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ब्रह्मसरोवर की 16 दुर्लभ प्रजाति की मछली और कछुओं पर है माफियाओं की नजर
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ब्रह्मसरोवर में 16 से ज्यादा प्रजातियों की मछलियां हैं। इनमें पावदा जैसी दुर्लभ किस्म की मछली भी शामिल हैं, जिसकी डिमांड अरब देशों में खूब है। यही कारण है कि यहां फिश माफियाओं से मिलीभगत का खेल चलता रहता है। सरोवर में जाल मिलने का ये पहला मामला नहीं है। पिछले दो दशक में यह तीसरा मौका है, जब ब्रह्मसरोवर से जाल बरामद हुआ है, मगर एफआईआर पहली बार दर्ज हुई है। अगर जांच होती है तो इस जाल में कई लोग फंस सकते हैं।
जिला मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ब्रह्मसरोवर में पावदा और ओमपोक जैसी मछलियां भी बड़ी तादाद में हैं। भारत में अन्य मछलियों की अपेक्षा इनकी मात्रा बहुत कम पायी जाती है। पावदा की दुबई और कुवैत सहित अन्य अरब देशों में काफी डिमांड है, जबकि भारत में पावदा मछली की कीमत 500 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम है। ब्रह्मसरोवर में रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, कैट फिश, ओमपोक, पाबदा, सोल, मल्ली, सिंघाड़ा सहित अन्य किस्म की मछली हैं। इसके अलावा लुप्त प्रजाति की मछली पाई जाती हैं।
सीसीटीवी कैमरे,
चौकीदार, गोताखोर, टूरिज्म पुलिस सब फेल
ब्रह्मसरोवर के चार किलोमीटर दायरे की निगरानी के लिये कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने सीसीटीवी कैमरे लगाये हुए हैं, इन कैमरों पर पिछले वर्षों में लाखों रुपये खर्च किये जा चुके हैं। वहीं, केडीबी का स्टाफ, चौकीदार, गोताखोर और इन सब में अहम टूरिज्म पुलिस भी ब्रह्मसरोवर पर तैनात हैं। इन्हें पैट्रोलिंग के लिये बाकायदा वाहन भी दिये हुए हैं, मगर यह सारी व्यवस्था फेल क्यों हो रही है? यह गहन जांच का विषय है।
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पुलिस शरारत बता रही थी, मगर डीसी ने लिया संज्ञान, तब हुई कार्रवाई
अमर उजाला ने मंगलवार को टूरिज्म पुलिस से जब इस घटना बारे जानकारी ली तो वे इस मामले को गंभीरता से लेने की बजाये शरारत बताकर लीपापोती करते दिखे, मगर डीसी शरणदीप कौर बराड़ के संज्ञान में यह मामला लाने के बाद त्वरित कार्रवाई शुरू हुई। अब चोरी के प्रयास का मामला दर्ज हो चुका है, जबकि संगठन इस प्रकरण में धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला भी दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
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जिला मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ब्रह्मसरोवर में पावदा और ओमपोक जैसी मछलियां भी बड़ी तादाद में हैं। भारत में अन्य मछलियों की अपेक्षा इनकी मात्रा बहुत कम पायी जाती है। पावदा की दुबई और कुवैत सहित अन्य अरब देशों में काफी डिमांड है, जबकि भारत में पावदा मछली की कीमत 500 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम है। ब्रह्मसरोवर में रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, कैट फिश, ओमपोक, पाबदा, सोल, मल्ली, सिंघाड़ा सहित अन्य किस्म की मछली हैं। इसके अलावा लुप्त प्रजाति की मछली पाई जाती हैं।
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सीसीटीवी कैमरे,
चौकीदार, गोताखोर, टूरिज्म पुलिस सब फेल
ब्रह्मसरोवर के चार किलोमीटर दायरे की निगरानी के लिये कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने सीसीटीवी कैमरे लगाये हुए हैं, इन कैमरों पर पिछले वर्षों में लाखों रुपये खर्च किये जा चुके हैं। वहीं, केडीबी का स्टाफ, चौकीदार, गोताखोर और इन सब में अहम टूरिज्म पुलिस भी ब्रह्मसरोवर पर तैनात हैं। इन्हें पैट्रोलिंग के लिये बाकायदा वाहन भी दिये हुए हैं, मगर यह सारी व्यवस्था फेल क्यों हो रही है? यह गहन जांच का विषय है।
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पुलिस शरारत बता रही थी, मगर डीसी ने लिया संज्ञान, तब हुई कार्रवाई
अमर उजाला ने मंगलवार को टूरिज्म पुलिस से जब इस घटना बारे जानकारी ली तो वे इस मामले को गंभीरता से लेने की बजाये शरारत बताकर लीपापोती करते दिखे, मगर डीसी शरणदीप कौर बराड़ के संज्ञान में यह मामला लाने के बाद त्वरित कार्रवाई शुरू हुई। अब चोरी के प्रयास का मामला दर्ज हो चुका है, जबकि संगठन इस प्रकरण में धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला भी दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।