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Kurukshetra News: आलू की कीमतों में भारी गिरावट से किसान मायूस
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बाबैन। अनाजमंडी में आलू की खरीद करते हुए व्यापारी। संवाद
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बाबैन। क्षेत्र के किसानों के लिए आलू की खेती घाटे का सौदा साबित होती दिख रही है। बाबैन अनाजमंडी में मंगलवार को आलू के दामों में भारी गिरावट देखने को मिली है जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। मंडी में आलू का भाव मात्र 150 रुपये से 300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा, जो उत्पादन लागत से भी काफी कम बताया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि आलू की फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और डीजल पर भारी खर्च आता है। मौजूदा समय में एक क्विंटल आलू की लागत 500 से 600 रुपये तक पहुंच जाती है, जबकि मंडी में मिल रहा भाव लागत का आधा भी नहीं है। ऐसे में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मंडी में आलू की आवक अधिक होने और मांग कमजोर रहने के कारण दामों में गिरावट आई है। किसानों का आरोप है कि आलू की खरीद के लिए न तो कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य तय है और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस व्यवस्था की गई है जिससे बिचौलियों को फायदा और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। कई किसानों ने बताया कि कम दाम मिलने के कारण वे आलू को मंडी में बेचने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे किसानों में निराशा और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं।
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सतबीर सिंह, जयपाल, चमेल सिंह सहित अन्य किसानों का कहना है कि आलू जैसी नकदी फसल के लिए समर्थन मूल्य घोषित किया जाए या फिर सरकारी खरीद की व्यवस्था की जाए।
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किसानों का कहना है कि आलू की फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और डीजल पर भारी खर्च आता है। मौजूदा समय में एक क्विंटल आलू की लागत 500 से 600 रुपये तक पहुंच जाती है, जबकि मंडी में मिल रहा भाव लागत का आधा भी नहीं है। ऐसे में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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मंडी में आलू की आवक अधिक होने और मांग कमजोर रहने के कारण दामों में गिरावट आई है। किसानों का आरोप है कि आलू की खरीद के लिए न तो कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य तय है और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस व्यवस्था की गई है जिससे बिचौलियों को फायदा और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। कई किसानों ने बताया कि कम दाम मिलने के कारण वे आलू को मंडी में बेचने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे किसानों में निराशा और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं।
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सतबीर सिंह, जयपाल, चमेल सिंह सहित अन्य किसानों का कहना है कि आलू जैसी नकदी फसल के लिए समर्थन मूल्य घोषित किया जाए या फिर सरकारी खरीद की व्यवस्था की जाए।

बाबैन। अनाजमंडी में आलू की खरीद करते हुए व्यापारी। संवाद