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Kurukshetra News: गीता के वैश्विक संदेश को अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में मिलेगा नया आयाम
Tue, 04 Nov 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 04 Nov 2025 01:10 AM IST
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कुरुक्षेत्र। सम्मेलन के ब्रोशर का विमोचन करने के दौरान कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा सहित अन्य सद
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में 24 से 26 नवंबर तक श्रीमद्भगवद्गीतोक्त स्वधर्मः कर्तव्यनिष्ठा, शांति और सद्भावना की प्रेरणा विषय पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए सोमवार को फैकल्टी लॉज में महत्वपूर्ण बैठक हुई। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सम्मेलन की तैयारियों, विभागीय जिम्मेदारियों और कार्य योजना पर विस्तार से चर्चा की और सम्मेलन के आधिकारिक ब्रोशर का विमोचन भी किया गया।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता सम्मेलन केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं बल्कि भारतीय दर्शन, संस्कृति और वैश्विक शांति संदेश को विश्व समुदाय तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि स्वधर्म, कर्तव्य, शांति और सद्भावना जैसे गीता-मूल्यों का प्रचार-प्रसार आज की वैश्विक परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक है। विदेश मंत्रालय इस वर्ष विशेष रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे सम्मेलन का अंतरराष्ट्रीय आयाम और विस्तृत होगा।
सम्मेलन में विश्वविद्यालय के 15 विभागों की ओर से 13 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में स्वधर्म, सामाजिक दायित्व, प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीकी, कला, विश्व-शांति और आधुनिक जीवन में गीता के अनुशीलन जैसे विषयों पर मंथन होगा। विशेषज्ञों की ओर से दिए जाने वाले वक्तव्य रिकॉर्ड किए जाएंगे और गीता के संदेश को आकर्षक और आधुनिक रूप में प्रसारित किया जाएगा। इसमें यूआईईटी छात्रों की ओर से गीता-आधारित तकनीकी प्रदर्शनी और शोधार्थियों-छात्रों की ओर से पोस्टर प्रेजेंटेशन भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
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कुलपति ने सभी समितियों को कहा कि यह आयोजन युवाओं में आध्यात्मिक चिंतन, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गर्व की भावना को बढ़ाने का अवसर है। सम्मेलन स्थल पर प्रदर्शनी, थीम-आधारित सेल्फी प्वाइंट, डिजिटल मीडिया कंटेंट और आकर्षक गतिविधियां इस आयोजन को युवाओं तक प्रभावी रूप से जोड़ेंगी। सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा और प्रो. मंजुला चौधरी ने बताया कि सम्मेलन के केंद्र में स्वधर्मः कर्तव्यनिष्ठा, शांति और सद्भावना की मूल भावना रहेगी। प्रत्येक सत्र श्रीमद्भगवद्गीता के विविध आयामों पर केंद्रित होकर आधुनिक विश्व के संदर्भ में चिंतन प्रस्तुत करेगा। इन चर्चाओं में अंतरराष्ट्रीय विद्वान, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल होंगे। इस मौके पर कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेंद्र पॉल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
बॉक्स
विभिन्न विभागों की ओर से आयोजित सत्रों में इन मुख्य विषयों पर होंगे व्याख्यान
- स्वधर्म और जीवन मूल्यों की स्थापना से लेकर
- प्रबंधन एवं नेतृत्व में गीता के सिद्धांत
- पर्यटन-शांति-सद्भावना दृष्टि
- निष्काम कर्म और मानसिक स्वास्थ्य
- सामाजिक दायित्व और मानव कल्याण
- मौलिक कर्तव्य और कानून
- शिक्षा में चरित्र निर्माण
- गीता और आधुनिक तकनीक, एथिक्स व एआई
- कला और सार्वभौमिक शांति
- वैश्विक शांति और सामंजस्य का दर्शन
