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Kurukshetra News: किसान पंचायत के जरिये धर्मनगरी में किसानों ने एकजुटता दिखाते फिर भरी हुंकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Nov 2024 02:33 AM IST
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Farmers show solidarity in Dharmanagari through Kisan Panchayat and roar again
कुरुक्षेत्र। संयुक्त किसान मोर्चा अब न केवल खुद को पहले से भी मजबूत करेगा बल्कि केंद्र व प्रदेश सरकार के लिए नई चुनौती भी बन सकता है। यहां तक कि किसानों की मांगें पूरी नहीं हुई तो पहले की तर्ज पर आंदोलन भी चला सकता है। जल्द ही दिल्ली में मोर्चा की बड़ी बैठक भी होगी जिसमें न केवल किसानों की मांगों व केंद्र सरकार के रवैये पर चर्चा होगी बल्कि अगली रणनीति भी बनाई जाएगी।
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केंद्र एवं प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को महाभारत की धरा पर एकजुटता दिखाते हुए किसान पंचायत के रूप में फिर हुंकार भरी, जिसमें भले ही प्रदेशभर से विभिन्न किसान संगठनों से 500 किसान नेता व प्रतिनिधि पहुंचे लेकिन एसकेएम के राष्ट्रीय स्तर के नेता भी पंजाब से यहां पहुंचे। इसके साथ ही किसानों ने अपने अगले आंदोलन की राह भी तय कर दी, जिसको लेकर किसान एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। किसानों ने केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार को जमकर घेरा तो खुले तौर पर कहा कि किसान आंदोलन एसकेएम के आह्वान पर फिर से चलाए जा रहे हैं।
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एसकेएम के बनाए माहौल का फायदा नहीं उठा पाई कांग्रेस : दर्शनपाल सिंह


पंजाब से आए एसकेएम के राष्ट्रीय नेता डॉ. दर्शनपाल सिंह ने किसानों में फिर से जोश भरा तो कहा कि एसकेएम पहले से भी मजबूत हो रहा है और देशभर के किसानों की लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह एसकेएम की मजबूती व आंदोलन का ही असर है कि 400 पार का नारा देने वाली भाजपा 240 सीटों तक सिमट कर रह गई। हालांकि हरियाणा प्रदेश में भी एसकेएम ने भाजपा के विरोध में पूरा माहौल बनाया था लेकिन कांग्रेस अपनी अंदरूनी लड़ाई के चलते इसका फायदा नहीं उठा पाई जबकि पंजाब में आप ने फायदा उठाते हुए सरकार बना ली थी। उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के किसान एक ही तर्ज के हैं और जिस दिन इन किसानों ने ठान लिया तो केंद्र सरकार को मजबूर होकर मांगें माननी पड़ेंगी।
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किसानों का किया अपमान, याद रखेंगे : रत्नमान
पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किसानों को जिंदल चौक पर ही रोक दिया। गुस्साए किसान वहीं पर धरना देकर बैठ गए, जहां संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता डॉ. दर्शनपाल सिंह, रत्नमान, बलबीर सिंह, कंवरजीत सिंह, जोगेंद्र नैन, सुरेश कौथ, विकास सीसर, हंसराज राणा, रणवीर मलिक, मनदीप नथवान, सुखविंद्र औलख, डॉ सुखदेव जम्मू, आजाद पालवा, सतेंद्र लोहचब, बाबा गुरदीप ने संबोधित किया। मुख्यमंत्री आवास तक जाने से रोकने से आक्रोशित होकर संयुक्त किसान मोर्चा ने पंचायत से अगले संघर्ष का आह्वान किया। किसान नेता रत्नमान ने कहा कि पहले से सूचना होेने के बावजूद मुख्यमंत्री का न मिलना, उन्हें बीच सड़क पर ही पुलिस प्रशासन द्वारा रोक देना व पीने के पानी तक की व्यवस्था न करना किसानों का अपमान है लेकिन वे इस अपमान को याद रखेंगे और समय आने पर जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को किसान का बेटा बताते हैं। उनसे ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी।






ये संगठन रहे शामिल
किसान पंचायत में किसान सभा, बीकेयू टिकैत, बीकेयू घासी राम नैन, बीकेयू एकता उग्रहा, किसान सभा अजय भवन, बीकेयू मांगेराम, पगड़ी संभाल जट्टा,भारतीय किसान मजदूर यूनियन, भारतीय किसान संघर्ष समिति, क्रांतिकारी किसान यूनियन, एआईकेकेएमएस, किसान महासभा, भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा, हरियाणा किसान मंच,उचाना धरना समेत अन्य संगठन शामिल रहे।

ये भी रखी अहम मांगें

-प्रदेश भर में पराली के नाम पर किसानों पर दर्ज मुकदमे खारिज किए जाएं। पराली जलाने को लेकर केंद्र सरकार से हुए समझौते को अमल में लाया जाए।
-पराली प्रबंधन की उचित व्यवस्था सरकार करे या इसके प्रबंधन पर आने वाला खर्च प्रति एकड़ 3000 रुपए के हिसाब से भरपाई की जाएं।
- पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित मुद्दों के निपटारे के लिए सरकार सभी प्रभावितों को साथ लेकर ठोस योजना बनाए, हर वर्ष किसानों पर दोष लगना बंद करें।
- सरकार खाद की सभी जिलों में आपूर्ति बढ़ाए। सभी बिक्री केंद्रों पर स्टॉक बोर्ड लगवाना सुनिश्चित करे।
- नकली खाद, बीज, दवाइयों की बिक्री पर रोक लगाई जाए।
- चुनाव के दौरान धान की सरकारी खरीद 3100 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने का वादा पूरा करें।
- आढ़तियों व अन्य एजेंसियों द्वारा किसानों को लगाया जा रहा कट बंद किया जाए।
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