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पीतल के अर्जुन रथ ने किया आकर्षित
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:10 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव
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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में चल रहे शिल्प एवं सरस मेले में अलीगढ़ (यूपी) के रचनाकारों द्वारा तैयार किया गया अर्जुन रथ विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज दो किलोग्राम के इस अर्जुन रथ के पांच पीस में से चार को पर्यटकों ने देखते ही हाथोंहाथ ले लिया, जबकि मेला समापन के अभी छह दिन शेष है। इसी के मद्देनजर डिमांड बढ़ती देख रचनाकारों ने अब अलीगढ़ से कुछ और पीस मंगवाए हैं।
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रचनाकार दिलीप चौरसिया ने बताया कि उनके पास पीतल धातु से बनी विभिन्न तरह की रचनाएं हैं, जिनमें 200 से लेकर 85 हजार रुपये तक की आईटम शामिल हैं। लेकिन, इनमें खासतौर पर पहली बार लाए गए अर्जुन रथ को देखने और खरीदने का क्रेज पर्यटकों में कुछ ज्यादा है। चौरसिया के अनुसार अर्जुन रथ बनाने में उन्हें चार दिन का वक्त लगा और करीब पच्चीस सौ रुपये खर्चा आया। पीतल खर्च, लेबर और किराए-भाड़े के हिसाब से उन्होंने इस हस्त रचित अर्जुन रथ का दाम बेहद किफायती रखा है। वे इसे महज चार हजार रुपये में सेल कर रहे हैं। इसीलिए ग्राहक भी इसे घाटे का सौदा न मानकर खास दिलचस्पी से खरीद रहे हैं। पीतल धातु से मूर्तियों सहित अन्य सामग्री तैयार करना उन्होंने पुश्तैनी काम बताया, जिसमें पिता और भाई भी साथ देते हैं।
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उन्होंने दावा किया कि यह अर्जुन रथ अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव की यादगार के तौर पर पहली बार मेले में आया है। बताया कि इसे बनाने का आइडिया तब आया, जब दो वर्ष पहले उन्होंने यहां ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित ऐतिहासिक विशाल अर्जुन रथ को देखा। वहीं खास बात ये भी कि उनके द्वारा तैयार किया अर्जुन रथ को ऐतिहासिक निशानी का अहसास भी कराता है। इसके अलावा 65 किलोग्राम की राधाकृष्ण की मूर्ति को भी देखने में दर्शक खूब रूचि दिखा रहे हैं। हालांकि उन्होंने नोटबंदी को लेकर भी थोड़ी मायूसी जाहिर की। कारण ये कि पिछले दो वर्षों में जहां 8 से 12 हजार की सेल रोजाना होती थी, अर्जुन रथ को छोड़ अन्य सामान की सेल इस वर्ष घटकर तीन हजार के आसपास रह गई है।
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