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Kurukshetra News: नियमितीकरण और एरियर की मांग पर गेस्ट टीचरों का धरना दूसरे दिन भी जारी
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कुरुक्षेत्र। अतिथि अध्यापकों को नियमित करने की मांग को लेकर लघु सचिवालय के बाहर चल रहा अनिश्चितकालीन पड़ाव दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेशभर से पहुंचे गेस्ट टीचरों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए 28 मई 2014 से नियमितीकरण, 6 प्रतिशत ब्याज सहित एरियर और अन्य सेवा लाभ देने की मांग उठाई।
धरने को संबोधित करते हुए राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ की महिला विंग की राज्य प्रधान पूनम कुमारी ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद अब सरकार को अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण में कोई देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी पात्र गेस्ट टीचरों को 28 मई 2014 से नियमित मानते हुए बकाया लाभ और एरियर का भुगतान किया जाए।
उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों को वैध करार दिया था। इसके बाद 29 अप्रैल और 27 मई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अतिथि अध्यापकों के पक्ष में निर्णय दिए हैं। बावजूद इसके सरकार अभी तक कोई सुनवाई नहीं कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में कार्यरत गेस्ट टीचर नियमितीकरण की सभी शर्तें पूरी करते हैं। वर्ष 2014 में उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू भी हुई थी, लेकिन आचार संहिता और बाद में नीतिगत बदलावों के कारण मामला अधर में लटक गया। अब न्यायालयों के फैसलों के बाद सरकार को नियमितीकरण प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए।
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धरने को संबोधित करते हुए राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ की महिला विंग की राज्य प्रधान पूनम कुमारी ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद अब सरकार को अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण में कोई देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी पात्र गेस्ट टीचरों को 28 मई 2014 से नियमित मानते हुए बकाया लाभ और एरियर का भुगतान किया जाए।
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उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों को वैध करार दिया था। इसके बाद 29 अप्रैल और 27 मई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अतिथि अध्यापकों के पक्ष में निर्णय दिए हैं। बावजूद इसके सरकार अभी तक कोई सुनवाई नहीं कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में कार्यरत गेस्ट टीचर नियमितीकरण की सभी शर्तें पूरी करते हैं। वर्ष 2014 में उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू भी हुई थी, लेकिन आचार संहिता और बाद में नीतिगत बदलावों के कारण मामला अधर में लटक गया। अब न्यायालयों के फैसलों के बाद सरकार को नियमितीकरण प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए।
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