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भारत में हुई सबसे पहले प्लास्टिक सर्जरी, नैनो टेक्नोलॉजी, गणित, एस्ट्रोनॉमी की शुरुआत
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First plastic surgery, nanotechnology, mathematics, astronomy started in India
- फोटो : Kurukshetra
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कुरुक्षेत्र। पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र में विज्ञान नाटक का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र के निदेशक डॉ. बीवी रमना रेड्डी ने कहा कहा कि भारत में विज्ञान का इतिहास बहुत पुराना है। प्लास्टिक सर्जरी, नैनो टेक्नोलॉजी, गणित, एस्ट्रोनॉमी की शुरुआत भारत में ही हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग के सहायक प्रो. डॉ. पुरुषोत्तम कुमार और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के रसायन शास्त्र विभाग के सहायक प्रो. डॉ. चेट्टी प्रभाकर ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। मुख्य अतिथि डॉ. रेड्डी ने कहा कि हमें स्वयं को कभी भी किसी से कम नहीं समझना चाहिए। प्रतिदिन स्वयं को समृद्ध और बेहतर बनाने के लिए जिज्ञासा व सृजनात्मकता के साथ-साथ दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों के साथ समायोजन बनाकर जीवन पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीयों के जीवन की कुछ प्रेरणा कथाएं साझा की।
केंद्र के परियोजना समायोजक केएस नेहरू ने कहा कि नाटक मंचन प्राचीन काल से ही सामाजिक समस्याओं को जनसाधारण के समक्ष रखने का एक प्रभावशाली तरीका है। विज्ञान केंद्र विज्ञान नाटकों के मंचन को निरंतर निर्बाध रूप से प्रोत्साहित करते रहे हैं। केंद्र के शिक्षा अधिकारी जितेंद्र दास ने कहा कि इस नाटक प्रतियोगिता में नौ स्कूलों के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। रविवार को भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
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कार्यक्रम की शुरुआत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग के सहायक प्रो. डॉ. पुरुषोत्तम कुमार और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के रसायन शास्त्र विभाग के सहायक प्रो. डॉ. चेट्टी प्रभाकर ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। मुख्य अतिथि डॉ. रेड्डी ने कहा कि हमें स्वयं को कभी भी किसी से कम नहीं समझना चाहिए। प्रतिदिन स्वयं को समृद्ध और बेहतर बनाने के लिए जिज्ञासा व सृजनात्मकता के साथ-साथ दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों के साथ समायोजन बनाकर जीवन पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीयों के जीवन की कुछ प्रेरणा कथाएं साझा की।
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केंद्र के परियोजना समायोजक केएस नेहरू ने कहा कि नाटक मंचन प्राचीन काल से ही सामाजिक समस्याओं को जनसाधारण के समक्ष रखने का एक प्रभावशाली तरीका है। विज्ञान केंद्र विज्ञान नाटकों के मंचन को निरंतर निर्बाध रूप से प्रोत्साहित करते रहे हैं। केंद्र के शिक्षा अधिकारी जितेंद्र दास ने कहा कि इस नाटक प्रतियोगिता में नौ स्कूलों के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। रविवार को भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
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