{"_id":"698cdd7a0c0d2a8d9902e028","slug":"farmers-should-produce-natural-crops-kanwaljit-kaur-kurukshetra-news-c-45-1-sknl1005-149966-2026-02-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राकृतिक फसलों का उत्पादन करें किसान : कंवलजीत कौर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राकृतिक फसलों का उत्पादन करें किसान : कंवलजीत कौर
विज्ञापन
पिहोवा। किसान मेले में अवलोकन के दौरान लोगों से बातचीत करती जिला परिषद चेयरमैन कंवलजीत कौर। व
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिहोवा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से बुधवार को किसान मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला परिषद चेयरमैन कंवलजीत कौर ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने और पर्यावरण को बचाने में मदद मिल सकती है।
उन्हाेंने किसानों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसी खेती पद्धति है जो मिट्टी और पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए फसलों का उत्पादन करती है।
यह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से दूर रहती है। भाजपा नेता जय भगवान डीडी शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार की ओर से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजना चलाई जा गई है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि इस वर्ष कृषि विभाग के अधिकारियों के प्रयासों से फसल अवशेषों आगजनी के 95 प्रतिशत तक कमी आई है। विभाग के उपनिदेशक डाॅ. कर्मचंद ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय खरीदने पर प्रदेश सरकार की ओर से 30 हजार रुपये और तीन हजार रुपये चार ड्रम कि खरीदने पर अनुदान राशि किसानों को दी जाती है।
देसी खाद को बनाने के लिए किसान को मिट्टी, बेसन, देसी गुड, देसी गाय का मूत्र, देसी गाय के गोबर के मिश्रण को 24 से 48 घंटे सड़ा कर देसी खाद तैयार किया जाता है, जो खेतों में डालकर जीवाणुओं को पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों पर सब्सिडी से लेकर फसल विविधिकरण सहित सभी कार्यों पर सरकार की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। कार्यक्रम में मंच संचालन खण्ड कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार ने किया। किसान मेले के दाैरान किसानों को पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने व प्राकृतिक खेती और सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई।
इस मौके पर मत्स्य उप मंडल कृषि अधिकारी डाॅ. मनीष वत्स, पालन विभाग डॉ. सुमन, स्कूल छात्रा सीरत कौर, रूहानी, जस्सी मोहनपुर, वजीर दीवाना, पाला राम सहित भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्हाेंने किसानों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसी खेती पद्धति है जो मिट्टी और पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए फसलों का उत्पादन करती है।
विज्ञापन
यह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से दूर रहती है। भाजपा नेता जय भगवान डीडी शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार की ओर से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजना चलाई जा गई है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि इस वर्ष कृषि विभाग के अधिकारियों के प्रयासों से फसल अवशेषों आगजनी के 95 प्रतिशत तक कमी आई है। विभाग के उपनिदेशक डाॅ. कर्मचंद ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय खरीदने पर प्रदेश सरकार की ओर से 30 हजार रुपये और तीन हजार रुपये चार ड्रम कि खरीदने पर अनुदान राशि किसानों को दी जाती है।
देसी खाद को बनाने के लिए किसान को मिट्टी, बेसन, देसी गुड, देसी गाय का मूत्र, देसी गाय के गोबर के मिश्रण को 24 से 48 घंटे सड़ा कर देसी खाद तैयार किया जाता है, जो खेतों में डालकर जीवाणुओं को पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों पर सब्सिडी से लेकर फसल विविधिकरण सहित सभी कार्यों पर सरकार की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। कार्यक्रम में मंच संचालन खण्ड कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार ने किया। किसान मेले के दाैरान किसानों को पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने व प्राकृतिक खेती और सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई।
इस मौके पर मत्स्य उप मंडल कृषि अधिकारी डाॅ. मनीष वत्स, पालन विभाग डॉ. सुमन, स्कूल छात्रा सीरत कौर, रूहानी, जस्सी मोहनपुर, वजीर दीवाना, पाला राम सहित भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।

पिहोवा। किसान मेले में अवलोकन के दौरान लोगों से बातचीत करती जिला परिषद चेयरमैन कंवलजीत कौर। व