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आषाढ़ अमावस्या पर भगवान शिव और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें : डॉ. सुरेश मिश्रा
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हिंदू पंचांग के अनुसार चौथे महीने आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या और हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। हलहारिणी अमावस्या किसानों के लिए बहुत महत्व रखती है। इस दिन भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। दुर्गा देवी मंदिर के अध्यक्ष व कॉस्मिक एस्ट्रो पिपली के डायरेक्टर डॉ. सुरेश मिश्रा के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति पवित्र नदियों में स्नान करता है और उसके बाद दान करता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। वहीं अमावस्या तिथि पर पितृ तर्पण, पिंड दान और ब्राह्मण भोजन का भी विधान है, जिससे पितृदोष से मुक्ति होती है। इसलिए आषाढ़ अमावस्या पर भगवान शिव और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें।
श्री मार्तंड पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 28 जून मंगलवार को सुबह 5:52 बजे से प्रारंभ होकर इसका समापन 29 जून बुधवार को सुबह 8:21 बजे होगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आषाढ़ अमावस्या के दिन शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद सूर्य मंत्र और गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही शास्त्र अनुसार आषाढ़ अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान-दक्षिणा आदि देने से पितृ प्रसन्न होकर जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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श्री मार्तंड पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 28 जून मंगलवार को सुबह 5:52 बजे से प्रारंभ होकर इसका समापन 29 जून बुधवार को सुबह 8:21 बजे होगा।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आषाढ़ अमावस्या के दिन शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद सूर्य मंत्र और गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही शास्त्र अनुसार आषाढ़ अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान-दक्षिणा आदि देने से पितृ प्रसन्न होकर जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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