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जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: ध्रुवं जन्म मृतस्य च...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 01:51 AM IST
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Gulzari Lal Nanda has an important place in the development of Kurukshetra: Gyananand
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के निर्माण और विकास में भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. गुलजारी लाल नंदा का महत्वपूर्ण योगदान है। इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इन युवा पीढ़ी को उनके जीवन से शिक्षा और संस्कार मिलते हैं। इनका अनुसरण कर वे देश और प्रदेश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं। ये विचार गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने शनिवार को भारत रत्न स्व. गुलजारी लाल नंदा की पुण्यतिथि पर व्यक्त किए। वे ब्रह्मसरोवर स्थित सदाचार स्थल पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने सांसद और विधायक के साथ भारत रत्न स्व. गुलजारी लाल नंदा की समाधि पर उन्हें पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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उन्होंने ‘जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: ध्रुवं जन्म मृतस्य च’ श्लोक का उच्चारण करते हुए कहा कि जो इस संसार में आया है उसका जाना भी निश्चित है। अत: मनुष्य को सब कुछ अपना कर्म समझकर ही करना चाहिए। इस दौरान केयू के संगीत एवं नृत्य विभाग की टीम ने डॉ. आरती श्योकंद के नेतृत्व में भजन प्रस्तुत किए। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि भारत रत्न स्व. नंदा जी के मार्ग पर चलकर कुरुक्षेत्र के विकास में योगदान देना ही सही मायनों में सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि नंदा जी के दिखाए हुए मार्ग पर चलकर कुरुक्षेत्र के पर्यटन और तीर्थ स्थलों को विकसित करना चाहिए। सांसद सैनी ने कहा कि सदाचार स्थल पर नंदा जी के विचारों पर चिंतन करने का काम किया जा रहा है। विधायक सुधा ने कहा कि नंदाजी के पद चिन्हों पर चलते हुए अब अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल कुरुक्षेत्र और 48 कोस के तीर्थों को विकसित करने का काम कर रहे हैं।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के निर्माण और विकास में भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. गुलजारी लाल नंदा का सबसे ज्यादा योगदान रहा। आज हमें नंदा जी के आदर्शों को अपने आचरण में अपनाने की जरूरत है। यदि हम अपने जीवन में सदाचार अपनाकर आगे बढ़े तो हमें निश्चित की सफलता मिलेगी।
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केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि गीता स्थली ज्योतिसर 100 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है और यहां पर आधुनिक तकनीकी से युवाओं को महाभारत और पवित्र ग्रंथ गीता से आत्मसात कराया जाएगा। इतना ही नहीं इस भूमि पर अक्षरधाम, गीता केंद्र, श्री तिरुपति बालाजी मंदिर और इस्कॉन मंदिर के निर्माण होने से कुरुक्षेत्र को विश्व में एक नई पहचान मिलेगी। इस मौके पर उपायुक्त मुकुल कुमार, कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, केडीबी मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, सीईओ केडीबी अनुभव मेहता, नंदा सदाचार स्थल के इंचार्ज प्रो. एलके गौड़, केडीबी सदस्य डॉ. सौरभ चौधरी, विजय नरुला, केसी रंगा, डीवाईसीए के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया, सुरेश सैनी, रतनलाल बंसल, खरैती लाल सिंगला मौजूद रहे।
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