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मुआवजा के लिए डीसी से मिले किसान
कुरुक्षेत्र
Updated Wed, 05 Mar 2014 12:22 AM IST
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बारिश से फसलों में हुए नुकसान के चलते मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को डीसी निखिल गजराज से मिला। उन्होंने अपनी मांग से अवगत कराते हुए सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बेमौसमी बरसात के कारण बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देने की मांग की गई है। डीसी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जिला परिषद के चेयरमैन प्रवीण चौधरी, अजीत सिंह, मायाराम, करनैल सिंह, जोगिंद्र सिंह, सुखविंद्र सिंह, जसविंद्र सिंह, रणजीत सिंह, जसवंत सिंह, जोगा सिंह, शेर सिंह, रामपाल, गुरवंत सिंह, सतनाम सिंह, भूपेंद्र सिंह, मनजीत, भले सिंह, बलवान सिंह, निर्मल सिंह और जरनैल सिंह शामिल थे।
जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी ने डीसी को पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बरसात के कारण आलू व गेहूं की फसल 40 प्रतिशत से ज्यादा खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि गांव सोढी, बोढी, खेड़ी गादियां, झिंवरेहड़ी, किशनगढ़, उमरी, समानी, जिरबड़ी, मथाना, बीड़ मथाना, कड़ामी और मुनियारपुर सहित पूरे जिले में फसल खराब हुई है।
सारी स्थिति की जानकारी लेने के बाद डीसी ने तुरंत डीआरओ को मौके पर बुलाया। डीसी ने डीआरओ को पटवारियों को गिरदावरी करने के निर्देश दिए, ताकि पूरी रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेजी जा सके। किसानों ने कहा कि मौसम आधारित फसली बीमा योजना का भी लाभ किसानों को दिया जाना चाहिए और उन्हें प्रति एकड़ 50 हजार रुपये तक का मुआवजा मिलना चाहिए। चौधरी ने कहा कि किसानों की आलू की प्रति एकड़ आमदन एक लाख रुपये से अधिक होती है। ऐसे में किसानों को इतने पैसे जरूर मिलने चाहिए, ताकि वे आर्थिक रूप से परेशान न हों।
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आलू की फसल 20 प्रतिशत बर्बाद
दिसंबर 2013 और जनवरी 2014 में हुई बेमौसमी बरसात की वजह से प्रदेश भर में आलू की फसल बर्बाद हुई थी। इसके बाद भी फरवरी माह में बीच-बीच में जोरदार बरसात होने के कारण यह आंकड़ा और बढ़ा है।
अमर उजाला ने उठाया मुद्दा
पाला और बरसात के कारण आलू की फसल बर्बाद होने का समाचार पिछले दिनों अमर उजाला ने समाचार प्रकाशित किया था। यह समाचार माईसिटी के 4 फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था, जिसमें आंकड़े पंचकूला कार्यालय से लिए गए थे।
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जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी ने डीसी को पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बरसात के कारण आलू व गेहूं की फसल 40 प्रतिशत से ज्यादा खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि गांव सोढी, बोढी, खेड़ी गादियां, झिंवरेहड़ी, किशनगढ़, उमरी, समानी, जिरबड़ी, मथाना, बीड़ मथाना, कड़ामी और मुनियारपुर सहित पूरे जिले में फसल खराब हुई है।
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सारी स्थिति की जानकारी लेने के बाद डीसी ने तुरंत डीआरओ को मौके पर बुलाया। डीसी ने डीआरओ को पटवारियों को गिरदावरी करने के निर्देश दिए, ताकि पूरी रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेजी जा सके। किसानों ने कहा कि मौसम आधारित फसली बीमा योजना का भी लाभ किसानों को दिया जाना चाहिए और उन्हें प्रति एकड़ 50 हजार रुपये तक का मुआवजा मिलना चाहिए। चौधरी ने कहा कि किसानों की आलू की प्रति एकड़ आमदन एक लाख रुपये से अधिक होती है। ऐसे में किसानों को इतने पैसे जरूर मिलने चाहिए, ताकि वे आर्थिक रूप से परेशान न हों।
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आलू की फसल 20 प्रतिशत बर्बाद
दिसंबर 2013 और जनवरी 2014 में हुई बेमौसमी बरसात की वजह से प्रदेश भर में आलू की फसल बर्बाद हुई थी। इसके बाद भी फरवरी माह में बीच-बीच में जोरदार बरसात होने के कारण यह आंकड़ा और बढ़ा है।
अमर उजाला ने उठाया मुद्दा
पाला और बरसात के कारण आलू की फसल बर्बाद होने का समाचार पिछले दिनों अमर उजाला ने समाचार प्रकाशित किया था। यह समाचार माईसिटी के 4 फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था, जिसमें आंकड़े पंचकूला कार्यालय से लिए गए थे।