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बैठक में व्यवस्थाएं मजबूत, कार्य आवंटन तय
बैठक में आवास, भोजन-पानी, स्वागत-प्रोटोकॉल, परिवहन, मंच प्रबंधन, सुरक्षा, मीडिया, स्मारिका प्रकाशन, डिजिटल रिकॉर्डिंग, प्रकाश व ध्वनि प्रबंधन आदि व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। कुलपति ने सभी समितियों को कार्य-विभाजन और समय-सीमा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता सम्मेलन केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं बल्कि भारतीय दर्शन, संस्कृति और वैश्विक शांति संदेश को विश्व समुदाय तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि स्वधर्म, कर्तव्य, शांति और सद्भावना जैसे गीता-मूल्यों का प्रचार-प्रसार आज की वैश्विक परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक है। विदेश मंत्रालय इस वर्ष विशेष रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे सम्मेलन का अंतरराष्ट्रीय आयाम और विस्तृत होगा।
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सम्मेलन में विश्वविद्यालय के 15 विभागों की ओर से 13 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में स्वधर्म, सामाजिक दायित्व, प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीकी, कला, विश्व-शांति और आधुनिक जीवन में गीता के अनुशीलन जैसे विषयों पर मंथन होगा। विशेषज्ञों की ओर से दिए जाने वाले वक्तव्य रिकॉर्ड किए जाएंगे और गीता के संदेश को आकर्षक और आधुनिक रूप में प्रसारित किया जाएगा। इसमें यूआईईटी छात्रों की ओर से गीता-आधारित तकनीकी प्रदर्शनी और शोधार्थियों-छात्रों की ओर से पोस्टर प्रेजेंटेशन भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
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कुलपति ने सभी समितियों को कहा कि यह आयोजन युवाओं में आध्यात्मिक चिंतन, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गर्व की भावना को बढ़ाने का अवसर है। सम्मेलन स्थल पर प्रदर्शनी, थीम-आधारित सेल्फी प्वाइंट, डिजिटल मीडिया कंटेंट और आकर्षक गतिविधियां इस आयोजन को युवाओं तक प्रभावी रूप से जोड़ेंगी। सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा और प्रो. मंजुला चौधरी ने बताया कि सम्मेलन के केंद्र में स्वधर्मः कर्तव्यनिष्ठा, शांति और सद्भावना की मूल भावना रहेगी। प्रत्येक सत्र श्रीमद्भगवद्गीता के विविध आयामों पर केंद्रित होकर आधुनिक विश्व के संदर्भ में चिंतन प्रस्तुत करेगा। इन चर्चाओं में अंतरराष्ट्रीय विद्वान, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल होंगे। इस मौके पर कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेंद्र पॉल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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विभिन्न विभागों की ओर से आयोजित सत्रों में इन मुख्य विषयों पर होंगे व्याख्यान
- स्वधर्म और जीवन मूल्यों की स्थापना से लेकर
- प्रबंधन एवं नेतृत्व में गीता के सिद्धांत
- पर्यटन-शांति-सद्भावना दृष्टि
- निष्काम कर्म और मानसिक स्वास्थ्य
- सामाजिक दायित्व और मानव कल्याण
- मौलिक कर्तव्य और कानून
- शिक्षा में चरित्र निर्माण
- गीता और आधुनिक तकनीक, एथिक्स व एआई
- कला और सार्वभौमिक शांति
- वैश्विक शांति और सामंजस्य का दर्शन
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बैठक में व्यवस्थाएं मजबूत, कार्य आवंटन तय
बैठक में आवास, भोजन-पानी, स्वागत-प्रोटोकॉल, परिवहन, मंच प्रबंधन, सुरक्षा, मीडिया, स्मारिका प्रकाशन, डिजिटल रिकॉर्डिंग, प्रकाश व ध्वनि प्रबंधन आदि व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। कुलपति ने सभी समितियों को कार्य-विभाजन और समय-सीमा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।