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Kurukshetra News: श्रीमद्भागवत में किया गोवर्धन लीला का वर्णन
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कुरुक्षेत्र। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति की ओर से शांति एंक्लेव झांसा रोड पर श्रीमद्भागवत का आयोजन जारी है। मंगलवार को श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते हुए कथावाचक अनिल शास्त्री ने श्री गोवर्धन पूजा का वर्णन किया।
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि गोवर्धन लीला ज्ञान भक्ति बढ़ाने वाली लीला है। गोवर्धन लीला से इंद्र को और जगत को श्रीकृष्ण के स्वरूप का और सामर्थ्य का ज्ञान हुआ। गोवर्धन पूजा प्रकृति की पूजा है। भागवत कथा के मुख्य आयोजक महावीर मंढाण, संतोष मंढाण समस्त परिवार ने षोडशोपचार, भागवत पूजन किया एवं व्यास पूजन कर व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथावाचक ने कहा शरीर पांच तत्व से बना है और इन्हीं के कारण टिका हुआ है। यह उत्स (स्रोत) है और इस उत्स से नाता तोड़ा तो अस्तित्व नहीं टिकेगा। भ्रष्टाचार करने वाले लोग देश, समाज और धर्म की इमारत को खोखला बनाते हैं। गाय जो पूजनीय है, आज दयनीय हो गई है। इस पर विचार करें। उसकी इस दशा के कारण हम ही हैं। गाय अपना भी पोषण करेगी और हमारा भी लेकिन अपना पोषण तभी होगा, जब हम उसका शोषण रोकेंगे। बुद्ध ने भी कहा है, तुम खुद का दीया बनो। वह तेरे भीतर है, उसे प्रगट कर। कितने लोग अपने भीतर ईश्वरीय गुण को प्रकट करते हैं। जीव का मतलब ही है शिव की संभावना। भगवान तो तुम में भी हैं, उनको प्रकट करने का अवसर तुम गंवा रहे। इस मौके पर गोवर्धन भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।
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कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि गोवर्धन लीला ज्ञान भक्ति बढ़ाने वाली लीला है। गोवर्धन लीला से इंद्र को और जगत को श्रीकृष्ण के स्वरूप का और सामर्थ्य का ज्ञान हुआ। गोवर्धन पूजा प्रकृति की पूजा है। भागवत कथा के मुख्य आयोजक महावीर मंढाण, संतोष मंढाण समस्त परिवार ने षोडशोपचार, भागवत पूजन किया एवं व्यास पूजन कर व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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कथावाचक ने कहा शरीर पांच तत्व से बना है और इन्हीं के कारण टिका हुआ है। यह उत्स (स्रोत) है और इस उत्स से नाता तोड़ा तो अस्तित्व नहीं टिकेगा। भ्रष्टाचार करने वाले लोग देश, समाज और धर्म की इमारत को खोखला बनाते हैं। गाय जो पूजनीय है, आज दयनीय हो गई है। इस पर विचार करें। उसकी इस दशा के कारण हम ही हैं। गाय अपना भी पोषण करेगी और हमारा भी लेकिन अपना पोषण तभी होगा, जब हम उसका शोषण रोकेंगे। बुद्ध ने भी कहा है, तुम खुद का दीया बनो। वह तेरे भीतर है, उसे प्रगट कर। कितने लोग अपने भीतर ईश्वरीय गुण को प्रकट करते हैं। जीव का मतलब ही है शिव की संभावना। भगवान तो तुम में भी हैं, उनको प्रकट करने का अवसर तुम गंवा रहे। इस मौके पर गोवर्धन भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।
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