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लोक कला भारतीय संस्कृति की आत्मा : डॉ. वीरेंद्र
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कुरुक्षेत्र। कला कार्यशाला में खाट बुनती महिलाएं। संवाद
- फोटो : केडी सिंह बाबू स्टेडियम में चल रही क्रिकेट प्रतियोगिता में प्रतिभाग करते खिलाड़ी।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भारत रत्न गुलजारीलाल नंदा नीति शास्त्र दर्शनशास्त्र केंद्र, संग्रहालय एवं पुस्तकालय, युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग और स्वावलंबी भारत अभियान के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय लोक कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेंद्र पाल ने किया।
उन्होंने कहा कि लोक कला भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो हमारे समाज, परंपराओं और जीवन मूल्यों का प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि लोक कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि लोक कला हमें अपने अतीत से जोड़ती है और सामाजिक एकता का संदेश देती है। डॉ. सौरव चौधरी ने कहा कि लोक कलाओं ने हमेशा समाज को एकजुट किया है और मानवता के मूल्यों को बनाए रखा है।
विवि परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने कहा कि लोक कला के माध्यम से व्यक्ति अपनी सृजनशीलता और सोचने की क्षमता को नए आयाम दे सकता है। नंदा सेंटर की निदेशक प्रो. शुचिस्मिता ने बताया कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय में पारंपरिक लोक कलाओं के संवर्धन और संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को समझ सकें।
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उन्होंने कहा कि लोक कला भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो हमारे समाज, परंपराओं और जीवन मूल्यों का प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि लोक कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि लोक कला हमें अपने अतीत से जोड़ती है और सामाजिक एकता का संदेश देती है। डॉ. सौरव चौधरी ने कहा कि लोक कलाओं ने हमेशा समाज को एकजुट किया है और मानवता के मूल्यों को बनाए रखा है।
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विवि परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने कहा कि लोक कला के माध्यम से व्यक्ति अपनी सृजनशीलता और सोचने की क्षमता को नए आयाम दे सकता है। नंदा सेंटर की निदेशक प्रो. शुचिस्मिता ने बताया कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय में पारंपरिक लोक कलाओं के संवर्धन और संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को समझ सकें।

कुरुक्षेत्र। कला कार्यशाला में खाट बुनती महिलाएं। संवाद- फोटो : केडी सिंह बाबू स्टेडियम में चल रही क्रिकेट प्रतियोगिता में प्रतिभाग करते खिलाड़ी।
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