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Haryana: कुरुक्षेत्र पहुंचे राज्यपाल, बोले- श्रीराम के मर्यादापूर्ण जीवन से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए

Tue, 17 Oct 2023 10:22 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 17 Oct 2023 10:22 PM IST
सार

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामलीला में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे। उन्होंने रामलीला मंचन का विधिवत शुभांरभ किया।

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Governor arrived as the chief guest at the International Ramlila organized at Geeta Gyan Sansthanam
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामलीला में पहुंचे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

श्रीराम मर्यादापुरूषोत्तम रहे हैं। उन्हें रामलीला मंचन के जरिए याद करना बेहद धार्मिक एवं प्रेरणादायक कार्य है। आज की युवा पीढ़ी को उनके संघर्ष, समर्पण, त्याग, आर्दश, नैतिक मूल्यों भरे जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। यह आह्वान राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने किया। वे मंगलवार देर रात कुरुक्षेत्र में गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामलीला में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।

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उन्होंने रामलीला मंचन का विधिवत शुभांरभ किया, जिस दौरान गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद श्री जयराम संस्थाओं के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, अंतरराष्ट्रीय रामलीला कमेटी के अध्यक्ष वेद प्रकाश टंडन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा भी मौजूद रहे।

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राज्यपाल ने कहा कि श्री राम सतगुण संपन्न थे और आज भी उनके इन गुणों को अपने जीवन में अपनाना बेहद जरूरी है, तभी बुराई रूपी रावण को हराया जा सकता है। राज्यपाल ने श्रीराम के जीवन के बारे में जिक्र करते हुए बताया कि जब श्रीराम का राज्यभिषेक होना था, उसी दौरान उसे बताया गया कि उनका राज्यभिषेक नहीं होगा बल्कि उन्हें 14 वर्ष के लिए बनवास जाना होगा।

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उन्होंने अपने पिता के ये आदेश माने और राज छोड़कर बनवास चले गए। अपने माता-पिता के प्रति यह भावना हर बच्चे में होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली व आसपास के स्कूलों व गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा बेहद ही सुंदर तरीके से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इसका संदेश दूर तक जाएगा और हर व्यक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा मिलेगी। इस दौरान गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने भी रामीलीला के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

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