनीक को संयोजित किया गया है।
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इसमें कम वोल्टेज पर विद्युत अपघटन द्वारा सामग्री हटाई जाती है, जबकि एब्रेसिव कण वर्कपीस की निष्क्रिय परत को हटाकर उत्कृष्ट फिनिशिंग प्रदान करते हैं।
यह संयोजन माइक्रो-नीडल्स, स्टेंट्स, सर्जिकल उपकरण, माइक्रो-कनेक्टर्स, सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स जैसे उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खास बात यह है कि तकनीक का गैर-संपर्क और गैर-थर्मल स्वरूप टूल की लाइफ को बढ़ाता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और उत्पादकता बढ़ती है। एचएएएमईसीएम तकनीक का इन-हाउस अत्याधुनिक सेटअप विकसित किया गया। उन्होंने परियोजना के पूरा होने पर विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) का भी इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता के लिए, एनआईटी जालंधर का सह-कार्यान्वयन और एनआईटी प्रशासन का आभार जताया। संवाद

कुरुक्षेत्र। विकसित की गई तकनीक। स्वयं
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